यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (01 जुलाई 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना

चर्चा में क्यों

  • केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि के न्यूजलेटर "मत्स्य सम्पदा" के पहले संस्करण और प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों (पीएमएमएसवाई) को जारी किया गया।
  • न्यूज़लेटर “मत्स्य सम्पदा” मत्स्य पालन विभाग के प्रयासों का एक परिणाम है जिसके द्वारा संचार के विभिन्न साधनों के माध्यम से हितधारकों विशेष रूप से मछुआरों और मत्स्य पालकों तक पहुंचा जा सकेगा।
  • उन्हें मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र की नवीनतम घटनाओं के संदर्भ में जानकारी प्रदान की जा सकेगी।
  • इसे वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही से शुरू करते हुए तिमाही आधार पर प्रकाशित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana)

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के बारे में

  • भारत सरकार ने मई, 2020 में 20,050 करोड़ रुपये के निवेश के एक नई फ्लैगशिप योजना 'प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना' (पीएमएमएसवाई) की शुरुआत की थी।
  • इस योजना का उद्देश्य नीली क्रांति के माध्यम से देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जिम्मेदार विकास को सुनिश्चित करना है।
  • यह योजना केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में पाँच वर्षों के लिए वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 की अवधि में लागू की जाएगी।
  • गौरतलब है की भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है।
  • केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई नीली क्रांति, मछुआरों और मछली उत्पादक किसानों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए मत्स्य पालन के समेकित और समग्र विकास के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने पर केंद्रित है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

चर्चा में क्यों :-

  • हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने देश के 80 करोड़ लोगों को लाभान्वित करने उद्देश्य से प्रधानमत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि नवंबर के अंत तक विस्तारित कर दी है।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना वायरस के कारण हुई लॉकडाउन के फलस्वरूप आर्थिक मंदी ने लोगों के सम्मुख आजीविका तथा भूख का संकट उत्पन्न कर दिया। इसके साथ ही साथ जुलाई से नवंबर तक भारत में लगातार त्यौहार आते हैं जिसमे लोगों का व्यय बढ़ जाता है इन दोनों ही स्थितियों का सामना करने हेतु प्रधानमंत्री जी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में विस्तार की घोषणा की है। योजना के अंतर्गत 80 करोड़ लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति 5 किग्रा खाद्यान्न और प्रति परिवार एक किलोग्राम चने का वितरण किया जाएगा

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के विषय में

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को कोविड समस्या के दौरान खाद्यान आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु लाया गया था। पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना की सुरुआत मार्च में की गयी थी। इसके तहत 80 करोड़ व्यक्तियों, अर्थात, भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को इस योजना के तहत कवर किया गया एवं इनमें से प्रत्येक व्‍यक्ति को अगले तीन महीनों के दौरान मौजूदा निर्धारित अनाज के मुकाबले दोगुना अन्‍न दिया गया। इसके अतिरिक्त लोगो को यह अनाज मुफ्त में प्रदान किया गया। इसके साथ ही सभी व्यक्तियों को प्रोटीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार प्रत्‍येक परिवार को 1 किलो दालें मुफ्त में प्रदान की गयी।
  • वर्तमान में प्रधानमत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि नवंबर के अंत तक विस्तारित कर दी है।

