भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से सुदृढ़ करना - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • कोविड-19 महामारी ने भारत सहित पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप क्षति पहुँचायी है।
  • हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office-NSO) ने चालू वित्त वर्ष (2020-21) की प्रथम तिमाही के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के आँकड़े जारी किये हैं।
  • एनएसओ के आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर ऋणात्मक 23-39% हो गयी है। यह अपने आप में भारतीय जीडीपी की वृद्धि दर में बहुत बड़ी गिरावट है।

पृष्ठभूमि

  • जीडीपी की वृद्धि दर में यह महान गिरावट देश में विभिन्न चरणों में लगाये गये राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के परिणामस्वरूप देखने को मिली है।
  • कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने हेतु सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन लगाया था जो अभी भी देश के विभिन्न क्षेत्रें में भिन्न-भिन्न तरीके से जारी है।
  • लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियाँ लगभग ठप सी रही हैं और भारी संख्या में लोगों के रोजगार छिने हैं। इन सब परिस्थितियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को संकुचन की ओर ढकेल दिया है।

सरकार द्वारा उठाये गए कदम

  • हालाँकि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने हेतु भारत सरकार ने आर्थिक एवं स्वास्थ्य दोनों ही क्षेत्रें में कई निर्णायक एवं सराहनीय कदम उठाये हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण कदम 20 लाख करोड रुपयें का प्रोत्साहन पैकेज को उपलब्ध कराना है।
  • गौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री ने 20 मई, 2020 को 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज (Stimulus Package) का अनावरण किया था। यह प्रोत्साहन पैकेज भारत की जीडीपी का लगभ 10% है तथा कोविड-19 महामारी में दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी राहत योजनाओं में से एक है। इस राहत योजना के तहत 5 चरण द्वारा अर्थव्यवस्था को राहत पैकेज प्रदान किया गया-
  1. पहला चरण: MSME 3 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी और इसकी परिभाषा बदलना; गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) और सूक्ष्म राशि के ऋण देने वाले संस्थानों (एमएफआई) के लिये 30,000 करोड़ रुपये के विशेष नकदी योजना की घोषणा, टीडीएस और टीसीएस की दर में 31 मार्च 2021 तक के लिये 25 फीसदी की कटौती, सभी कंपनियों के लिए ईपीएफ में कर्मचारियों के मूल वेतन के 12 फीसदी के बराबर सांविधिक योगदान की जगह 10 फीसदी करने की छूट समेत कई उपाय घोषित किए गए।
  2. दूसरा चरण: इसके तहत प्रवासी मजदूरों, छोटे किसानों, स्ट्रीट वेंडर्स, आदिवासियों, मध्य वर्गीय परिवारों के लिए राहत कदमों का एलान किया गया। इसमें तकरीबन 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को अगले दो महीने मुफ्त अनाज, मुद्रा शिशु लोन लेने वालों को ब्याज पर 12 माह के लिए 2 फीसदी की राहत, पीएम आवास योजना के ​तहत 6-18 लाख तक की आय वालों के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम को 31 मार्च 2021 तक बढ़ाया जाना इत्यादि।
  3. तीसरा चरण: इसके तहत कृषि और उससे जुड़े सेक्टर के लिए 11 अहम सुधार किये गए इसमें 8 घोषणा कृषि के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक के निर्माण से संबंधित थे, जबकि 3 घोषणा प्रशासनिक सुधारों से जुड़े रहे। इसके साथ ही कृषि इंफ्रा के क्षेत्र में 1 लाख करोड़ रुपये के कोष के अलावा पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, हर्बल खेती के लिए अलग- अलग फंड बनाने के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किया गया।
  4. चौथा चरण: कोल, डिफेंस, मिनरल, सिविल एविएशन, स्पेस, पावर सेक्टर के वितिय्या और लिए बड़े वित्तीय और प्रशासनिक सुधार किया गया इसके साथ ही सोशल इंफ्रा सेक्टर के लिए 8100 करोड़ रुपये के पैकेज का एलान किए गए।
  5. पांचवां चरण: मनरेगा के तहत 40000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन, हेल्थ इंफ्रा पर खर्च बढ़ाने, टेक्नोलॉजी एजुकेशन के लिए नयी योजनाओं के साथ पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के लिए नई पॉलिसी लाने, कारोबारी सुगमता और राज्यों को सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी राहत उपायों की घोषणा की गई ।
  • यह पैकेज उन व्यवसायों एवं स्टार्टअप्स को बड़ी राहत प्रदान करेगा, जो वर्तमान में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इसके अतिरिक्त, यह बाजार में तरलता और माँग को बढ़ाने में मदद करेगा।
  • यह पैकेज विशेष रूप से भारत के लगभग 60,000 उन स्टार्टअप्स को मदद करेगा जो इस समय गंभीर तरलता के संकट से जूझ रहे हैं। इससे भारत में लोगों को रोजगार मिलेगा और उनकी आजीविका सुनिश्चित होगी।
  • हालाँकि सरकार के द्वारा कोविड-19 के दौरान उठाये गये कदम काफी साहसिक हैं, लेकिन फिर भी देश के विकास इंजन को पुनर्जीवित करने के लिए और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।

दोतरफा रणनीति (Two - pronged Strategy)

