जैविक उत्पाद (Organic Products) - समसामयिकी लेख

की वर्ड्स- जैविक उत्पाद, प्रमाणन, यूरोपियन यूनियन (ईयू ), यूएसडीए एआईपीडीए , कीटनाशक , एजेंसी।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में यूरोपीय संघ द्वारा पांच भारतीय जैविक प्रमाणीकरण एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट करने तथा प्रमाणीकरण के प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह उठाया गया है । इस परिस्थिति में कई विशेषज्ञों का यह कहना हैं कि यदि भारत के केंद्र सरकार द्वारा गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के संदर्भ में कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया तो भारत का जैविक निर्यात अगले 5 वर्षों में 10 गुना वृद्धि नहीं कर पायेगा।

क्या हैं जैविक उत्पाद ?

  • जैविक उत्पादों का उत्पादन रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग के बिना किया जाता है। यह कृषि प्रणाली पर्यावरण के दृष्टिकोण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत से प्रेरित है।
  • कृषि की यह प्रणाली मृदा की उर्वरता तथा पुनरोत्पादन क्षमता के संरक्षण, पौधों के बेहतर पोषण तथा उत्तम मृदा प्रबंधन के लिए ग्रास रूट लेवल (जमीनी स्तर) पर कार्य करती है । यह उच्च पोषकता युक्त खाद्य पदार्थो का उत्पादन करती है, जो विभिन्न बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक तंत्र विकसित करने में सहायक होते हैं।
  • विविध कृषि जलवायु परिस्थितियों के कारण भारत में सभी जैविक उत्पादों के उत्पादन की भारी सम्भावना है।
  • देश के विभिन्न भागो में पारम्परिक रूप से जैविक कृषि की जाती है। यह तेजी से बढ़ रहे जैविक उत्पादों की मांग की आपूर्ति करने में सहायक होगा। जैविक कृषको को घरेलू मांग तथा निर्यात बढ़ने से आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा।
  • 2020 के आंकड़ों के अनुसार सम्पूर्ण विश्व की जैविक कृषि भूमि के मामले में भारत का 8वां तथा उत्पादकों की कुल संख्या के मामले में पहला स्थान है।

भारत में जैविक उत्पाद का प्रमाणन:

  • "इंडिया ऑर्गेनिक" भारत में निर्मित जैविक कृषि वाले खाद्य उत्पादों के लिए एक प्रमाणन चिह्न है। यह राष्ट्रीय जैविक खाद्य उत्पाद 2000 के मानकों के आधार पर जैविक उत्पादों को प्रमाणित करता है।
  • ये मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद या उत्पाद में प्रयुक्त बीज जैविक हैं तथा तथा इनके उत्पादन में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया गया है।
  • जैविक उत्पादों का प्रमाणन भारत सरकार के "जैविक उत्पादन के राष्ट्रीय कार्यक्रम" के अंतर्गत एपीडा द्वारा मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों द्वारा किया जाता है।
  • "जैविक उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीओपी)" का कार्यान्वयन एपीडा, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के द्वारा किया जाता है
  • "जैविक उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीओपी)" प्रमाणन निकायों की मान्यता, जैविक उत्पादन के मानक, जैविक कृषि तथा विपणन इत्यादि को सम्मिलित करता है।
  • एनपीओपी के उत्पादन तथा प्रत्यायन (प्रोडक्शन एंड एक्रीडेशन ) मानकों को यूरोपीय आयोग और स्विटजरलैंड द्वारा मान्यता दी गई है।
  • जैविक उत्पादों का आयत करने वाले देश इसकी मान्यता के साथ - साथ भारत के मान्यता प्राप्त अन्य प्रमाणन निकायों द्वारा प्रमाणित भारतीय जैविक उत्पादों को स्वीकार करते हैं । वर्तमान में एपीडा दक्षिण कोरिया, ताइवान, कनाडा, जापान आदि देशो के साथ बातचीत जैविक उत्पादों के निर्यात के सन्दर्भ में बात चीत कर रहा है।

भारत के जैविक उत्पादो के निर्यात में वृद्धि:

