नीति आयोग द्वारा गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का सुझाव - समसामयिकी लेख

   

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चर्चा में क्यों?

नीति आयोग ने 'इंडियाज बूमिंग गिग एंड प्लेटफॉर्म इकोनॉमी' शीर्षक से एक रिपोर्ट लॉन्च की I जिसमें अन्य बातों के साथ ही गिग वर्कर्स और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों का विस्तार करने की सिफारिश की गयी, जिसमें बीमा और पेंशन जैसी योजनाएं शामिल हैं।

गिग इकोनॉमी क्या है?

  • विश्व आर्थिक मंच के अनुसार , गिग इकॉनमी को "गिग्स", एकल परियोजनाओं या कार्यों के माध्यम से कार्यबल की भागीदारी और आय सृजन पर ध्यान केंद्रित करने के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसके लिए एक कार्यकर्ता को काम पर रखा जाता है।
  • गिग इकॉनमी एक सामान्य कार्यबल वातावरण को संदर्भित करता है जिसमें अल्पकालिक जुड़ाव, अस्थायी अनुबंध और स्वतंत्र अनुबंध आम है । इसे "फ्रीलांसर अर्थव्यवस्था”, "साझा अर्थव्यवस्था," या "स्वतंत्र कार्यबल" के रूप में भी जाना जाता है।
  • गिग वर्कर्स, जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी व्यवस्था के बाहर आजीविका में लगे हुए हैं, और जिन्हें मोटे तौर पर प्लेटफॉर्म और गैर-प्लेटफॉर्म-आधारित श्रमिकों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है ।
  • प्लेटफ़ॉर्म वर्कर वे हैं जिनका काम ऑनलाइन सॉफ़्टवेयर ऐप या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जैसे फ़ूड एग्रीगेटर प्लेटफ़ॉर्म ज़ुमेटो, स्विग्गी,ओला, और अन्य ऐप पर आधारित है।
  • गैर-प्लेटफ़ॉर्म गिग कार्यकर्ता आम तौर पर पारंपरिक क्षेत्रों में आकस्मिक वेतन और स्वयं के खाते के कर्मचारी होते हैं, जो अंशकालिक या पूर्णकालिक होते हैं ।

अंशकालिक श्रमिकों और गिग श्रमिकों के बीच अंतर

  • गिग श्रमिकों को पहले से मौजूद अंशकालिक अर्थव्यवस्था के उन्नयन के रूप में ब्रांडेड किया जा सकता है। पार्ट-टाइम वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के बीच मुख्य अंतर यह होगा कि पार्ट-टाइम वर्कर्स औपचारिक रूप से संगठनों से बंधे होते हैं और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के विपरीत, पेरोल का एक अभिन्न हिस्सा बनते हैं।
  • स्व-नियोजित पेशेवरों की प्राथमिक आय होती है जो स्वतंत्र, ग्राहक आधारित कार्य से आती है।
  • गिग इकॉनमी के सदस्य पारंपरिक पूर्णकालिक नौकरी को बनाए रखने के अलावा साइड गिग्स जैसे राइडशेयर ड्राइविंग या फ्रीलांस राइटिंग का काम करते हैं।

भारत में गिग अर्थव्यवस्था:

  • एक अनुमान के मुताबिक़ 2020-21 में, 77 लाख (7.7 मिलियन) कर्मचारी गिग इकॉनमी में लगे हुए थे, जो भारत में कुल कार्यबल का 1.5% है ।
  • गिग कार्यबल के 2029-30 तक 2 .35 करोड़ (23.5 मिलियन) श्रमिकों तक विस्तारित होने की उम्मीद है , जो भारत में कुल आजीविका का 4.1% होगा।
  • वर्तमान में लगभग 47% गिग कार्य मध्यम कुशल नौकरियों में, लगभग 22% उच्च कुशल और लगभग 31% निम्न कुशल वाली नौकरियां हैं।
  • प्रवृत्ति से पता चलता है कि मध्यम कौशल में श्रमिकों की एकाग्रता धीरे-धीरे कम हो रही है और कम कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ रही है । यह उम्मीद की जा सकती है कि जहां मध्यम कौशल का वर्चस्व 2030 तक जारी रहेगा, वहीं अन्य कौशल के साथ गिग वर्क सामने आएगा।

गिग अर्थव्यवस्था के लाभ:

कार्यकर्ता के लिए:

