पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

संदर्भ:

  • हाल ही में सरकार ने ईमानदारी से कर चुकाने वालों के लिए एक नया प्‍लेटफॉर्म ‘पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान (Transparent Taxation – Honoring the Honest)’ लॉन्‍च किया है। इसमें फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस अपील और करदाता चार्टर जैसे बड़े कर सुधार शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य करदाताओं को सहूलियत प्रदान करना है ताकि कर अनुपालन को आसान बनाया जा सके।

‘पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान’ योजना के प्रावधान

फेसलेस कर प्रणाली: फेसलेस असेसमेंट का उद्देश्य करदाता और आयकर विभाग के बीच मानवीय इंटरफेस को खत्म करना है। फेसलेस असेसमेंट की मुख्य विशेषताओं है-

  • डेटा विश्लेषण और एआई-आधारित मूल्यांकन के उपयोग से करदाताओं का चयन
  • प्रादेशिक क्षेत्राधिकार का उन्मूलन अर्थात एक करदाता चाहे जिस शहर का हो उसके आईटीआर का आकलन कंप्यूटर द्वारा यादृच्छिक चयन के माध्यम से किसी अन्य शहर में किया जा सकता है।
  • अपील के लिए मामलों का स्वचालित यादृच्छिक आवंटन
  • कोई भौतिक उपस्थिति या कार्यालयों का दौरा करने की आवश्यकता नहीं
  • अलग-अलग शहरों में ड्राफ़्ट मूल्यांकन, समीक्षा और अंतिम रूप देना।
  • इसके अपवादों में केवल गंभीर धोखाधड़ी, कर चोरी, संवेदनशील खोज मामले, अंतर्राष्ट्रीय कराधान, काला धन और बेनामी संपत्ति के मामले ही शामिल किए गए है। करदाता चार्टर: करदाता चार्टर में आयकर विभाग के लिए 14 और करदाताओं के लिए 6 प्रतिबद्धताएं दी गयी है। करदाता चार्टर के अनुसार आयकर विभाग इन कामों के लिए प्रतिबद्ध है-
  • विभाग करादाताओं के साथ सभी कार्यों में तेज, विनम्र और पेशेवर सहायता देगा।
  • आयकर विभाग प्रत्येक करदाता को ईमानदार मानते हुए उचित व्यवहार करेगा।
  • उचित व पारदर्शी अपील और समीक्षा की व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध कराएगा।
  • विभाग कानून के तहत पालन करने के दायित्वों को पूरा करने के लिए सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा।
  • विभाग इनकम टैक्स की हर कार्यवाही में फैसला कानून के तहत दिए गए समय के अंदर लेगा।
  • विभाग कानून के तहत दी गई राशि को ही जमा करेगा।
  • विभाग कानून की प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करेगा और किसी जांच, पड़ताल और प्रवर्तन कार्यवाही में जरूरत से ज्यादा दखल नहीं देगा।
  • विभाग करदाता द्वारा दी गई किसी जानकारी का खुलासा नहीं करेगा, जब तक कानून द्वारा वह प्रमाणित नहीं हो।
  • विभाग अपनी अथॉरिटी को उसकी कार्यवाही के लिए जिम्मेदार मानेगा।
  • विभाग हर करदाता को अपना चुना हुआ प्रतिनिधि रखने की इजाजत देगा।
  • विभाग करदाता को शिकायत दर्ज कराने और जल्द उसका निपटारा करने की व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।
  • विभाग टैक्स से जुड़े मुद्दों को निश्चित समय में सुलझाने के लिए एक सही और निष्पक्ष व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।
  • विभाग समय-समय पर रिपोर्ट और सेवा मानकों को प्रकाशित करेग्गा।
  • विभाग कर कानून को लागू करने और कर से जुड़ी मुकदमेबाजी के मामले में कम्‍लायंस की लागत को ध्‍यान में रखेगा।

करदाता की जिम्मेदारियां: आय करदाताओं की प्रतिबद्धताएं

  • ईमानदार रहें और ईमानदारी से टैक्‍स दें: करदाताओं से उम्‍मीद है कि वे सभी जानकारियों का खुलासा करेंगे और अपनी टैक्‍स देनदारी को चुकाएंगे।
  • सूचित रहें: करदाताओं से अपेक्षा है कि वे अपनी टैक्‍स देनदारियों के प्रति सजग रहें और जरूरत पड़ने पर विभाग से मदद लें।
  • सटीक रिकॉर्ड रखें: करदाताओं से अपेक्षा है कि वे कानून के अनुसार अपने रिकॉर्डों को ठीक से रखें।
  • जानें कि प्रतिनिधि उनकी ओर से क्‍या करते हैं: टैक्‍सपेयर्स से उम्‍मीद है कि वे जानें कि उनके अधिकृत प्रतिनिधि क्‍या सूचनाएं दे रहे हैं।
  • समय से प्रतिक्रिया दें: करदाताओं से अपेक्षा है कि वे समय से अपनी चीजों को जमा करें।
  • समय से टैक्‍स भुगतान करें: लोगों से समय से अपना टैक्‍स जमा करने की अपेक्षा की गई है।

भारतीय कर प्रणाली में सुधार के प्रयास और मौजूदा ढांचे से जुड़े मुद्दे

भारत की कर प्रणाली संरचना में कई खामिया विद्यमान है जिसकी आलोचना विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। भारत की कर प्रणाली के प्रमुख दोषों में निम्न कमियों को रखा जा सकता है-

