भारत में वन्य जीवों का संरक्षण: प्रभावी कानून की आवश्यकता - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


भारत में वन्य जीवों का संरक्षण: प्रभावी कानून की आवश्यकता - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


चर्चा का कारण

  • हाल ही में भारत के सबसे शिक्षित राज्य केरल में कुछ लोगों ने एक गर्भवती भूखी हथिनी को अनानास के बीच पटाखे डालकर िखला दिए। ये पटाखे हथिनी के मुंह में फट गए। इससे हथिनी के साथ-साथ उसके पेट में पल रहा बच्चा भी मर गया।
  • प्रायः देखा गया है कि अतिक्रमण से परेशान वन्य जीव आबादी वाले इलाके में जाने लगे, वन्य जीवों का भटकना भी इंसान को नापसंद आया और धीरे-धीरे हालात इतने खराब हो गए कि वन्य जीवों की कुछ जातियाँ तो हमारा शिकार हुईं जबकि कुछ प्राकृतिक आवास पर अतिक्रमण की वजह से लुप्त हो गईं, तो कई पारिस्थितिकी तंत्र में आए बदलाव की वजह से विलुप्त हो गईं, तो कुछ लुप्त होने की कगार पर हैं। परिचय
  • जानकारों का मानना है कि जंगल कम होते जा रहे हैं जिससे वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में जमीन के इस्तेमाल को लेकर विशेष नीति नहीं है।

परिचय

  • अनानास या मीट में हल्के विस्फोटक पैक करके जानवरों को खेतों में आने से रोकना केरल के स्थानीय इलाकों में काफी प्रचलित है। इसे मलयालम में 'पन्नी पड़कम' कहा जाता'है जिसका मतलब है फ्पिग क्रैकरय्। ये विस्फोटक स्थानीय स्तर पर ही बनाई गई सामग्री या त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले पटाखों से तैयार किया जाता है। जानकारों का मानना है कि विस्फोटक और अलग-अलग तरह के जाल का इस्तेमाल सिर्फ केरल में ही नहीं पूरे भारत में किया जाता है।
  • गौरतलब है कि इस तरह विस्फोटक का शिकार हुए हाथियों से जुड़ी आिखरी घटना अप्रैल में हुई थी जब 8 या 9 साल का एक हाथी कोल्लम जिले के पुनालुर फॉरेस्ट डिविजन में पठानपुर के पास विस्फोटक के संपर्क में आया था। बाधित क्षेत्र

बाधित क्षेत्र

  • जानकारों का मानना है कि जंगल कम होते जा रहे हैं जिससे वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में जमीन के इस्तेमाल को लेकर विशेष नीति नहीं है।
  • भारत के पास ऐसी नीति नहीं है जिससे तय किया जा सके कि जिनको सामाजिक न्याय की जरूरत है उन्हें सुविधाएं देकर जंगलों से दूर किया जा सके अर्थात उन्हें भी सुरक्षित रहने की जरूरत है और जानवरों को भी। इसे लैंडस्केप प्लानिंग कहते हैं जो कि नहीं हो रही है।
  • दरअसल, हाथियों की आवाजाही के लिए बने गलियारे उनकी सुरक्षा करने और आबादी संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं । हाथियों का झुंड इन कारीडोर से होकर ही एक जगह से दूसरे जगह तक जाता है- इस राह में बनने वाली सड़कें, रेलवे की पटरियों, बिजली के खंभों, नहरों और इंसानी बस्तियों ने हाथियों को अपना प्राकृतिक रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया है। नतीजतन हाथियों की मौत के साथ ही इंसानों के साथ उनके संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जलवायु परिवर्तन भी शायद स्थानीय समुदायों और जानवरों पर काफी असर डाल रहा है।
  • भारत में करीब 27,000 जंगली एशियाई हाथी हैं जोकि इनकी वैश्विक आबादी का 55 फीसदी है। फिर भी देश में इनके भविष्य की अनिश्चिता बनी हुई है।

हाथी गलियारा का विकास

  • हाथियों की बढ़ती समस्या के बाद भारत में अब कोशिश की जा रही है कि दो जंगलों के बीच एक गलियारा विकसित कर उसका संरक्षण किया जा सके। विशेषज्
  • मानते हैं कि इससे हाथियों को जंगलों में ही रोकना संभव होगा और उनके आबादी वाले इलाकों में घुसने की घटनाओं में कमी आएगी।
  • देश में हाथियों की आवाजाही के लिए 110 गलियारे हैं। इनमें से 23 पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से 70 फीसदी का नियमित रूप से इस्तेमाल होता है जबकि बाकी का कभी-कभार। लेकिन इनमें से 29 फीसदी गलियारों पर इंसानों का अतिक्रमण हो गया है। इसके अलावा 66 फीसदी गलियारे ऐसे हैं जिनसे होकर हाइवे गुजरता है। 22 फीसदी गलियारे से रेलवे की पटरियां गुजरती हैं।
  • गौरतलब है कि हाथी गलियारा भूमि का एक संकीर्ण भाग होता है जो दो बड़े आवास क्षेत्रें को आपस में जोड़ता है। बहुत से ऐसे गलियारे पहले ही किसी न किसी सरकारी एजेंसी जैसे वन या राजस्व विभाग के नियंत्रण में हैं। गलियारों में बड़ी वाणिज्यिक सम्पदाओं तथा अनाज या कृषि भूमि में अप्रयुत्तफ़ स्थानों को शामिल किया जा सकता है।
  • दक्षिण भारत (93%) और उत्तरी पश्चिम बंगाल (86%) में अवस्थित लगभग सभी हाथी गलियारों का नियमित रूप से उपयोग किया जाता है। इसी प्रकार पूर्वाेत्तर भारत में अवस्थित 66% गलियारों का भी नियमित रूप से उपयोग किया जाता है।

