क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर करारोपण - समसामयिकी लेख

प्रासंगिकता /पाठ्यक्रम से सम्बद्धता की वर्ड्स -: विकेंद्रीकृत, क्रिप्टोग्राफिक एन्क्रिप्शन, कर चोरी, बेनामी लेनदेन, आयकर अधिनियम, 1961, पूंजीगत लाभ कर, व्यापार कर

चर्चा में क्यों?

यद्यपि क्रिप्टो मुद्राएं किसी अन्य परिसंपत्ति वर्ग में सम्मिलित नहीं हैं परन्तु क्रिप्टो करेंसियो को संग्रहित किया जाता है तथा उनसे व्यापार (लेन -देन ) भी किया जाता है। क्रिप्टो करेंसी में हुए लेन -देन पर करारोपण की प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों को जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है।

क्रिप्टो करेंसी के बारे में :-

  • क्रिप्टो मुद्रा एक विशिष्ट प्रकार की आभासी मुद्रा है। यह मुद्रा क्रिप्टोग्राफ़िक एन्क्रिप्शन तकनीक द्वारा विकेन्द्रीकृत तथा संरक्षित की गई है। बिटकॉइन, एथेरियम, रिपल क्रिप्टो मुद्राओं के कुछ उल्लेखनीय उदाहरण हैं।
  • विकेन्द्रीकरण का अर्थ यह है कि क्रिप्टो मुद्राओं पर नियंत्रण तथा इसके लेनदेन के रिकॉर्ड रखने वाला कोई केंद्रीय प्राधिकरण नहीं है। यहाँ लेन -देन का डाटा विभिन्न स्वतंत्र कम्प्यूटरो के माध्यम से कई डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्को द्वारा रिकार्ड तथा शेयर किया जाता है।

सरकार क्रिप्टो मुद्रा लेनदेन पर कर लगाने की योजना क्यों बना रही है?

  • एक अनुमान के अनुसार 10 करोड़ से अधिक भारतीयों ने क्रिप्टो करेंसी में लगभग 10 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। यह न सिर्फ कर राजस्व बढ़ाने के लिए एक अवसर है बल्कि यह कर चोरी को भी नियंत्रित कर सकता है।
  • लेन-देन में पारदर्शिता: - विकेन्द्रीकृत होने के कारण इसका प्रयोग काले धन को जमा करने , आपराधिक गतिविधियों को बढ़ाने , आतंकवाद के वित्तीयन करने में होता है। करारोपण से लेन-देन में पारदर्शिता लाकर इन समस्याओं को कम किया जा सकेगा।

क्रिप्टो मुद्रा लेनदेन पर करारोपण

  • यद्यपि आयकर अधिनियम 1961 के प्रावधान प्रत्यक्ष रूप से क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को कर के दायरे में नहीं लाते हालाँकि इसके कई प्रावधान ऐसे हैं जिनकी व्याख्या करने पर क्रिप्टो करेंसी को कर के दायरे में लाया जा सकता है।
  • क्रिप्टो करेंसी में ट्रेडिंग को 'पूंजीगत संपत्ति' के हस्तांतरण के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, अतः यह 'पूंजीगत लाभ' के प्रावधानों के अंतर्गत कर योग्य है। हालांकि, अगर ऐसी क्रिप्टोकरेंसी को स्टॉक-इन ट्रेड के रूप में रखा गया है तथा व्यक्ति लगातार ट्रेडिंग कर रहा है तो इस स्थिति में व्यक्ति पर 'व्यापार आय' के कर प्रावधान लागू होंगे।
  • यहां तक कि यदि कोई यह तर्क देता है कि क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन उपरोक्त कर श्रेणियों में नहीं आते तो इस स्थिति आईटी अधिनियम की धारा 56 के प्रावधान लागू होंगे। अधिनियम की यह धारा सरकार को "आय के अन्य स्रोतो ' पर कर लगाने का अधिकार देती है।
  • हालाँकि ,क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक सरल परन्तु प्रभावी कराधान व्यवस्था स्थापित करने के लिए ये प्रावधान अपने आप में पर्याप्त नहीं है। चूंकि क्रिप्टो करेन्सियां किसी अन्य परिसंपत्ति वर्ग में सम्मिलित नहीं हैं परन्तु क्रिप्टो करेंसियो को संग्रहित किया जाता है तथा उनसे व्यापार (लेन -देन ) भी किया जाता है। क्रिप्टो करेंसी में हुए लेन -देन पर करारोपण की प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों को जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है।