  • काम की अधिक लचीली प्रकृति:
  • श्रमिकों के पास समय और आय को समन्वय करने के लिए अधिक विकल्प हैं।
  • वे चलते-फिरते कार्यों को भी पूरा कर सकते हैं और परिवार के साथ काम को बेहतर ढंग से संतुलित कर सकते हैं यानी बेहतर कार्य-जीवन संतुलनI
  • काम के चयन की स्वंत्रता :
  • श्रमिक उस परियोजना को चुन सकते हैं जिस पर वे काम करना चाहें।
  • इसके अलावा, परियोजना विकल्प अधिक विविध हैं क्योंकि वे दुनिया भर की कंपनियों से आते हैं।
  • अधिक आय अर्जित करने के अधिक अवसर :
  • श्रमिक एक साथ कई कार्य कर सकते हैं ।
  • वे एक बड़ी परियोजना पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और अपनी आय बढ़ाने के लिए कई छोटे काम कर सकते हैं।

व्यापार के लिए:

  • लागत प्रभावशीलता:
  • गिग इकॉनमी में संचालन के प्रमुख लाभों में से एक लागत और व्यय को व्यापक रूप से कम करना माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि व्यवसायिक ऑफ-साइट श्रमिकों को काम पर रखने में सक्षम हैं जो महंगे कार्यक्षेत्रों और बड़े कार्यालयों को बनाए रखने की आवश्यकता को काफी कम कर देता है।
  • अधिक विकल्प की उपलब्धता :
  • कंपनी के बजट के अनुसार अपने क्षेत्र के कुछ सर्वश्रेष्ठ व्यक्तियों का चयन कर सकते हैं । विकल्प अधिक विविध हैं क्योंकि आपूर्ति स्थानीय श्रमिकों और दुनिया भर से आती है।

गिग अर्थव्यवस्था में आने वाली चुनौतियाँ:

  • लाभ की कमी :
  • गिग श्रमिकों को आमतौर पर कंपनियों द्वारा अनुबंध के आधार पर काम पर रखा जाता है और उन्हें कर्मचारी नहीं माना जाता है।
  • उन्हें कुछ ऐसे लाभ नहीं मिलते हैं जो एक ऑन-रोल कर्मचारी करता है।
  • कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं : श्रमिकों के लिए कोई श्रम कल्याण परिलब्धियां जैसे पेंशन, ग्रेच्युटी आदि का प्रावधान नहीं हैं।
  • कठोरता: जहाँ पारंपरिक श्रमिकों के लिए, काम के घंटे और वेतन की अधिक कठोरता, जबकि गिग इकॉनमी में काम के असाइनमेंट और चुनने के लिए भुगतान की पेशकश के अधिक विकल्प हैं, काम के घंटों का अधिक लचीलापन और कार्य से कार्य पर स्विच करने की अधिक स्वतंत्रता है।
  • कोई रोजगार स्थिरता और भारी काम का बोझ नहीं हैI
  • गिग वर्कर्स की वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए उनके पास कोई उचित शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध नहीं है।
  • बेमेल मांग-आपूर्ति : नौकरियों की तुलना में पहले से ही कई अधिक संभावित ऑनलाइन स्वतंत्र कर्मचारी हैं, और यह बेमेल मांग-आपूर्ति समय के साथ खराब हो जाएगा।

क्या आप जानते हैं?

  • इंडिया स्टाफिंग फेडरेशन की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका, चीन, ब्राजील और जापान के बाद विश्व स्तर पर फ्लेक्सी-स्टाफिंग में पांचवां सबसे बड़ा देश है ।
  • भारत में अनुमानित 56% नए रोजगार गिग इकॉनमी कंपनियों द्वारा ब्लू-कॉलर और व्हाइट-कॉलर कार्यबल दोनों में उत्पन्न किए जा रहे हैं।
  • ओपन-कॉलर वर्कर : यह एक ऐसा वर्कर है जो घर से काम करता है, विशेषकर इंटरनेट के माध्यम से ।

गिग इकॉनमी के लिए नीति आयोग की सिफारिशें क्या हैं?