  • कर जटिल संरचना
  • संकुचित कर आधार
  • कर वसूलने की गैर-वैधानिक प्रकृति
  • कर अधिकारीयों की जवाबदेही में कमी
  • निजता और गोपनीयता का उल्लंघन
  • पूर्वव्यापी कराधान की समस्या
  • बलपूर्वक कर संग्रह
  • प्रभावी शिकायत निवारण का अभाव

भारत सरकार द्वारा भारत की कर प्रणाली संरचना में सुधार के लिए समय समय पर कई कदम उठाये गए जिसमे से प्रमुख है-

  • कर विभाग द्वारा 1998 में सेवोत्तम फ्रेमवर्क के साथ एक नागरिक चार्टर को अपनाया गया था। लेकिन यह गैर-वैधानिक प्रकृति और जवाबदेही तंत्र की कमी के कारण प्रभावकारी सिद्ध नहीं हुआ।
  • 2002 के केलकर टास्क फोर्स की सिफारिशों के अनुसार कर विभाग में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक लोकपाल की व्यवस्था भी की गयी थी लेकिन यह भी अप्रभावी साबित हुआ।
  • हाल के वर्षों में, प्रौद्योगिकी के उपयोग से कर प्रणाली में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन लेकिन निजता और गोपनीयता, बलपूर्वक कर संग्रह, पूर्वव्यापी कराधान जैसे मुद्दे बने हुये हैं।
  • कर प्रशासन सुधार आयोग ने 2014 में इन मुद्दों और करदाताओं की जरूरतों के आधार पर एक संशोधित चार्टर की आवश्यकता की थी। सरकार द्वारा जारी नए चार्टर में कर दाताओं की इन्हीं चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया गया है।

नए चार्टर के समुचित कार्यान्वयन हेतु प्रमुख सुझाव

नए चार्टर के कार्यान्वयन के लिए सर्वोत्तम वैश्विक मानकों को अपनाना जाना चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • पूर्वव्यापी कराधान पर कानूनी सीमा
  • सार्वजनिक परामर्श से कर नीतियों और कानूनों का निर्धारण
  • ईमानदारी की धारणा: एक अपराध के लिए दोहरे दंड से सुरक्षा, आदेश जारी होने से पहले सुनवाई का अधिकार और किसी करदाता को स्वयं के अभियोजन पक्ष में सहायता करने के लिए मजबूर नहीं करने के सिद्धांत (principle against self incrimination) को अपनाया जाना चाहिए।
  • अनुपालन की लागत को कम करना:
  • रिटर्न भरने के लिए सरकारी डेटा का उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे चार्टर एकाउंटेंट की आवश्यकता से बचा जा सकता है। साथ इससे सरकारी डेटा संग्रह में भी सुधार होगा।
  • करदाताओं को सहायता: व्यक्तिगत करदाताओं, MSME's, व्यवसायों, वरिष्ठ नागरिकों, विकलांग व्यक्तियों और ऐसे करदाता जो दूरदराज के क्षेत्रों से आते है, आदि को ऑनलाइन सहायता प्रदान की जा सकती है। इससे कर प्रणाली के प्रति विश्वास और स्वीकृति को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • प्रभावी शिकायत निवारण:
  1. जब भी किसी करदाता द्वारा शिकायत की जाए तो एक समर्पित शिकायत निवारण प्रकोष्ठ द्वारा तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
  2. यदि कोई अधिकारियों दोषी पाया जाता है, तो उसे करदाता से माफी मांगने और करदाता को एक सांकेतिक मुआवजे देने का प्रावधान किया जाना चाहिए, जैसा कि ऑस्ट्रेलिया में किया गया है।
  3. कर अधिकारियों के समग्र मूल्यांकन में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ के निष्कर्ष को भी शामिल करना चाहिए।
  • कानून के अनुसार ही कर संग्रह:
  • कानून द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक कर संग्रहण का प्रयास नहीं होना चाहिए। वर्तमान में, कर संग्रहण की उच्च मांग और उससे होने वाली मुकदमेबाजी से कर विभाग का निष्पादन प्रभावित होता है।
  • कर संग्रहण की भारी माँग, गैर-कानूनी आदेश जारी करना, बैंक खातों कुर्की करना आदि प्रथाओं को असाधारण स्थितियों में ही प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • निजता और गोपनीयता:
  1. कर निरीक्षण को नियंत्रित करने वाले नियमों विशेष रूप से सर्वेक्षण और तलाशी के कार्यों में नागरिकों की निजता के अधिकार की रक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए।
  2. गोपनीयता और निजता के उल्लंघन को अपराध बनाया जाना चाहिए और जांच अधिकारी की जवाबदेहिता तय की जानी चाहिए।
  3. किसी व्यक्ति, कंपनी आदि के गैरकानूनी व्यवहार को सार्वजनिक (Naming and shaming policy) करने के संबंध में न्यायिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
  • जवाबदेहिता: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए जिसमें राजस्व और चार्टर प्रकोष्ठों के प्रदर्शन और कार्यों के आकलन के साथ- साथ करदाताओं की प्रतिक्रिया को भी शामिल किया गया हो।

निष्कर्ष

  • करदाताओं के चार्टर में कर कानून को सफल बनाने और करदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की क्षमता है। यह कर भुगतान न करने वाले में भय उत्पन्न करने के साथ ईमानदार करदाताओं के बोझ को कम करने में सहायक साबित हो सकता है। यह तभी संभव है जब इसके कार्यान्वयन में न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की अवधारणा को लागू किया जाएगा।