क्रिप्टो मुद्राओं के लिए प्रभावी कराधान व्यवस्था के लिए चुनौतियां:-

क्रिप्टो लेनदेन पर करारोपण की प्रक्रिया में विभिन्न चुनौतियाँ हैं जिन्हे हल करने की आवश्यकता है। वे चुनौतियाँ निम्नवत हैं -

  • विविध व्याख्याएं: क्रिप्टो करेंसी के लिए स्पष्ट कर प्रावधानों की अनुपस्थिति के कारण गणना विधि , कर की दर, करो के आधार, हानि होने की अनिश्चितता इत्यादि के लिए भिन्न-भिन्न संस्थाओ द्वारा भिन्न -भिन्न व्याख्याएं की गई हैं। उदाहरणस्वरूप स्व-निर्मित क्रिप्टो मुद्रा (मुद्राएं जो खनन द्वारा बनाई गई हैं, एयर ड्रॉप द्वारा अधिग्रहित हैं, आदि) पर करारोपण आयकर के अंतर्गत लगाया जाए अथवा व्यापार कर के अंतर्गत यह स्पष्ट नहीं है। इसके साथ ही यदि क्रिप्टो करेंसी के लेन -देन पर पूंजीगत लाभ कर लगाया जाता है अधिग्रहण लागत के आधार के सम्बन्ध में भी अस्पष्टता है। पुनः यह समस्या भी है कि "अधिग्रहण लागत" (क्रिप्टो के बाजार मूल्य )की गणना निर्माण दिनांक पर मूल्य के आधार पर की जाए अथवा विक्रय दिनाक पर मूल्य के आधार पर ? क्योंकि क्रिप्टो-एक्सचेंजों द्वारा प्रदान की जाने वाली दरों में स्थिरता का आभाव होता है इसीलिए क्रिप्टो के बाजारी मूल्य की गणना एक कठिन कार्य है ।
  • इसके साथ ही विकेन्द्रीकृत होने के काऱण क्रिप्टो लेनदेन के लिए कर क्षेत्राधिकार का निर्धारण भी कठिन होता है। ऐसा भी संभव है कि करदाता क्रिप्टो का लेन देन किसी अन्य देश के नागरिक से कर रहे हों, इसके साथ यह भी संभव है कि क्रिप्टो मुद्राओं को भारत में प्रयोग न होने वाले ऑनलाइन वॉलेट में संग्रहीत किया जाए। क्रिप्टो करेंसी के सन्दर्भ में विभिन्न देशो में भिन्न- भिन्न नियम के कारण यह निर्धारित करना कठिन होगा कि करारोपण किस देश के क्षेत्राधिकार में लगना चाहिए।
  • क्रिप्टो मुद्राओं के साथ लेनदेन करने वाले करदाताओं की पहचान गुप्त रहती है। प्रत्येक क्रिप्टो पते में व्यक्ति की वास्तविक पहचान न होकर अल्फ़ान्यूमेरिक वर्णों की एक स्ट्रिंग होती है। इससे कर की चोरी करने में सरलता होती है । इसका लाभ उठाकर कर चोर अपने काले धन को विदेशों में जमा करने और आपराधिक गतिविधियों, आतंकवाद आदि को निधि देने के लिए क्रिप्टो लेनदेन का उपयोग कर रहे हैं।
  • क्रिप्टो लेनदेन पर तीसरे पक्ष की जानकारी की कमी से कर-चोरी के मामलों की जांच तथा उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। आयकर विभाग विभिन्न लेन-देन की पहचान के लिए अपने सबसे कुशल प्रवर्तन साधन CASS या (‘कंप्यूटर ऐडेड स्क्रूटनी सलेक्शन') का उपयोग करता है। इस पद्धति में करदाताओं के रिटर्न की राशि के साथ-साथ बैंक जैसे तीसरे पक्ष के मध्यस्थों से एकत्र की गई जानकारी के आधार पर आकड़ो का मूल्याङ्कन किया जाता है। हालांकि, क्रिप्टो-मार्केट में किसी मध्यस्थ यथा एक्सचेंज, वॉलेट प्रदाता, नेटवर्क ऑपरेटर,इत्यादि का आभाव है इसीलिए इसके लेन-देन की जानकारी एकत्र करना अत्यंत कठिन है।
  • क्रिप्टो के लेनदेन के संदर्भ में इस कमी का एक कारण यह भी है कि कर प्राधिकरण के पास क्रिप्टो लेनदेन सत्यापित करने का कोई यथेष्ट उपकरण नहीं है । अतः कर अधिकारियों को क्रिप्टो के आंकड़ों के लिए पूर्ण रूप से करदाताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • यद्यपि क्रिप्टो बाजार बिचौलियों द्वारा विनियमित होता है परंतु यह संभावना बनी रहती है कि क्रिप्टो मुद्राओं के बदले वास्तविक मुद्राओं अथवा अन्य सेवाओं अथवा वस्तुओं का लेनदेन किया जा सकता है। इस प्रकार के लेनदेन का पता लगाना अत्यंत ही मुश्किल होगा तथा यदि इसमें किसी भी प्रकार की कर चोरी हुई तो लेन-देन में शामिल पक्षों की सहायता के बिना कर अधिकारी इस कर चोरी का पता नहीं लगा पाएंगे।

