क्वाड का सैन्यीकरण (Militarisation of the Quad) - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि “क्वाड (Quad) ग्रुप में क्षमता है की वह हिन्द महासागर, हिन्द- प्रशांत क्षेत्र और अन्य महासागरीय क्षेत्र में ‘नेविगेशन संचालन की स्वतंत्रता'(freedom of navigation operation) सुनिश्चित करने हेतु मिलकर नेविगेशन संचालन को ऑपरेट (operate)कर सकता है”।

परिचय

  • भारतीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के इस बयान से कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या भारत हिन्द महासागर, हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य महासागरीय क्षेत्र में क्वाड(Quad) ग्रुप के दूसरे देशों (अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया) के साथ मिलकर ज्वाइंट पेट्रोलिंग (Joint Petroling) कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो क्वाड(Quad) ग्रुप का सैन्यीकरण (Militarisation) का रास्ता प्रशस्त होगा।
  • भारत परंपरागत रूप से हिन्द महासागर और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में किसी भी तरह के सैन्यीकरण को लेकर उत्साहित नहीं रहा है। इसीलिए भारत क्वाड ग्रुप के सैन्यीकरण को भी नकारता रहा है।
  • भारत, हिन्द महासागर क्षेत्र में भी बड़ी मुश्किल से ही किसी देश के साथ ज्वाइंट पेट्रोलिंग (Joint Petroling) हेतु राजी होता है क्योंकि भारत का मानना है कि हिन्द महासागर क्षेत्र में किसी अन्य देश की उपस्थिति से भारत का इस क्षेत्र में प्रभाव कम हो सकता है।
  • हालांकि हाल ही में भारत ने फ़्रांस के साथ मिलकर हिन्द महासागर में ज्वाइंट पेट्रोलिंग की थी।
  • भारत, मालाबार सैन्य अभ्यास में अभी तक आस्ट्रेलिया को शामिल करने हेतु राजी नहीं हुआ है ।

क्या है क्वाड(Quad) की अवधारणा?

  • ‘क्वाड’ दरअसल चार देशों- भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का एक समूह है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता, कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए इन देशों ने हाथ मिलाया है । गौरतलब है कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ समुद्री भागों के हिस्से को हिंद प्रशांत क्षेत्र (Indo- Pacific Area) कहते हैं। वर्तमान में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 38 देश शामिल हैं, जो विश्व के सतह क्षेत्र का 44 प्रतिशत है।
  • जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के बढ़ते प्रभुत्व के कारण उत्पन्न हो रही भू-राजनैतिक और भू-रणनीतिक चिंताओं के मद्देनजर 2007 में भारत, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्वकर्त्ताओं के साथ मिलकर रणीनतिक वार्ता के रूप में ‘क्वाड’ नामक अनौपचारिक समूह की शुरुआत की थी। वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा इस ग्रुप से बाहर हो गया , जिसके परिणामस्वरूप ‘क्वाड’ का सिद्धान्त शिथिल पड़ गया था ।
  • वर्ष 2017 में भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने मिलकर ‘क्वाड’ को ‘क्वाड’ 2.0 के रूप में फिर से पुनर्जीवित किया था। ‘क्वाड’ मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द- कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।
  • कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर भले ही‘क्वाड’ को लेकर कुछ कहा जाये लेकिन व्यावहारिक तौर पर हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को रोकने के लिए ये लोकतान्त्रिक देश एक साथ आए हैं। क्वाड का चीन के अलावा रूस भी विरोध करता है।
  • आसियान के कुछ देश ‘क्वाड’ का खुलकर समर्थन करते हैं, जबकि अन्य देश चीन को नाराज नहीं करने की नीति को अपनाते हुए ‘क्वाड’ के बारे में सधी प्रतिक्रिया देते हैं।
  • क्वाड का उद्देश्य नेविगेशन की स्वतंत्रता, ओवर फ्लाइट की स्वतंत्रता, अंतर्राष्ट्रीय नियमों का सम्मान, समुद्री क्षेत्र में शांति व सुरक्षा, परमाणु अप्रसार आदि मुद्दों पर बल प्रदान करना है।
  • भारत ने समुद्र में आने-जाने की आजादी के सिद्धांत पर जोर देकर, समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान कर और चारों देशों के साझा विचार के साथ तालमेल बैठाकर अपने लिए एक अलग जगह बनाई है।