  • राजकोषीय प्रोत्साहन जैसे टैक्स-ब्रेक या स्टार्टअप अनुदान प्रदान किया जा सकता है जो आजीविका के अवसर प्रदान करते हैं जहां महिलाएं अपने श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा (जैसे, 30 प्रतिशत) बनाती हैं।
  • व्यवसायों को महिला श्रमिकों की भर्ती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि संगठन में महिला प्रबंधकों और पर्यवेक्षकों की अधिक हिस्सेदारी यह सुनिश्चित करती है कि श्रमिकों के साथ संचार लैंगिक रूढ़िवादिता को स्थापित नहीं करेगा ।
  • फर्म ऐसी नीतियां अपनाती हैं जो वृद्धावस्था या सेवानिवृत्ति योजनाओं के साथ ही आकस्मिकताओं के लिए अन्य बीमा कवर ( जैसे काम से उत्पन्न होने वाली चोट जिससे रोजगार और आय का नुकसान हो सकता है) से संबंधित लाभों की पेशकश करती हैंI
  • ऐसी योजनाएं और नीतियां बीमा कंपनियों के साथ साझेदारी में एक फर्म या सरकार के सहयोग द्वारा विशिष्ट रूप से डिजाइन की जा सकती हैं, जैसा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत परिकल्पित है ।
  • गिग-प्लेटफ़ॉर्म क्षेत्र की क्षमता का दोहन करने के लिए, विशेष रूप से प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के लिए डिज़ाइन किए गए उत्पादों के माध्यम से वित्त तक पहुंच में तेजी लाने के साथ ही , क्षेत्रीय और ग्रामीण व्यंजन, स्ट्रीट फूड, स्व-रोज़गार व्यक्तियों को कस्बों और शहरों के व्यापक बाजारों में अपनी उपज बेचने के लिए प्लेटफार्म्स से जोड़ा जाए I
  • गिग-प्लेटफार्म कार्यबल के आकार का अनुमान लगाने और आधिकारिक गणना (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) के दौरान जानकारी एकत्र करने के लिए गिग श्रमिकों की पहचान करने के लिए एक अलग गणना अभ्यास करने की भी सिफारिश की ।
  • रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर कामगारों की सहायता के लिए एक कोष कोष बनाया जाए ।

सामाजिक सुरक्षा संहिता (CoSS), 2020 के संचालन के लिए राइज फ्रेमवर्क

जैसा कि केंद्र और राज्य सरकारें सामाजिक सुरक्षा संहिता (CoSS) 2020 के तहत नियम और कानून बनाती हैं , वे सभी गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा तक पूर्ण पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पांच-आयामी राइज दृष्टिकोण अपना सकते हैं :

  • समान योजनाओं को डिजाइन करने के लिए मंच के काम की विविध प्रकृति को पहचान करना ।
  • नवोन्मेषी वित्तपोषण तंत्र के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा में वृद्धि की अनुमति प्रदान करना ।
  • योजनाओं को डिजाइन करते समय, प्लेटफॉर्म के विशिष्ट हितों, रोजगार सृजन, प्लेटफॉर्म व्यवसायों और श्रमिकों पर प्रभाव को शामिल करना।
  • व्यापक जागरूकता अभियानों के माध्यम से सरकारी योजनाओं और कल्याण कार्यक्रमों की सदस्यता के लिए श्रमिकों का समर्थन करना ।
  • सुनिश्चित करें कि लाभ श्रमिकों के लिए आसानी से सुलभ हो ।

आगे की राह :

  • गिग इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है और उम्मीद की जा रही है कि यह पूर्व-महामारी अनुमानों को मात देगी, क्योंकि पूर्णकालिक रोजगार से गिग वर्कर्स के रूप में तीव्र गति से रूपांतरित होने की उम्मीद है।
  • जहां सरकार ने गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं, वहीं 'सामाजिक सुरक्षा संहिता' में सुधार करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, गिग वर्कर्स को देय राशि से 5% की कटौती का विकल्प स्वैच्छिक होना चाहिए (आय ब्रैकेट के आधार पर)। चूंकि अधिकांश गिग वर्कर, विशेष रूप से डिलीवरी एक्जीक्यूटिव और ड्राइवर, पहले से ही कोविड -19 महामारी के कारण आय के स्तर में गिरावट का सामना कर रहे हैं, इस तरह की कटौती को माफ नहीं किया जाएगा।
  • इसके अलावा, सभी प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत अनिवार्य कवरेज की पेशकश की जानी चाहिए । यह नियोक्ता कंपनियों के माध्यम से सुगम बनाया जा सकता है, जो कर्मचारियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा I

स्रोत: Livemint

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3:
  • भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन एकत्रीकरण, विकास, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • भारत में गिग इकोनॉमी की चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए नीति आयोग की हालिया सिफारिशों पर चर्चा कीजिये।