योजना की प्रगति

  • पीएमजीकेएवाई के अंतर्गत, विभिन्न राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों ने अप्रैल-जून अवधि के लिए 116.34 एलएमटी खाद्यान्न का उठान किया है। अप्रैल, 2020 में 74.12 करोड़ लाभार्थियों को 37.06 एलएमटी (93 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण किया गया; मई, 2020 में 73.66 करोड़ लाभार्थियों को 36.83 एलएमटी (91 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण किया गया और जून, 2020 महीने में 59.29 करोड़ लाभार्थियों को 29.64 एलएमटी (74 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण हुआ।
  • भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत लगभग 46,000 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत वित्तीय व्यय वहन कर रही है। 6 राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली और गुजरात को गेहूं का आवंटन किया जा चुका है और शेष राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों को चावल का आवंटन किया गया है
  • दाल हेतु अप्रैल से जून तक कुल 5.87 एलएमटी की आवश्यकता का अनुमान था। भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत लगभग 5,000 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत भार वहन कर रही है। अभी तक, 5.79 एलएमटी दालें राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को भेजी जा चुकी हैं और 5.59 एलएमटी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों तक पहुंच चुकी हैं, वहीं 4.47 एलएमटी दालों का वितरण किया जा चुका है।
  • 18 जून 2020 तक भंडार में कुल 8.76 एलएमटी दालें (तुअर-3.77 एलएमटी, मूंग-1.14 एलएमटी, उड़द-2.28 एलएमटी, चना- 1.30 एलएमटी और मसूड़- 0.27 एलएमटी) उपलब्ध थीं।

भारत में टिड्डियों का प्रकोप

चर्चा में क्यों?

  • देश के कई हिस्सों में टिड्डियों के प्रकोप से निपटने के लिए वायुसेना के Mi 17 हेलिकॉप्टरों का भी इस्तेमाल करने के लिए ट्रायल किया गया। इस ट्रायल में सभी तरह के देशी कम्पोनेंट्स का इस्तेमाल करते हुए आसमान में हवा से कीटनाशक का छिड़काव किया गया जो कि सफल रहा है। इसके पहले टिड्डियों के प्रकोप से निपटने के लिए ड्रोन का भी सफलतम प्रयोग किया गया था ।
  • टिड्डियों के दल ने भारत के कई राज्यों पंजाब, राजस्थान,उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्यप्रदेश में धावा बोल दिया है। ये जहाँ कृषि क्षेत्र को नुकसान पंहुचा रहे है वही सिविल एविएशन समेत अन्य क्षेत्र के इससे प्रभावित होने की आशंका है। FAO के अनुसार टिड्डियों से खतरे के संदर्भ में सोमालिया व इथोपिया के बाद भारत का तीसरा स्थान है।

टिड्डियों का प्रकोप (Locust Outbreak)

टिड्डियों के बारे में

  • टिड्डी ऐक्रिडाइडी परिवार के ऑर्थाप्टेरा गण से संबंधित उष्णकटिबंधीय कीट है। विश्व में टिड्डियों की 10 प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं:- रेगिस्तानी टिड्डी, बोम्बे टिड्डी, प्रवासी टिड्डी, इटेलियन टिड्डी, मोरक्को टिड्डी, भूरी टिड्डी, दक्षिणी अमेरिकन टिड्डी, आस्ट्रे्लियन टिड्डी और वृक्ष टिड्डी। रेगिस्तानी टिड्डों की प्रजाति को सबसे खतरनाक और विनाशकारी माना जाता है। भारत में रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी टिड्डियां, बॉम्बे टिड्डी और ट्री (वृक्ष) टिड्डियों की चार प्रजातियों का प्रकोप होता है।
  • सामान्यतः गर्मी और बारिश में टिड्डियां के विकास की परिस्थितियां काफी अनुकूल होती हैं एवं इस मौसम में यह काफी तेजी से प्रजनन करते हुए तीन महीनों में 20 गुना तक बढ़ सकते हैं। टिड्डियों का एक छोटा दल एक दिन में 10 हाथी और 25 ऊंट या 2500 आदमियों के बराबर खाना खा सकता है।

टिड्डियों के हॉट स्पॉट केंद्र

  • पाकिस्‍तान का बलूचिस्‍तान और यमन टिड्डियों का प्रजनन केंद्र माना जाता है। भारत में टिड्ड‍ियां अधिकतर पाकिस्तान की रास्ते से प्रवेश करती है। FAO के पूर्वानुमान के मुताबिक, हॉर्न ऑफ अफ्रीका( सोमालिया, इथोपिया, इरिट्रिया और जिबूती) रेगिस्तानी टिड्डों के गढ़ बन गए हैं।

क्यों बढ़ रहा है टिड्डियों का प्रकोप?