क्वाड के सैन्यीकरण को लेकर भारत की रणनीति

  • भारत ने क्वाड के सैन्यीकरण को लेकर परंपरागत रूप से अरूचि ही दिखाई है और कई मौकों पर तो क्वाड के सैन्यीकरण के मुद्दे पर विरोध भी दर्ज कराया है।
  • भारत का कहना है कि क्वाड का उपयोग असैनिक या नागरिक मुद्दों के लिये होना चाहिये।
  • वर्ष 2018 में शांग्रिला डायलॉग में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत, हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को एक भौगोलिक सिद्धांत (Geographical Concept) प्रदान करता है, न कि यह कुछ देशों की विशेष रणनीति पर बल प्रदान करता है। कुल-मिलकर भारतीय प्रधानमंत्री का इशारा क्वाड की तरफ था , जिसे भारत सहित कुछ देशों ने मिलकर एक विशेष रणनीति के तहत बनाया है।
  • हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत द्वारा गुटनिरपेक्ष आंदोलन को वरीयता ना देने का यह मतलब नहीं है कि भारत किसी अन्य संगठन तंत्र का हिस्सा बनेगा। एस जयशंकर का भी इसारा क्वाड की ही तरफ था।

क्वाड के सैन्यीकरण से भारत को लाभ

  • कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा पर जिस प्रकार का तनाव बना हुआ है , उसे देखते हुए भारत को क्वाड के सैन्यीकरण की तरफ बढ़ाना चाहिए ।
  • ऐसा भी देखा जा रहा है कि भारत की तमाम कोशिशों के बावजूद चीन लद्दाख में उस क्षेत्र को छोड़ने को राजी नहीं हो रहा है , जहां पहले दोनों देशों की सेनाएँ पेट्रोलिंग करती थीं। यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच बफर जोन का कार्य करता था। कई बैठकों के बावजूद अभी तक सीमा विवाद का हल नहीं निकल पाया है। इसलिए कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पर दबाव बनाने हेतु भारत को क्वाड पर फोकस करना चाहिये।
  • विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि क्वाड के सैन्यीकरण से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र नेविगशन सुनिश्चित होगा और इस क्षेत्र की सुरक्षा में भी इजाफा होगा क्योंकि क्वाड ग्रुप के सदस्य देशों का लक्ष्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देना है।
  • क्वाड के सैन्यीकरण से भारतीय नौसेना की क्षमता में इजाफा होगा और भारत को इस ग्रुप के माध्यम से सैन्य क्षेत्र में काफी कुछ सीखने को मिलेगा क्योंकि इस क्वाड ग्रुप अमेरिका जैसी अत्याधुनिक शक्ति शामिल है।
  • कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि क्वॉड को ‘एशिया का नाटो’ बना दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि क्वॉड में शामिल सभी देश अगर साथ आ जाएं तो चीनी ड्रैगन को आसानी से काबू में किया जा सकता है।

क्वाड बनाम चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति

  • क्वाड के सैन्यीकरण के माध्यम से भारत चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की नीति को भी जवाब दे सकता है।
  • जापान से लेकर अफ्रीका तक विस्तारवादी नीतियों लागू कर चीन अपनी मोतियों की माला की नीति (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति) के तहत दक्षिण एशिया तथा हिन्द महासागर के छोटे-छोटे देशों में सामरिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अड्डों का निर्माण करके भारत को घेरने की लंबे समय से जीतोड़ कोशिश कर रहा है। चीन, बांग्लादेश और म्यामांर में नेवल बेस की स्थापना कर रहा है। दोनों ही देशों को चीन हथियार और अन्य साजों सामान दे रहा है।
  • चीन मालदीव में भारत से मात्र कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर एक कृत्रिम द्वीप बना रहा है। इसने श्रीलंका के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल के लिए लीज पर ले लिया है।
  • इसी तरह से चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को भी नेवल बेस के रूप में विकसित कर रहा है। जानकारों का मानना है कि मलक्का स्ट्रेट में भारत और अमेरिका की नजर से बचने के लिए चीन ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल करेगा। इसी तरह से चीन कंबोडिया में भी एयर बेस और नेवल बेस बना रहा है।

