कोविड-19 के कारण सेक्स वर्करों की आजीविका पर संकट - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


कोविड-19 के कारण सेक्स वर्करों की आजीविका पर संकट - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


चर्चा का कारण

  • कोरोना संक्रमण के मद्देनजर हुए लॉकडाउन एवं संक्रमण के बढ़ते खतरे ने हजारों कामगारों पर आजीविका का संकट ला दिया है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी चलनी मुश्किल हो गई है। इन कामगारों में सेक्स वर्कर्स (Sex Workers) भी शामिल हैं।

परिचय

  • अंतर्राष्ट्रीय वेश्यावृत्ति अधिकार दिवस या इंटरनेशनल सेक्स वर्कर्स डे (International Sex Workers' Day) हर साल 2 जून को मनाया जाता है। वैसे तो इस दिन को इस उद्देश्य से मनाया जाता है ताकि यौनकर्मियों के अधिकारों के बारे में जागरुकता फैलाई जा सके जिससे कि वे भी 'सम्मान' की जिंदगी बसर कर सकें, लेकिन ऐसा असल में होता बहुत कम है।
  • कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देशभर में लगे लॉकडाउन (अब अनलॉक किया जा रहा है) का समाज के लगभग हर तबके पर असर पड़ा है। मजदूरों, किसानों सहित छोटे कारोबारी आजीविका के संकट से जूझ रहे हैं लेकिन समाज का एक ऐसा तबका भी है, जिसकी समस्याओं पर सरकार और समाज दोनों की ही नजर नहीं है। ये हैं देश के सेक्स वर्कर्स, जिनमें महिलाओं, पुरुषों से लेकर ट्रांसजेंडर तक शामिल हैं।
  • अजमेरी गेट से लाहौरी गेट तक एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक फैले गार्स्टिन बैस्टियन (जीबी) रोड की गिनती भारत के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया में होती है। यहाँ आए दिन कई गैर-लाभकारी संगठनों के माध्यम से पता चलता है कि लड़कियों को देश के अलग-अलग कोनों से लेकर लाया जाता है। मौजूदा समय में पूरी दुनिया में फैली करोना महामारी ने इनका जीवन दूभर कर दिया है।

भारत के सेक्स वर्करों का भविष्य अनिश्चित

  • राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के अनुसार, भारत में लगभग 6,37,500 यौनकर्मी हैं और पांच लाख से अधिक ग्राहक दैनिक आधार पर रेड-लाइट क्षेत्रें का दौरा करते हैं। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते इनका भविष्य अंधकार में है। इस मामले में संक्रमण फैलने की दर अधिक हो सकती है, क्योंकि यौन क्रिया या संभोग के दौरान सामाजिक दूरी संभव नहीं है।
  • संक्रमित ग्राहक लाखों अन्य नागरिकों को यह बीमारी फैला सकते हैं। येल स्कूल ऑफ मेडिसिन और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया कि भारत में अगर राष्ट्रव्यापी बंद खत्म भी हो जाता है तो यहां रेड-लाइट एरिया (ऐसे स्थान जहां वेश्यावृत्ति होती है) को बंद ही रखा जाना चाहिए। वैज्ञानिको का कहना है कि अगर ऐसा किया गया तो भारत में कोरोना वायरस के मामलों के उच्च स्तर पर पहुंचने में 17 दिनों की देरी लाई जा सकती है।
  • इसके अलावा इससे कोविड-19 के अनुमानित नए मामलों में 72 फीसदी की कमी लाई जा सकती है। 'मॉडलिंग द इफैक्ट ऑफ कॉन्टिन्यूड क्लोजर ऑफ रेड-लाइट एरियाज ऑन कोविड-19 ट्रांसमिशन इन इंडिया' नाम के अध्ययन में पाया गया है कि अगर राष्ट्रव्यापी बंद के बाद तक रेड लाइट एरिया को बंद रखा जाता है तो भारतीयों को कोरोना वायरस होने का बहुत कम जोिखम है।