एशिया और भारत में हाथियों की स्थिति

  • एशिया के 13 देशों में हाथी पाए जाते हैं। इसमें भारत भी शामिल है। भारत में हाथी पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा सहित 16 राज्यों में पाए जाते हैं। उत्तर भारत में हाथियों की संख्या ना के बराबर है।
  • झारखंड और तमिलनाडु सरकार ने हाथी को राज्य पशु घोषित किया है। देखा जाए तो तमिलनाडु और कर्नाटक में सबसे अधिक हाथी पाए जाते हैं। असम राज्य में हाथियों को सबसे ज्यादा बंधक बनाकर रखा जाता है या पाला जाता है। हालांकि ऐसा करना कानूनन अपराध है, परंतु फिर भी यह प्रक्रिया वर्षों से निर्बाध रूप से चल रही है।

सरकारी प्रयास

  • भारतवर्ष में वन्य जीवों को विलुप्त होने से बचाने के लिये पहला कानून 1872 में फ्वाइल्ड एलीफेंट प्रोटेक्शन एक्टय् बनाया गया। इसके बाद वर्ष 1927 में फ्भारतीय वन अधिनियमय् बनाया गया। जिसमें वन्य जीवों के शिकार और वनों की अवैध कटाई को अपराध माना गया और इसमें सजा का भी प्रावधान रखा गया।
  • वहीं आजादी के बाद भारत सरकार ने 'इंडियन बोर्ड फॉर वाइल्' लाइफ' बनाया। फिर 1956 में एक बार फिर 'भारतीय वन अधिनियम' 'रित हुआ, 1972 में फ्वन्यजीव संरक्षण अधिनियमय् पारित हुआ, जिसमें विलुप्त होते वन्य जीवों और दूसरे लुप्त होते प्राणियों के संरक्षण का प्रावधान है।
  • हमारे संविधान में 42वें संशोधन (1976) अधिनियम के द्वारा दो नए अनुच्छेद 48 और 51 को जोड़कर वन्य जीवों से सम्बन्धित विषय को सूची में शामिल किया गया। वन्य जीवों की बिगड़ते हालात के सुधार और संरक्षण के लिये फ्राष्ट्रीय वन्य जीव योजनाय् 1983 में शुरू की गई। इन अधि नियम और कानूनों के अलावा जरूरत थी ऐसी जगह की, जहाँ वन्यजीव सुरक्षित रहें और इंसानी अतिक्रमण न हो। इसलिये नेशनल पार्क और वन्य प्राणी अभयारण्य बनाए गये।
  • भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वन्यजीवों की हत्या और शिकार के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है। इस अधिनियम की अनुसूची और अनु- 2 के तहत अवैध शिकार, अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान को क्षति पहुंचाने वाले दोषियों को (इंडियन पैनल कोड की धारा 429 के तहत कार्रवाई) कम से कम 3 साल की सजा दिए जाने का प्रावधान है। आवश्यकता पड़ने पर इस सजा को 7 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। साथ ही इसमें दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी किया जा सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता यानी (प्च्ब्) की धारा 429 उन मामलों में लागू होती है, जिनमें वन्यजीवों हाथी, ऊंट, घोड़े और खच्चर आदि की हत्या करना, या उन्हें मारने के मकसद से जहर देना या विकलांग बना देना शामिल है। फिर चाहे उस वन्यजीव की कीमत या महत्ता कितनी भी हो। ऐसे मामलों में कानून ने कड़ी सजा का प्रावधान कर रखा है।
  • भारत ने भारतीय हाथी (एशियाई हाथी) को फ्राष्ट्रीय विरासत पशुय् घोषित किया है। यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची प् के तहत पशु को अधिकतम कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
  • भारत में 30 हाथी रिजर्व क्षेत्र बनाए गए हैं। 13 राज्यों में 32 हाथी रेंज बनाए गए हैं। भारत सरकार द्वारा 1982 में भारतीय वन्य जीव संस्थान की स्थापना एक स्वशासी संगठन के रूप में की गई। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वर्ष 1917 से 1931 तक 15 वर्षीय योजना भी क्रियान्वित की जा रही है। वर्ष दो हजार ग्यारह से 'हाथी मेरे साथी’ योजना'भी शुरू हुई है। हाथियों के संरक्षण के लिए एक साइट्स संस्था भी कार्यरत है।
  • देश में हाथियों की संख्या में आई कमी को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रलय ने 1991-92 में हाथी परियोजना शुरू की। इस परियोजना को आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश ओर पश्चिम बंगाल राज्यों में क्रियान्वित किया जा रहा है।

आगे की राह

  • इस प्रकार के संरक्षण का उद्देश्य जहाँ एक ओर हाथियों को सुरक्षा प्रदान करना है, वहीं दूसरी ओर इन क्षेत्रें में रहने वाले लोगों को भी सुरक्षा प्रदान करना है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि एकाध ऐसी घटनाओं से स्थिति में खास सुधार होने की गुंजाइश कम ही है। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारों को वन्यजीव प्रेमियों और उनके संगठनों के साथ मिल कर एक ठोस योजना तैयार कर उसे अमली जामा पहनाना होगा- इसमें हाथियों के रहने की जगह बढ़ाने और उसके संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी।

सामान्य अध्ययन पेपर-3

  • संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत ने भारतीय हाथी (एशियाई हाथी) को फ्राष्ट्रीय विरासत पशुय् घोषित किया है फिर भी इनकी संख्या मे गिरावट देखी गयी है । देश में हाथियों की संख्या में आई कमी को दृष्टिगत रखते हुए उनके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा करें।

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