स्टेट ऑफ़ यंग चाइल्ड रिपोर्ट - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

  • हाल ही में मोबाइल क्रेच एनजीओ द्वारा प्रकाशित की गई स्टेट ऑफ़ यंग चाइल्ड रिपोर्ट के अनुसार बाल कल्याण के दृष्टिकोण से केरल भारत का शीर्ष राज्य है

परिचय

  • स्टेट ऑफ़ यंग चाइल्ड रिपोर्ट ,मोबाइल क्रेच नामक एनजीओ द्वारा प्रकाशित की जाती है। यह एनजीओ बाल कल्याण के क्षेत्र में पिछले 50 वर्षो से कार्यरत है। इस रिपोर्ट में मुख्यतः दो सूचकांकों की चर्चा की गई है।
  1. यंग चाइल्ड आउटकम इंडेक्स
  2. यंग चाइल्ड एनवायरनमेंट इंडेक्स

यंग चाइल्ड आउटकम इंडेक्स :-

  • इस रिपोर्ट में बच्चो की स्वास्थ्य ,पोषण का मापन शिशु मृत्यु दर , स्टंटिंग , प्राथमिक शिक्षा हेतु उपस्थिति जैसे मनको को आधार माना गया है।
  • यह इंडेक्स 2005-06 से 2015-16 की समयावधि के मध्य तैयार किया गया है।
  • इसका मापन 0 से 1 अंक के मध्य होता है।
  • इसमें भारत का औसत स्कोर 0 .585 रहा है।
  • केरल 0.858 के स्कोर के साथ शीर्ष राज्य रहा है
  • केरल के अतिरिक्त अन्य शीर्ष राज्य गोवा ,त्रिपुरा ,तमिलनाडु तथा मिजोरम रहे हैं।
  • राष्ट्रीय औसत से ख़राब प्रदर्शन करने वाले 8 राज्य - असम , मेघालय , राजस्थान , छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश ,झारखण्ड ,उत्तरप्रदेश तथा बिहार रहे हैं।
  • बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।

यंग चाइल्ड एनवायरनमेंट इंडेक्स

  • यह इंडेक्स पर्यावरणीय उत्प्रेरकों को बाल कल्याण की दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करता है।
  • इस इंडेक्स का मापन गरीबी , स्वास्थ्य कवरेज , शिक्षा स्तर में सुधार ,जलापूर्ति जैसे मानको के आधार पर निर्मित है।
  • डाटा के आभाव में यह सूचकांक मात्र 2015-16 हेतु निर्मित किया गया है।
  • इस इंडेक्स में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 5 राज्य क्रमशः - केरल , गोवा ,सिक्किम ,पंजाब, तथा हिमांचल प्रदेश हैं।
  • इस इंडेक्स ख़राब प्रदर्शन करने वाले 8 राज्य - असम , मेघालय , राजस्थान , छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश ,झारखण्ड ,उत्तरप्रदेश तथा बिहार रहे हैं। इन राज्यों का प्रदर्शन यंग चाइल्ड आउटकम इंडेक्स में भी ख़राब था।
  • बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।

रिपोर्ट की अन्य तथ्य :-

  • बच्चो की स्थिति का विश्लेषण करते हुए रिपोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण अनुशंसाएं दी हैं।
  • रिपोर्ट ने बताया कि भारत में बच्चो की शिक्षा , पोषण ,स्वास्थ्य पर 2018 -19 में प्रति बच्चा 1723 रूपया खर्च किया जाता है परन्तु यह अपर्याप्त है।
  • बिगत कई वर्षो से निरंतर महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय का बजटीय आवंटन बढ़ा है परन्तु यह बजट आईसीडीएस में व्यय होता है।
  • भारत में 6 वर्ष से कम 158.8 मिलियन बच्चे हैं परन्तु आइसीडीएस मात्र 71.9 मिलियन बच्चो को कवर करता है।

एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस)

  • एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस) एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है और 1 975-76 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बच्चों के समग्र विकास और मां के सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की है।

उद्देश्य:

  • एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ 1975 में शुरू की गई थी:
  • 0-6 साल के आयु वर्ग के बच्चों की पोषण और स्वास्थ्य स्थिति में सुधार;
  • बच्चे के उचित मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए नींव रखना;
  • मृत्यु दर, रोग, कुपोषण और स्कूल छोड़ने वालों की घटनाओं को कम करने के लिए
  • बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों के बीच नीति और कार्यान्वयन के प्रभावी समन्वय प्राप्त करना
  • माता को उचित पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं की देखभाल करने की क्षमता बढ़ाने के लिए

सेवाएं:

  • उपरोक्त उद्देश्यों से युक्त सेवाएं:
  • पूरक पोषण
  • प्रतिरक्षा
  • स्वास्थ्य जांच
  • रेफ़रल सेवाएं
  • पूर्व-स्कूल गैर-औपचारिक शिक्षा
  • पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से छः सेवाओं में से तीन, अर्थात् टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएं मुहैया कराई गई हैं।

निष्कर्ष :-

  • भारत में बाल कल्याण हेतु निरंतर प्रयास किये गए हैं। परन्तु क्षेत्रीय बाधाएं , इन्क्लूसिव एरर जैसी समस्यों ने बाल कल्याण को तृणमूल स्तर तक नहीं पहुंचने दिया है। बच्चे राष्ट्र केर भविष्य की महत्वपूर्ण कड़ी हैं अतः ऐसे में सरकार तथा नागरिक समाज को बाल कल्याण की दिशा में बेहतर तथा एफ्फिसिएंट कार्य करने की आवश्यकता है।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • सामाजिक न्याय

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत में बच्चो की स्थिति पर चर्चा करें ? सरकार द्वारा बाल कल्याण हेतु कौन से कदम उठाये गए हैं।