नीति आयोग का निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नीति आयोग ने प्रतिस्पर्धात्मकता संस्थान की साझीदारी में निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)-2020 पर रिपोर्ट जारी की है।

परिचय :-

  • वर्तमान में कई विदेशी कंपनियाँ भारत की ओर रूख कर रहीं हैं और भारत सरकार भी देश को एक वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है।
  • वर्तमान में चीन को वैश्विक विनिर्माण केंद्र कहा जाता है क्योंकि यहाँ उत्पादित माल व सेवाएँ दुनियाँ के लगभग सभी देशों में पहुंचती हैं।
  • कुछ देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने कोविड-19 महामारी से निपटने में शुरुआत में ढिलाई बरती और समय रहते विश्व जगत को इसके बारे में आगाह नहीं किया। इससे चीन के प्रति लोगों का विश्वास कम हुआ है और वो चीन से आयात होने वाली माल व सेवाओं का प्रतिस्थापन चाहते हैं। कुछ समय के लिए वैश्विक स्तर पर चीन के माल व सेवाओं के बहिष्कार की लहर भी देखी गयी है। इस स्थिति का भारत जैसे देश फायदा उठाना चाहते हैं ,इसीलिए भारत अपनी निर्यात सुविधाओं को मजबूत करना चाहता है।
  • भारत का प्रति व्यक्ति निर्यात 241 डॉलर पर है। वहीं, दक्षिण कोरिया में प्रति व्यक्ति निर्यात 18,000 डॉलर पर है तो वहीं, चीन में यह 18,000 डॉलर पर है। ऐसे में भारत में निर्यात के लिए बहुत अधिक संभावनाएं मौजूद हैं।
  • विश्व निर्यात में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1.7 प्रतिशत है, जिसे भारत सरकार द्वारा इस दशक में पाँच प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • कई आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि निर्यात, आर्थिक विकास के महत्त्वपूर्ण कारकों में से एक है। उनका कहना है कि प्रायः ऐसा देखा गया है कि पारंपरिक आयात प्रतिस्थापन की नीति से अधिक निर्यात-उन्मुख नीति देश के उच्च और निरंतर आर्थिक विकास में अधिक भूमिका अदा करती है।
  • अगर भारत 2025 तक 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनाना चाहता है तो इसमें भारतीय माल व सेवाओं के निर्यात की भी मुख्य भूमिका होगी।

निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) के बारे में

  • देश में राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों की निर्यात तैयारी का मूल्यांकन करने के लिये निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) को नीति आयोग ने सर्वप्रथम वर्ष 2019 में जारी किया था। तब से यह प्रत्येक वर्ष जारी किया जाता है।
  • नीति आयोग का यह निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) प्रतिस्पर्द्धी संघवाद की भावना को ध्यान में रखते हुए उन सभी कारकों का आकलन करता है जो किसी राज्य अथवा संघ शासित प्रदेश के निर्यात प्रदर्शन को निर्धारित करने में अनिवार्य भूमिका अदा करते हैं।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में विश्व स्तर पर एक मजबूत निर्यातक बनने की असीम क्षमता है। इस क्षमता का उपयोग करने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि भारत अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर मुड़े और उन्हें देश के निर्यात प्रयासों में सक्रिय सहभागी बनाये। इस विजन को प्राप्त करने की एक कोशिश में, निर्यात तैयारी सूचकांक 2020 राज्यों की संभावनाओं एवं क्षमताओं का मूल्यांकन करता है।
  • ईपीआई का उद्वेश्य भारतीय राज्यों की निर्यात तैयारी और निष्पादन की जांच करना ,चुनौतियों और अवसरों की पहचान करना, सरकारी नीतियों की प्रभावोत्पादकता को बढ़ाना और एक सुविधाजनक नियामकीय संरचना को प्रोत्साहित करना इत्यादि है।
  • ईपीआई की संरचना में 4 स्तंभ- नीति, व्यवसाय परितंत्र, निर्यात परितंत्र, निर्यात निष्पादन तथा 11 उप स्तंभ - निर्यात संवर्धन नीति, संस्थागत संरचना, व्यवसाय वातावरण, अवसंरचना, परिवहन संपर्क, वित्त की सुविधा, निर्यात अवसंरचना, व्यापार सहायता, अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना, निर्यात विविधीकरण और विकास अनुकूलन शामिल हैं।
  • निर्यात तैयारी सूचकांक उप-राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण प्रमुख क्षेत्रों की पहचान के लिए एक डाटा केंद्रित प्रयास है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का उन महत्वपूर्ण मानदंडों पर आकलन किया गया है जो टिकाऊ निर्यात वृद्धि अर्जित करने के लिए किसी भी पारंपरिक आर्थिक इकाई के लिए निर्णायक हैं। यह सूचकांक निर्यात संवर्धन के संबंध में क्षेत्रीय निष्पादन के मानदंड के लिए राज्य सरकारों के लिए एक सहायक मार्गदर्शिका होगी।

