संपत्ति का मुद्रीकरण (Monetization of Assets) - समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वित्त मंत्री ने 6 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत 2022-25 तक 6 लाख करोड़ के एसेट्स बेचे जाएंगे।

संपत्ति का मुद्रीकरणः

केन्द्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के बजट में ही संपत्ति के मुद्रीकरण पर काफी जोर देने की घोषणा की थी। भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना संकट के चलते काफी धीमे हो गई है सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए फाइनेंस जुटाने के नए विकल्प तलाश कर रही है।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन का उद्देश्य ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में निजी क्षेत्र को शामिल करना और उन्हें राजस्व अधिकार हस्तांतरित करना है लेकिन इस परियोजना के तहत स्वामित्व का हस्तांतरण नहीं किया जाएगा। जबकि निजीकरण में सरकार राजस्व अधिकार व स्वामित्व के अधिकार का हस्तांतरण निजी क्षेत्र को कर देती हैं

संपत्ति के मुद्रीकरण में शामिल क्षेत्रः

सरकार ने संपत्ति के मुद्रीकरण के लिए सड़क बिजली ट्रांसमिशन, तेल, टेलीकॉम टॉवर, स्टेडियमो सहित अन्य परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत दूरसंचार क्षेत्र में 86 लाख किमी फाइबर संपत्ति और 14917 टॉवर व 81541 किमी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन, 6 गीगावॉट जलविद्युत और ऊर्जा संपत्ति इत्यादि संपत्तियाँ शामिल है।

भारत के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए और मूल्य बनाने में मुद्रीकरण मदद करेगा। यह सरकारी स्वामित्व को स्थानांतरित किए बिना निजी भागीदारी के नवीन तरीको को खोज करेगा।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना के लाभः

  • मुद्रीकरण पाइपलाइन माध्यम से दीर्घ अवधि को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। भारत सरकार ऐसे निवेशको को बढ़ावा देगी जो ढांचागत क्षेत्र में निवेश के इच्छुक है।
  • ब्राउनफील्ड एसेट्स को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकेगा।
  • रीयल टाइम निगरानी के लिए एक परिसंपत्ति मौद्रीकरण डेशबोर्ड भी विकसित किया गया है।
  • रोजगार के नये अवसर सृजित करने में सहयोग प्रदान करेगा।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के समक्ष चुनौतियाँ :

  • स्वतंत्र क्षेत्रीय नियामको का अभाव है।
  • फोर लेन से कम वाले राष्ट्रीय राजमार्गों में निवेशको की कम दिलचस्पी दिखाई देती है।
  • स्वतंत्र क्षेत्रीय नियामको का अभाव राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के लिए प्रमुख चुनौती है।
  • संपत्ति विशिष्ट चुनौतियाँ भी विद्यमान है।

क्या एनएमपी से अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी?

सरकार का मानना है कि सार्वजनिक संपत्तियों को निजी निवेशकों को पट्टे पर देने से इन परिसंपत्तियों में फंसी मुक्त पूंजी को मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए सरकार ने एक सड़क परियोजना में हजारो रुपये निवेश किया है वार्षिक टोल राजस्व के माध्यम से अपने निवेश को पुनवृत्ति करने में दशकों लग सकते है। इसके बजाय सरकार निजी निवेशक को पट्टे पर देकर अपने निवेश का एक अच्छा हिस्सा वसूल कर सकती है।

विश्लेषको का यह भी मानना है कि एनएमपी के माध्यम से बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सही मॉडल सरकार लागू कर रही है जो बुनियादी ढांचे के निर्माण से संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए उपयुक्त रहेगा।

पीपीपी के माध्यम से मुद्रीकरण के मुद्देः

  • पीपीपी के आधार पर बनाई गई परियोजनाओं पर खर्च अधिक होता है जिसे द्वितुलन पत्र समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • पीपीपी परियोजनाओं में भूमि और पुर्नवास के संबंधित मुद्दे शामिल है।
  • पीपीपी के माध्यम से परियोजना का क्रियान्वयन होता है तो टैरिफ संबंधी चुनौतियाँ भी रहती है।
  • विनिमय दर जोखिम और संपत्ति जोखिम से निजी फर्मों व ऋणदाताओं को सर्तक रहने की आवश्यकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्टः

इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट म्यूचुअल ट्रस्ट म्यूचुअल फंड की तरह एक सामूहिक निवेश योजना है। म्यूचुअल फंड इक्विटी शेयरो में निवेश का अवसर प्रदान करते है जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट सड़क और बिजली जैसी बुनियादी ढाँचा परियोजना में निवेश की अनुमति देता है। इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट को सेबी इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट विनियमन 2014 द्वारा विनियमित करती है।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं के मामले में, यह बुनियादी ढांचे के विकासकर्ता या रियायत रखने वाले एक विशेष प्रयोजन को संदर्भित करता है।

आगे की राहः

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन बुनियादी ढांचे की योजना की सफलता अन्य हितधारक की भूमिका पर निर्भर करेगी। मुद्रीकरण के माध्यम से अवसंरचना निर्माण को संभव बनाना है जिसमें क्षमता के लिहाज से अपने क्षेत्रें के उत्कृष्ट सार्वजनिक और निजी क्षेत्र सहयोग करे जिससे सामाजिक आर्थिक विकास को संभव बनाया जा सके और देश के नागरिकों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो। साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था को 2024 तक 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के सपने को साकार किया जा सकेगा।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • अर्थव्यवस्था