सेक्स वर्करों के समक्ष चुनौतियाँ

  • लोगों में कोरोना का डर बना हुआ है, जो सेक्स वर्कर के काम को प्रभावित कर रहा है। इन सेक्स वर्कर के पास आने में लोग हिचक रहे हैं, तो कुछ हिचकिचाहट इनके मन में भी होगी कि कहीं ग्राहक के रूप में इनके पास आ रहा शख्स बीमारी लेकर तो नहीं आ रहा है।
  • चिंता उन महिलाओं की अधिक है जो किराए के मकानों में रहती हैं, जिन पर घर-परिवार की जिम्मेदारी है, जिनके बच्चे पढ़ रहे हैं। वे कहां से किराया देंगी? कैसे बच्चों का लालन-पालन करेंगी? कई सेक्स वर्कर्स कर्ज के पैसों से काम चला रही हैं, जो उन्होंने ब्याज पर लिए हैं।
  • हमारे देश में एक निश्चित दायरे में ही सेक्स वर्क्स को मान्यता प्राप्त है लेकिन इसे अभी तक रोजगार का दर्जा नहीं दिया गया है। यही वजह है कि सेक्स वर्कर्स की आर्थिक हालत बहुत दयनीय है। साथ ही देखा जाये तो भारत के वेश्यालय अपनी अमानवीय परिस्थितियों के लिए भी बदनाम हैं। कोरोना से लड़ने के लिए साफ-सुथरे इलाके में रहना और सोशल डिस्टेंसिंग को कोरोनो वायरस से लड़ने की कुंजी कहा जा रहा है, लेकिन इन सेक्स वर्कर्स के हालात बिल्कुल इसके विपरीत हैं।
  • अगर सरकार के 20 लाख करोड़ की राहत पैकेज का फायदा यौनकर्मियों तक नहीं पहुंच पाता तो ये सरकार की बहुत बड़ी चूक और भेदभावपूर्ण रवैया होगा। आज इस उद्योग में काम करने वाली महिलाएं अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए दान पर निर्भर हैं, जिसमें लॉकडाउन के दौरान भोजन और दवा शामिल है। विशेष रूप से एचआईवी/एड्स के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी दवाएं।
  • रेड-लाइट एरिया में कई एचआईवी पॉजिटिव और टीबी मरीज हैं। ऐसे लोगों के लिए क्लीनिक जाना मुश्किल हो गया है। कई यौनकर्मियों के स्वास्थ्य से जुड़े अन्य मुद्दे भी हैं, जिनमें शराब और तंबाकू की लत शामिल है।
  • लॉकडाउन के पूर्णतया समाप्त होने के बाद भी, यौनकर्मियों को COVID-19 के प्रभाव से बचने के लिए अपने ग्राहकों के बारे में बहुत सावधान रहना होगा।

सरकारी प्रयास

  • सन 1950 में भारत ने मानव दुर्व्यापार एवं वेश्यावृत्ति को रोकने हेतु अंतर्राष्ट्रीय संधिपत्र की अभिपुष्टि की थी। इस अंतर्राष्ट्रीय वचनबद्धता को पूरा करने के लिए भारत ने 1956 में मानव दुर्व्यापार दमन अधिनियम पारित किया। यह मई 1957 से सम्पूर्ण देश में लागू हुआ। इसकी विसंगतियों को दूर करने एवं नई चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्य से 1986 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया और यह अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम कहलाया। इस अधिनियम में यौनकर्मियों के अधिकारों को न केवल संरक्षित करने बल्कि उनके पुनर्वास का भी प्रावधान किया गया। इसके अलावा 1993 में उच्चतम न्यायालय के एक दूरगामी महत्व के फैसले में यौनकर्मियों के बच्चों को स्कूलों में प्रवेश देने का आदेश दिया तथा साथ ही यह निर्देश दिया गया कि ऐसे बच्चों को पिता का नाम देना बाध्यकारी नहीं होगा। दिसम्बर, 2007 में महिला एवं बाल विकास मंत्रलय द्वारा यौन कर्मियों के हित संरक्षण, महिलाओं एवं बच्चों के अवैध व्यापार रोकने एवं वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाओं के पुनर्वास के लिए 'उज्जवला' नामक योजना लागू की गई है।

आगे की राह

  • सरकार को हर प्रकार की पेंशन की राशि में कम से कम 50 फीसदी की बढ़ोतरी करनी चाहिए और एक आपातकालीन पेंशन फंड की व्यवस्था करनी चाहिए, जिसका फायदा एकल महिला, प्रवासी मजदूर, यौनकर्मी, ट्रांसजेंडर, एचआईवी और गंभीर बीमारी से संक्रमित लोगों, बुजुर्गों, विकलांगों,बेघरों इत्यादि को मिल पाए।
  • दलहन खाद्य सुरक्षा, पोषण और पारिस्थितिक संतुलन प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने की जरूरत है। यह 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों (लक्ष्य 2-कोई भूख न रहे_ लक्ष्य 12-जिम्मेदार खपत) को प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।
  • पिछले ढाई दशकों से भी ज्यादा समय से देश में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम भारत सरकार चला रही है। सरकार उस कार्यक्रम के माध्यम से यौनकर्मियों तक पहुंचे। साथ ही सरकार को चाहिए कि यौनकर्मियों के साथ बैठकर समावेशी योजना बनाए जिससे लाखों यौनकर्मियों तक सामाजिक सुविधा, आर्थिक मदद पहुंच सके। अगर कोई भी यौनकर्मी हिंसा या तनाव से ग्रसित है तो सरकार एवं सामाजिक संस्थाओं का दायित्व है कि उन विषयों पर काम करें। यौन कर्मियों के संदर्भ में पुलिस को संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
  • यौन कर्मियों के प्रति समाज का नजरिया भी बदलना चाहिए ताकि इन्हें रोजगार के अन्य अवसर भी उपलब्ध हो सकें

सामान्य अध्ययन पेपर-2

    केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन, इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कोरोना संक्रमण के मद्देनजर हुए लॉकडाउन एवं संक्रमण के बढ़ते खतरे ने हजारों सेक्स वर्करों पर आजीविका का संकट ला दिया है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी चलनी मुश्किल हो गई है। चर्चा कीजिये