क्वाड का सैन्यीकरण एवं अन्य देश

  • क्वाड के सैन्यीकरण से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कई देश अपना हित साधने की कोशिश में हैं क्योंकि चीन का इस क्षेत्र में कई देशों के साथ संघर्ष है।
  • जापान का चीन के साथ एक निर्जन द्वीप को लेकर विवाद चल रहा है। माना जा रहा है कि एशिया में जापान और चीन के बीच अगली भिड़त हो सकती है। उधर, ऑस्ट्रेलिया के पास सोलोमन द्वीप पर चीन नेवल बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। चीन के साथ अमेरिका का ट्रेड वॉर और ताइवान को लेकर विवाद बढ़ गया है। ये चारों देश एशिया के अन्य देशों के साथ मिलकर चीन को आसानी से घेर सकते हैं।
  • इनके अलावा, दक्षिणी चीन सागर में चीन के बढ़ते दबदबे से भी सब परेशान हैं। यहां केनटूना आइलैंड को लेकर सालों से चीन और इंडोनेशिया के बीच विवाद है। पार्सेल और स्पार्टी आइलैंड को लेकर चीन-वियतनाम आमने-सामने हैं।
  • दक्षिणी- चीन सागर में ही जेम्स शेल पर चीन और मलेशिया दोनों दावा करते हैं। दक्षिणी चीन सागर पर चीन के दावे को लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने भी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत शिपिंग का मुद्दा उठाकर चीन को चेतावनी दी है।

क्वॉड ग्रुप को लेकर भारत की विदेश नीति की चिंताएँ

  • क्वाड ग्रुप के सैन्यीकरण को लेकर भारत की अपनी चिंताएँ हैं। भारत को लगता है कि इससे चीन की भारत के प्रति नाराजगी काफी बढ़ जाएगी।
  • कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि क्वाड ग्रुप के सैन्यीकरण का तात्पर्य है कि भारत का अमेरिका के गुट में पूरी तरह से चला जाना है। जबकि भारत हमेशा से ही गुट निरपेक्ष की नीति पर बल देता आया है।
  • भारत एशिया में चीन को संतुलित करने हेतु अमेरिका का मोहरा नहीं बनना चाहता है।
  • भारत को लगता है कि क्वाड ग्रुप के सैन्यीकरण से भारत की विदेश नीति की रणनीतिक स्वतन्त्रता प्रभावित हो सकती है।

क्वॉड ग्रुप के अस्तित्व को आने में लेकर चुनौतियाँ

  • चीन-केंद्रित क्वाड 2.0 रणनीति का भारत के लिए प्रत्यक्ष परिणाम हो सकते हैं क्योंकि इस समूह में भारत ही एकमात्र राष्ट्र है चीन के साथ स्थलीय सीमाओं को साझा करता है। वर्तमान में चीन-पाकिस्तान की सांठगांठ और लद्दाख में गतिरोध को लेकर तनाव द्विपक्षीय संबंधों पर हावी है।
  • यह भारत के दो प्रमुख भारतीय सहयोगियों, ईरान और म्यांमार को भारत से अलग करने का जोखिम बढ़ा देगा क्योंकि बीजिंग का ईरान और म्यांमार दोनों के साथ प्रगाढ़ संबंध है।
  • चीन के विरुद्ध एक मुखर प्रतिक्रिया के रूप में क्वाड को पुनर्जीवित किया गया है जोकि "स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक" और "नियम आधारित आदेश" की संकल्पना पर आधारित है। यह शब्द अपष्ट है और संभावित अटकलों की गुंजाईश को बढ़ा देता है।
  • भारत ने व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी भूमिका को सीमित रखा है एवं कुछ अपवादस्वरूप गतिविधियों (मालाबारअभ्यास, त्रिपक्षीय समूह भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान और भारत-अमेरिका-जापान वियतनाम के साथ सहयोग) में भारत की भूमिका स्पष्ट दिखती है। लुक ईस्ट (अब बदला हुआ एक्ट ईस्ट) की घोषणा के बाद भी 25 साल बीत चुके हैं और भारत की नीतियों ने इंडो-पैसिफिक में चीन की घुसपैठ को नजरअंदाज किया है। क्वाड देशों के साथ गहरा सहयोग इस विसंगति को उजागर कर सकता है और भारत और चीन को एक क्षेत्रीय प्रतियोगिता में डाल सकता है, जिसके लिए भारत तैयार नहीं है।
  • रणनीतिक डोमेन में भारत काफी पिछड़ा हुआ है क्यों भारत का नौसैनिक बेड़ा लगातार घट रहा है। हालांकि इस दिशा में कार्य हो रहे है लेकिन यह काफी धीमी गति से हो रहा है ऐसे में प्रश्न उठता है कि भारत चीन की बढ़ती नौसैनिक क्षमताओं के साथ कैसे आगे बढ़ेगा। आर्थिक क्षेत्र में एक समान गतिशील प्रबल होता है। इसके अलावा चीन का आसियान देशों के साथ व्यापार भारत-आसियान व्यापार से छह गुना अधिक है। इसके साथ ही भारतीय विदेशी प्रत्यक्ष निवेश चीन की तुलना में अल्प है।
  • साल-दर-साल, आसियान के विदेश मंत्रियों की बैठकों द्वारा जारी संयुक्त विज्ञप्ति से स्पष्ट है कि चीन को चुनौती देने के मुद्दे पर ये देश विभाजित है। आसियान ने चीन के साथ अपने विवादों को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित करने से परहेज किया है। यह वर्ताव आसियान के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है इसके साथ ही यह कुटनीतिक नीतियों को इस क्षेत्र में चीन के खिलाफ संतुलन बनाने में शंका व्यक्त करता है कि अन्य शक्तियया विश्वसनीय हैं या नहीं।
  • चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताएं एक प्रमुख चिंता का विषय हैं लेकिन चीन ने एशियाई राज्यों पर जो मजबूत आर्थिक निर्भरता की नीति लागू की है, उसने बीजिंग की वैधता दिलाने में भी योगदान दिया है। इसका लाभ चीन को रणनीतिक रूप से मिलता है क्योंकि एशियाई देश चीन के मामले पर प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं आते।