  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम परिवर्तन होने से जहां एक और उष्णकटिबंधीय चक्रवात के कारण वर्षा ज्यादा हो रही है वहीं दूसरी ओर जाड़ों में वर्षा होने से इनका प्रजनन काल बढ़ गया है।

क्या है टिड्डियों के प्रकोप से बचने के तरीके?

  • टिड्डियों के अंडों को नष्ट करना
  • माइक्रोनियर अथवा अलवामास्ट पावर स्प्रेयर से मैलाथिआन जैसे कीटनाशकों का छिड़काव
  • टिड्डियों के लिए कुशल चेतावनी प्रणाली का विकास करना

भारत में टिड्डी चेतावनी तंत्र

  • भारत में टिड्डियों के प्रकोप से बचने के लिए टिड्डी चेतावनी संगठन की स्थापना (एलडब्ल्यूओ) 1946 में की गई थी। इसका केन्‍द्रीय मुख्‍यालय फरीदाबाद में एवं क्षेत्रीय मुख्‍यालय जोधपुर में स्थित है। इसके अलावा 10 टिड्डी सर्किल कार्यालय समेत एक टिड्डी क्षेत्र अन्‍वेषण केन्‍द्र बीकानेर में स्‍थित है।

National Doctor's Day- 1 जुलाई

  • आज कोरोना वारियर्स के अग्रिम पंक्ति में तैनात चिकित्सकों को समर्पित नेशनल डॉक्टर डे है। आपको बता दें प्रति वर्ष 1 जुलाई को देशभर में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) के जन्म तिथि और पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष 1 जुलाई को यह दिन मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा सर्वप्रथम 1991 में नेशनल डॉक्टर डे मनाया गया था।
  • यह दिवस स्वास्थ्य क्षेत्र के मानवतावादी पेशे में काम करने वाले उन सारे डॉक्टरों को समर्पित है जो हर विकट परिस्थिति में चिकित्सक मूल्य को बरकरार रख मानव धर्म को निभाते हुए मरीजों के इलाज हेतु बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाते हैं।

1st July - National Doctor's Day

डॉ. बिधान चंद्र राय के बारे में

  • 1 जुलाई 1882 को डॉ बिधान चंद्र राय का जन्म बिहार के पटना जिले के बांकीपुर स्थित खजांची रोड में हुआ था। कोलकाता से अपनी मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद डॉक्टर विधान चंद्र राय ने आगे की पढ़ाई के लिए लंदन का रूख किया। लंदन से उन्होंने एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि प्राप्त की। पुनः पढ़ाई पूरी करने के उपरांत वह भारत लौट कर चिकित्सीय कार्यों में जुट गए एवं बाद में कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता के रूप में नियुक्त हुए। ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने कभी भी मरीजों से फीस नहीं ली।
  • डॉ बिधान चंद्र की ख्याति मात्र एक चिकित्सक के रूप में नहीं थी बल्कि वह एक प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी भी थे। असहयोग आंदोलन से जुड़ने के उपरांत उनको प्रसिद्धि मिली एवं इसके उपरांत उन्होंने बढ़ चढ़कर सभी गांधीवादी राष्ट्रवादी आंदोलन में भाग लिया। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ते हुए सक्रिय राजनीति में कदम रखा। भारत की आजादी के उपरांत यह पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त हुए लेकिन मुख्यमंत्री होने के बावजूद उनका परम उद्देश्य मानव सेवा और जन कल्याण ही था। उनकी अभिनव सोच और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए प्राय उन्हें पं. बंगाल राज्य का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है। महान स्वतंत्रता सेनानी एवं महान मानवतावादी के रूप में विख्यात डॉ बिधान चंद्र की 1962 में 80 वर्ष की आयु में अपने जन्मदिन के दिन अर्थात 1 जुलाई को मृत्यु हो गई। डॉ बिधान चंद्र राय को उनके योगदान के कारण भारत सरकार के द्वारा बाद में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

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