ईपीआई-2020 के निष्कर्ष

  • ईपीआई -2020 में गुजरात को शीर्ष स्थान हासिल हुआ है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु इस सूचकांक में क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं ।
  • ईपीआई -2020 रिपोर्ट के मुताबिक छह तटीय राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और केरल पहले 10 राज्यों में शुमार हैं। कुल मिलाकर, अधिकांश तटीय राज्य सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में से हैं। शीर्ष 10 की रैंकिंग में आठ में से छह तटीय राज्य शामिल हैं जो निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मजबूत सक्षमकारी और सुगमकारी कारकों की उपस्थिति का संकेत देते हैं।
  • मैदानी क्षेत्र के राज्यों में राजस्थान का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। इसके बाद तेलंगाना और हैदराबाद का स्थान आता है।
  • हिमालयी अर्थात पहाड़ी राज्यों की बात की जाए तो ईपीआई -2020 में उत्तराखंड शीर्ष पर रहा। इसके बाद त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश का स्थान आता है।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में दिल्ली का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। उसके बाद गोवा और चंडीगढ़ का स्थान आता है।
  • इस संस्करण के साथ ईपीआई ने यह प्रदर्शित किया है कि अधिकांश भारतीय राज्यों ने निर्यात विविधीकरण, परिवहन संपर्क एवं अवसंरचना के उप स्तंभों में औसतन अच्छा प्रदर्शन किया है। इन तीनों उप स्तंभों में भारतीय राज्यों का औसत स्कोर 50 प्रतिशत से अधिक रहा। इसके अतिरिक्त, निर्यात विविधीकरण एवं परिवहन संपर्क में निम्न मानक विचलन को देखते हुए, औसतों को असमान रूप से कुछ अधिक अच्छा प्रदर्शन करने वालों के द्वारा उच्चतर नहीं किया गया है। तथापि, भारतीय राज्यों को निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के लिए अन्य प्रमुख घटकों पर भी फोकस करना चाहिए।
  • रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि निर्यात अनुकूलन और तैयारी केवल समृद्ध राज्यों तक ही सीमित नहीं है। उभरते हुए राज्य भी गतिशील निर्यात नीति उपाय कर सकते हैं, वहां कार्यशील संवर्धन संबंधी परिषद हो सकती है और अपने निर्यातों को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय संभार तंत्र संबंधी योजनओं के साथ तालमेल बिठा सकते हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड भूमि से घिरे हुए दो राज्य हैं जिन्होंने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय आरंभ किए। इसी प्रकार की सामाजिक- आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य राज्य भी छत्तीसगढ़ और झारखंड द्वारा किए गए उपायों पर गौर कर सकते हैं और अपने निर्यात को बढ़ाने के लिए उन्हें कार्यान्वित कर सकते हैं।
  • वृद्धि अनुकूलन उप स्तंभ के तहत पूर्वोत्तर के कई राज्य अपने स्वदेशी उत्पाद बास्केट पर ध्यान केंद्रित करने के द्वारा निर्यात में बढोतरी करने में सक्षम रहे। यह प्रदर्शित करता है कि ऐसे बास्केटों (जैसे मसाले) का केंद्रीकृत विकास एक तरफ निर्यात को बढ़ावा दे सकता है तो दूसरी तरफ इन राज्यां में किसानों की आय में भी बढोतरी कर सकता है।