  • 2020-21 के वित्तीय वर्ष के दौरान भारत से जैविक उत्पादों का निर्यात पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 51 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.04 बिलियन डॉलर हो गया है । ध्यातव्य हो कि 2018-19 में जैविक उत्पादों का निर्यात 614 मिलियन डॉलर था जो 2019-20 में 9 % घटकर 599 मिलियन डॉलर तक आ गया था।
  • अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जैविक उत्पाद बाजार ( खाद्य तथा पेय पदार्थ, स्वास्थ्य- कल्याण, सौंदर्य तथा पर्सनल केयर व वस्त्र) वर्तमान के 1.04 बिलियन डालर से बढ़कर 2026 तक 10.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

भारत के जैविक उत्पाद के निर्यात की चुनौतियाँ:

  • जैविक उत्पादों के विपणन में सबसे बड़ी चुनौती जैविक उत्पाद की सत्यापन को सुनिश्चित करना है अर्थात कई बार जैविक तथा अजैविक उत्पादों में अंतर करना संभव नहीं हो पाता है। इस स्थिति में ब्लॉक चैन तकनीकी तथा ट्रेसेबिलिटी के अभाव में ग्राहकों को जैविक पदार्थ की विश्वसनीयता के बारे में आश्वस्त करना कठिन हो जाता है।
  • भारत की जैविक नियंत्रण प्रणाली से संबंधित चुनौतियां और धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं ने भारत के जैविक क्षेत्र की विश्वसनीयता को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
  • लोभी तत्वों (बेईमान लोगों ) द्वारा जैविक प्रमाणीकरण नियमो की कमियों का लाभ उठाया जाता है।
  • जैविक सिद्धांतों के संतुलन के साथ उसके वाणिज्यिक महत्व को वैश्विक अर्थव्यवस्था के योग्य बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। उदाहरण: एपीडा ने पिछले साल अक्टूबर में अदिति ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की मान्यता को एक साल के लिए निलंबित कर चार अन्य सर्टिफिकेशन एजेंसियों पर प्रतिबंध लगाकर पांच फर्मों की मान्यता रद्द कर दी थी।
  • विश्वस्तरीय मानकों तथा प्रमाणन का अनुसरण करने में भी चुनौतियाँ आती हैं ।
  • जैविक उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन और प्रमाणन आदि के दिशा-निर्देश साधारण भारतीय किसान की समझ से परे होते हैं।
  • कीटनाशक मुद्दे पर भारत द्वारा भेजे गए शिपमेंट एथिलीन ऑक्साइड (ईटीओ) उपस्थिति के मानदंडों को पूरा करने में विफल रहने पर यूरोपीय संघ द्वारा पांच भारतीय जैविक प्रमाणीकरण एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट करने तथा प्रमाणीकरण के प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की है ।
  • जैविक उत्पादों की उत्पादन बाधाओं को दूर करने के लिए स्थानीय कृषि समाधान के रूप में खरपतवार, पशु स्वास्थ्य और मिट्टी की उर्वरता के प्रयोग से ।

आगे का रास्ता:

  • दीर्घ अवधि में नेचुरल एंड ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर प्रमोशन बोर्ड को जैविक कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करना चाहिए।
  • प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में ट्रेसेबिलिटी तथा ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का प्रयोग उपभोक्ताओं के विश्वास में वृद्धि करेगा। इसके लिए सभी प्रयोगशालाओं तथा प्रमाणीकरण कंपनियों को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाना चाहिए।
  • विश्व के प्रमाणित जैविक किसानों में से कम से कम 44 प्रतिशत (या 2.32 मिलियन) भारत से हैं। तथा भारत का कुल प्रमाणित जैविक क्षेत्र लगभग 2.3 मिलियन हेक्टेयर है, (जबकि पूरे विश्व का कुल क्षेत्रफल 72.3 मिलियन हेक्टेयर है)
  • विदेशो में भारत के जैविक उत्पाद के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए भारत को एक प्रभावी नीतिगत एक्शन प्लान की आवश्यकता है।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • भारत में कृषि, संरक्षण, खाद्य प्रसंस्करण और संबंधित उद्योग - कार्यक्षेत्र और महत्व।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • हाल ही में, यूरोपीय संघ ने पांच भारतीय जैविक प्रमाणन एजेंसियों को ब्लैकलिस्टेड कर देश के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पर चिंता जाहिर की है । इस संदर्भ में यूरोपीय संघ द्वारा उठाए गए मुद्दों पर संक्षेप में चर्चा करें? भारत के जैविक उत्पादों के निर्यात में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है? चर्चा करें?