  • भारत को कोविड-19 महामारी के वर्तमान संकट को सफलतापूर्वक नेविगेट (Navigate) करने और उसके बाद दृढ़ता से उबरने हेतु दोतरफा रणनीति (Two- pronged Strategy) की आवश्यकता है।
  • प्रथम, कोविड-19 महामारी के कारण होने वाले नुकसान को कम करना और रिकवरी (Recovery) हेतु रास्ता तैयार करना।
  • दूसरा, भारत सरकार को वैश्विक व्यापार में उभरे नये अवसरों का फायदा उठाकर, देश में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाना चाहिए। गौरतलब है कि जापान ने हाल ही में घोषणा की है कि जो भी जापानी कम्पनी चीन से भारत की ओर रूख करेगी, उसे जापान सरकार प्रोत्साहन (Incentive) देगी। इसके अतिरिक्त, क्वाड ग्रुप (भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान) हिन्द प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय वैकल्पिक आपूर्ति शृंखला के निर्माण पर बल दे रहा है।
  • भारत सरकार को उपर्युक्त दोतरफा रणनीति के क्रियान्वयन में व्यापकता, दृढ़ता और तीव्र निष्पादन पर ध्यान देना चाहिए।

चार प्रमुख स्तंभ

भारत सरकार को महामारी से उबरने हेतु इन चार रणनीतिक स्तम्भों या पिलर पर कार्य करने की आवश्यकता है-

  1. बिग बिजनेस हाउस (Big Business Houses): देश की जीडीपी को दिशा देने और भारी मात्र में रोजगार सृजन में सहायक हैं।
  2. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) एमएसएमई, भारत में मध्यम वर्ग के लिए महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि ये भारत में रोजगार सृजन की रीढ़ हैं।
  3. स्टार्टअपः यह देश की अर्थव्यवस्था में नवीनता और परिवर्तन लाते हैं।
  4. भारतीय डायस्पोराः विदेश में रहने वाले प्रवासी भारतीय, भारत में न सिर्फ रेमिटेंस भेजते हैं बल्कि वे यहाँ निवेश भी ला सकते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण सुझाव

  • बड़ी व्यापारिक इकाईयों और एमएसएमई को सरकार द्वारा कर प्रोत्साहन, प्रौद्योगिकी सहायता, कच्चे माल एवं सेवाओं की उपलब्धता आदि सुविधाओं को उपलब्ध कराकर, उन्हें फिर से पूर्ण क्षमता के साथ परिचालन की अनुमति देनी चाहिए। हालाँकि यहाँ भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों पर ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि कोरोना संक्रमण से बचते हुए उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
  • सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को मिलकर कार्य करना चाहिए ताकि तरलता प्रवाह को बढ़ाया जा सके। आरबीआई को बिजनेस ऋण के पुनर्गठन (Restructuring) हेतु सिंगल वन टाइम विंडो (Single One time window) पर विचार करना चाहिए।
  • भारत सरकार को उन कम्पनियों के लिए एक पंचवर्षीय योजना बनाना चाहिए जो चीन से स्थानांतरित होकर किसी अन्य देश में अपनी विनिर्माण इकाईयाँ खोलना चाहती हैं।
  • भारत को एक वैश्विक व्यापारिक केन्द्र के रूप में स्थापित करने हेतु बल प्रदान किया जाना चाहिए। इसके लिए भारत से वैश्विक व्यापार संचालन करने वाली कम्पनियों के लिए प्रोत्साहन नीति बनानी चाहिए।
  • सरकार को देश के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना चाहिए। इसके कई फायदे हो सकते हैं, यथा-
  1. लॉजिस्टिक कीमत कम होगी।
  2. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आयेगा।
  3. भारत का निर्यात सस्ता होगा।
  4. बुनियादी ढाँचे पर खर्च करने से लोगों की आय बढ़ेगी जिससे माँग बढ़ेगी।

निष्कर्ष

  • कोविड-19 महामारी के पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट के लक्षण देखे जा रहे थे और कोविड-19 महामारी ने इसे और तीव्र बना दिया। सरकार को उद्योग जगत वाणिज्य, उद्योग और कृषि क्षेत्र के वृद्धि को मंद करने वाले कारको को पहचानते हुए सभी हितधारको के साथ मिलजुल कर काम करना होगा जिससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। हालांकि सरकार के समय दोहरी चुनौती है एक जहां उसे राजकोषीय नीति को भी ध्यान देना है तो वहीं बिगड़े हुए अर्थव्यवस्था के लिए राहत पैकेज भी। ऐसी परिस्थिति सरकार को भविष्य में प्रोत्साहन पैकेज देने के लिए संसाधनों को बचाने की रणनीति से हटते हुए मितव्ययिता एवं कुशलता से तात्कालिक खर्च को बढ़ाना होगा जिससे अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाया जा सके।

निष्कर्ष :-

  • आज हम देख रहे की पर्यावरण की समस्या वैश्विक हो चुकी है। निजी हितो के कारण लोग पर्यावरणीय हितो की बलि दे रहे यथा अमेरिका का पेरिस संधि से हटना। ऐसी स्थिति में पर्यावरणीय नैतिकता महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कोविड-19 महामारी ने न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से क्षति पहुँचायी है। भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है? अपने मौलिक विचार प्रस्तुत करें।