क्वॉड ग्रुप के देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी

  • भारत-अमेरिका के बीच 2002 में जनरल सिक्युरिटी ऑफ मिलिट्री इन्फोर्मेशन एग्रीमेंट हुआ था। इसमें तय हुआ था कि जरूरत पड़ने पर दोनों देश एक-दूसरे से मिलिट्री इंटेलिजेंस साझा करेंगे। फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे से पहले ही भारत ने 2-6 अरब डॉलर (19 हजार 760 करोड़ रुपए) की लागत से 24 एमएच 60 आर मल्टीरोल हेलीकॉप्टर खरीदने की डील को मंजूरी दी है। इतना ही नहीं, चीन को काउंटर करने के लिए ही ट्रम्प ने 2016 में भारत को ‘डिफेंस पार्टनर’ का दर्जा दिया था।
  • भारत-ऑस्ट्रेलिया की नौसेना हिंद महासागर में अभ्यास करती हैं, जिसे ऑसइंडेक्स (AUSINDEX) कहते हैं।
  • भारत और जापान के बीच भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री डकैती जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं। इसके अलावा भारत, जापान और अमेरिका की नौ सेनाएं मालाबार में एक साथ अभ्यास भी करती हैं। निष्कर्ष
  • जैसा कि वर्ष 2018 के शांग्रिला डायलॉग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया कि भारत की हिंद-प्रशांत नीति किसी विशेष देश (चीन) को एक किनारे लगाने के लिए नहीं है। हिंद-प्रशांत को लेकर भारत की एक सकारात्मक सोच है।
  • भारत की परिभाषा के तहत हिंद-प्रशांत ‘एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी क्षेत्र है जो हम सब को प्रगति और खुशहाली की दिशा में आगे बढ़ते हुए हर किसी को खुले दिल से स्वीकार करता है। भारत ने ‘समावेशी’ शब्द जोड़कर हिंद-प्रशांत की परिभाषा को वैचारिक दृष्टि से एक नया आयाम देने की कोशिश की है।
  • अतः भारत सरकार को चाहिये कि अपनी इसी सकारात्मक सोच को लेकर हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में आगे बढ़े और एक्ट ईस्ट पॉलिसी जैसे उपकरणों के माध्यम से अपने राष्ट्रीय हितों को साधने का प्रयत्न करे ।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • क्वाड ग्रुप के सैन्यीकरण से क्या तात्पर्य है? क्वाड ग्रुप के सैन्यीकरण से भारत को किस प्रकार के लाभ हैं और इससे किस प्रकार की चिंताएँ जुड़ी हैं? संक्षेप में चर्चा कीजिये ।