क्रिप्टो करेंसी से लेनदेन पर मजबूत कर तंत्र स्थापित करने के लिए सरकार कौन से कदम उठा सकती है?

क्रिप्टो करेंसी से लेनदेन पर एक मजबूत कर तंत्र लगाने के लिए सरकार निम्नलिखित प्रयास कर सकती है

  • सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि सरकार आयकर कानूनों को क्रिप्टो लेनदेन के संबंध में विस्तृत करें । यह आवश्यक है कि सरकार क्रिप्टो परिसंपत्तियों की परिभाषा तथा क्रिप्टोकरंसी से लेनदेन से होने वाले आय के विभिन्न रूपों को परिभाषित करे । इसके साथ ही साथ करदाताओं के मध्य व्यापक जागरूकता स्थापित करने की आवश्यकता है।
  • करदाताओं के साथ साथ सम्मिलित मध्यस्थों पर भी टैक्स रिटर्न में अनिवार्य प्रकटीकरण का प्रावधान लागू होना चाहिए ( जैसा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में है)
  • इसके साथ साथ सूचना के संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानूनों को संशोधित कर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्थापित किया जाना चाहिए। जिससे क्रिप्टो लेनदेन पर जानकारी एकत्रित तथा शेयर की जा सके। इस कदम से क्रिप्टो करेंसी धारक के डिजिटल प्रोफाइल से उसकी वास्तविक पहचान का पता लगाया जा सकेगा।
  • इसके अतिरिक्त सरकार को अपने अधिकारियों को ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण देना चाहिए। ध्यातव्य हो कि ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के 'साइबर अपराध और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग' अनुभाग (यूएनओडीसी सीएमएलएस) ने एक अद्वितीय क्रिप्टोकरेंसी प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया है, जो कर अधिकारियों को अंतर्निहित प्रौद्योगिकियो की आवश्यक समझ विकसित करने सहायता कर सकता है।
  • कर अधिकारियों को खुद को नवीनतम फोरेंसिक सॉफ़्टवेयर से अपडेट करना चाहिए (जैसे कि एलिप्टिक फोरेंसिक सॉफ़्टवेयर का उपयोग, यूएसए आंतरिक राजस्व सेवा और यूरोपीय संघ में उपयोग किए जाने वाले ग्राफ़सेंस द्वारा किया जा रहा है) । यह सॉफ्टवेयर उच्च क्रिप्टो लेनदेन की पहचान कर सकता है।

आगे की राह :-

यह निश्चित है की क्रिप्टो करेंसी कुछ समय में लेन-देन का स्थाई अंग बन जाएगी। इस स्थिति में क्रिप्टो करेंसी के लिए स्पष्ट रचनात्मक तथा अनुकूल नियामक वातावरण हेतु एक सुव्यवस्थित कर व्यवस्था की आवश्यकता है।

स्रोत: The Hindu

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों से उत्पन्न मुद्दे और उनके डिजाइन और कार्यान्वयन

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  • क्रिप्टो करेंसी में बढ़ते लेन -देन के कारण इसपर करारोपण की भी मांग उठती है। इन लेनदेनों पर कर लगाने के लिए भारतीय कराधान प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों की चर्चा कीजिए। क्रिप्टो लेनदेन पर कर लगाने के लिए एक मजबूत तंत्र प्रदान करने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए? समालोचनात्मक परीक्षण करें।