भारत में निर्यात संवर्धन की चुनौतियाँ

  • निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)-2020 की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर, भारत में निर्यात संवर्धन को तीन बुनियादी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है: 1. निर्यात अवसंरचनाओं में क्षेत्रों के भीतर एवं अंतःक्षेत्रीय विषमताएं, 2. राज्यों के बीच निम्न व्यापार सहायता तथा विकास अनुकूलन, 3. जटिल एवं अनूठे निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निम्न अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना।
  • निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)-2020 की रिपोर्ट के अनुसार निर्यात संवर्धन के लिए राज्य और केन्द्रीय स्तर पर निर्यातों के लिए वित्तीय सुविधा और कम निर्यात ऋण तक पहुंच की कमी भी निर्यात को हतोत्साहित करती है।
  • निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)-2020 की रिपोर्ट के अनुसार देश भर में अनुसंधान और विकास (R&D) के बुनियादी ढांचे में सुधार भी अन्य सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है क्योंकि अनुसंधान और विकास बुनियादी ढांचे के मामले में क्षेत्रीय असमानताएं अधिक हैं। वैश्वीकरण के दौर में जहाँ अधिक उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग है ऐसे में बिना अनुसंधान और विकास (R&D) के हमारे उत्पाद प्रतिस्पर्धी नहीं होगें एवं वैश्विक मांग का हम लाभ उठाने में अक्षम होंगें।
  • भारत में उस स्तर की अत्याधुनिक तकनीक एवं कुशल श्रमबल नहीं है, जो वैश्विक मांग के अनुरूप नवाचार युक्त उत्पाद उपलब्ध करा सकें।
  • भारत का वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (global supply chain) से अपर्याप्त जुड़ाव है।
  • उत्पादन के केंद्र के रूप में भारत को बांग्लादेश एवं वियतनाम कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। बांग्लादेश एवं वियतनाम में भारत की अपेक्षा उत्पादन लागत कम है। यही कारण है कि चीन से अपना कारोबार समेटने वाली कंपनियाँ भारत की अपेक्षा बांग्लादेश एवं वियतनाम की ओर ज्यादा रूख कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति भारतीय निर्यात में प्रमुख बाधा है।
  • भारत में लाजिस्टिक कीमतें भी काफी अधिक हैं जो भारतीय निर्यात के दामों में वृद्धि कर देती हैं,जिससे वो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाते हैं ।
  • कोविड-19 महामारी ने भी अभूतपूर्व चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं जिससे कई उद्योगों में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग में वृद्धि हुई है। इस कदम ने विघटनकारी व्यापार मॉडल और नवीन समाधानों को अपनाने पर बल दिया है जिससे विनिर्माण प्रक्रियाओं के पारंपरिक व्यापार मॉडल अप्रचलित हो गई है। अतः डिजिटल प्रौद्योगिकियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के परिप्रेक्ष्य में विनिर्माण प्रक्रियाओं को परिवर्तन करना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

भारत सरकार द्वारा निर्यात को बढ़ाने हेतु प्रयास

सरकार द्वारा निर्यात को बढ़ाने के लिए कई योजना और निर्यात प्रोत्साहन स्कीम को लागु किया गया है जोकि निम्न है -

  1. अग्रिम प्राधिकरण योजना
  2. वार्षिक आवश्यकता के लिए अग्रिम प्राधिकरण
  3. सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर के लिए निर्यात ड्यूटी ड्राबैक
  4. सेवा कर छूट
  5. ड्यूटी-फ्री आयात प्राधिकरण
  6. जीरो ड्यूटी ईपीसीजी (एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स) स्कीम
  7. पोस्ट एक्सपोर्ट ईपीसीजी ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप स्कीम
  8. निर्यात उत्कृष्टता के शहर (TEE)
  9. मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव (MAI) योजना
  10. विपणन विकास सहायता (एमडीए) योजना
  11. भारत योजना से व्यापार निर्यात (एमईआईएस)
  • नोवल कोविड-19 महामारी के चलते अचानक पैदा हुए वर्तमान हालात को देखते हुए सरकार ने मौजूदा विदेश व्यापार नीति को एक साल यानी 31 मार्च, 2021 तक के लिए विस्तार देकर विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत राहत जारी रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही भारत द्वारा निर्यात को बढाने के लिए कुछ नवीनतम कदम लिए गए है-
  • भारत सरकार ने निर्यात के संबंध में व्यापारियों को आसानी से अपना रिफंड पाने हेतु वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत पूर्णतया ‘स्वचालित इलेक्ट्रानिक रिफंड रूट’ की स्थापना की है।
  • भारत में लाजिस्टिक कीमतों को घटाने हेतु बुनियादी ढांचा का विकास किया जा रहा है।
  • भारत क्वाड ग्रुप के देशों के साथ मिलकर हिन्द -प्रशांत क्षेत्र में एक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला का विकास कर रहा है।
  • भारत ने अपनी एफ़डीआई नीति को भी उदार किया है।
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार देश में ही विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है। इसीलिए भारत सरकार ने हाल ही में रक्षा उत्पादन हेतु 100 उत्पादों की ऐसी सूची जारी की है जिन्हें देश में ही उत्पादित किया जाएगा।
  • भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण हेतु एक प्रोत्साहन योजना भी चला रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के संबंन्ध में भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाया जा सके।
  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs) ने अपने प्रमुख कार्यक्रम "Turant Customs" को लॉन्च किया है। तुरंत कस्टम्स कार्यक्रम इज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में एक सुधार करने का मेगा कार्यक्रम है।

परितंत्रात्मक दृष्टिकोण :-

  • ऐसे लोग जो सभी जीवों के प्रति सद्भावना चाहते हैं तथा सम्पूर्ण पर्यावरण की ओर अपनी श्रद्धा और प्रति सम्मान की मांग रखते हैं। इस तरह के कार्य जो कि दूसरी जीवो के प्रति नैतिक जिम्मेदारियों की बात करता है। परितंत्रात्मक दृष्टिकोण का सूचक है।

आगे की राह

  • निर्यात आत्मनिर्भर भारत अभियान का अभिन्न हिस्सा है और भारत को जीडीपी और विश्व व्यापार में निर्यात की हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश जारी रखनी चाहिए।
  • भारत सरकार को आने वाले वर्षों में विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी को दोगुना करने का प्रयत्न करना चाहिए ।
  • राज्यों को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक अलग से विभाग बनाने पर विचार करना चाहिए।
  • निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) सभी हितधारकों को राष्ट्रीय एवं राज्यीय दोनों ही स्तरों पर निर्यात परितंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए दिशा- निर्देशित करेगा।
  • निर्यात से संबन्धित चुनौतियों का सामना करने के लिए इन प्रमुख कार्यनीतियों पर जोर दिए जाने की आवश्यकता है: निर्यात अवसंरचना का एक संयुक्त विकास, अनुसंधान और विकास (R&D),उद्योग-शिक्षा क्षेत्र संपर्क का सुदृढ़ीकरण और आर्थिक कूटनीति के लिए राज्य स्तरीय भागीदारी।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • हाल ही में नीति आयोग ने निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)-2020 पर रिपोर्ट जारी की है।इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताएं कि भारत इस समय निर्यात से संबन्धित किस प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है? भारत में निर्यात को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है?