प्रवासी मजदूर तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • कोरोना के फलस्वरूप हुए लॉकडाउन तथा उसके उपरांत प्रवासी श्रमिक अत्यंत सुभेद्य वर्ग के रूप में सामने आये हैं। प्रवासी श्रमिकों की स्थिति में सुधार हेतु ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार अनिवार्य हो गया है।

परिचय :-

  • संयुक्त राष्ट्र ने 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 1 प्रतिशत तक सिमटने का अनुमान लगाया है जबकि पिछले पूर्वानुमान में यह वृद्धि 2.5 प्रतिशत थी। इस अंतर में सर्वाधिक योगदान कोरोना समस्या का है। कोविड-19 के फलस्वरूप दुनिया भर में लाखों श्रमिकों और पेशेवरों को अपनी नौकरी खोने की कठोर संभावना का सामना करना पड़ रहा है। इस परिस्थिति भारत में आर्थिक परिदृश्य कुछ अधिक भिन्न नहीं है। तेज़ आर्थिक मंदी को रोकने के लिए भारत सरकार ने पहले से ही अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के नए तरीकों पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया है। मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत को ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है जिसमें अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने की अपार संभावनाएं हैं। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भारत में सुधार भारत के आंतरिक प्रवासन को भी रोक सकता है।

भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का इतिहास :-

  • प्राचीन काल में भारत की संवृद्धि का मूल ग्रामीण विनिर्माण तथा ग्रामीण निर्यातोन्मुख अर्थव्यवस्था थी। मौर्य काल से लेकर मुग़ल काल तक भारतीय ग्रामो का आर्थिक ताना बाना शसक्त रहा है। उपनिवेश काल में ग्रामीण भारत के आर्थिक हितो के मूल्य पर अंग्रेजो का औद्योगिक विकास हुआ तथा अंग्रेजो की नीतियों ने भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के ढांचे को कमजोर कर दिया। कृषि के व्यवसायीकरण तथा लचर औद्योगिक विकास के कारण उपनिवेश काल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई तथा लोगों को पलायन हेतु मजबूर होना पड़ा।

भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था से हमारा ध्यान सर्वप्रथम कृषि की ओर जाता है। कृषि क्षेत्र का भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 265 बिलियन डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 17 प्रतिशत है और भारतीय जनसंख्या के 48 -50 प्रतिशत रोजगार कृषि द्वारा उत्पन्न होता है । विश्व भर के किसानों का लगभग एक चौथाई भाग भारतमें है और यहाँ विश्व की कृषि योग्य भूमि का 48 प्रतिशत हिस्सा है। वर्तमान में भारत दुनिया में दलहन और दूध का शीर्ष उत्पादक, गेह,चावल, सब्जियों, फलों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और खाद्यान्न का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • नीति आयोग के अनुसार वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कृषि क्षेत्र आशा की किरण है और इसके वित्त वर्ष 2020-21 में 3 प्रतिशत की दर से बढ़ने की सम्भावना है। वर्तमान में यह गैर-कृषि क्षेत्र से 60 प्रतिशत अधिक वृद्धि कर रहा है और पिछले वर्ष की तुलना में इसके 40-60 प्रतिशत अधिक बढ़ने का अनुमान है। भारत की अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है जो विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में बहुत अधिक है। अब जबकि बाजार कायम है और कीमतें डूबी नहीं है, इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
  • आज पूरा देश आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर है। वास्तव यह हमारे कृषि क्षेत्र को फिर से शुरू करके अपने प्रयासों को देने का एक अच्छा अवसर है
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने और ग्रामीण-शहरी प्रवास को घटाने के लिए तीव्र परिवर्तन की आवश्यकता है। शहरों पर अवांछित दबाव को कम करने और संकटकाल में एक तारक की अहम भूमिका निभाने के लिए गांव को आर्थिक विकास की धुरी के रूप में पननिर्मित किए जाने की आवश्यकता है।
  • यह उपयुक्त समय है जब हम एक पूर्तिकर्ता के रूप में विश्व खाद्य बाजार में सभावनाएं तलाश सकते हैं। ऐसा होने के लिए और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा कर पाने के लिए हमें अपने कृषि के बुनियादी ढांचे और उपलब्ध प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से उन्नत करने की आवश्यकता है।
  • वैश्विक बाजार में उच्च-स्तरीय प्रवेश का यह सही समय है। आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को पनर्जीवित करने में सबसे पहली आवश्यकता कृषि की भूमिका को स्वीकार करना है।
  • यदि हम कोरोना के प्रभाव की बात करें तो हम यह पाते हैं कि प्राथमिक क्षेत्र यथा कृषि , दुग्ध उत्पादन , सब्जी उत्पादन आदि के व्यवसाय , मांग में कोई कमी नहीं आई है ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इस महामारी के आर्थिक प्रभाव से बहुत अधिक प्रभावित नहीं हुई ।
  • जहाँ एक तरफ सम्पूर्ण देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज हो रही थी वहीँ भारत की कृषि ने वृद्धि हासिल की। परन्तु दुर्भाग्य यह है कि हमारे देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भूमिका कोई नया एजेंडा नहीं है। बहुत समय पहले से हम ग्रामीण समुदायों और ग्रामीण भारत के निर्माण और विकास की चर्चा करते रहे हैं।
  • अब हमने ग्रामीण भारत की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में व्यापार बंद होने का जोखिम अधिक अनुभव किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बेहतर होने की गति भी तेज़ है इसलिए व्यवसाय को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की आवश्यकता है। अब जब हम इस संकट से गुजर रहे हैं तो ग्रामीण भारत में व्यापक परिवर्तन स्थायी भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

सरकार के प्रयास

  • कोविड-19 के कारण अप्रवासी श्रमिकों की घर वापसी हमारे देश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक ताने- बाने और सामान्य कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। चूंकि ऐसे मजदूरों की संख्या बहुत अधिक है इसलिए उन्हें अपने कौशल के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराना एक कठिन काम है। सरकार द्वारा समर्थित गरीब कल्याण रोजगार योजना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

गरीब कल्याण रोजगार योजना

  • गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत श्रमिकों को मनरेगा के तहत 18 वर्ष के अधिक उम्र के लोगों को उनकी कौशल क्षमता के अनुसार काम मिलेगा ।
  • इस अभियान के तहत 6 राज्यों के 116 जिलों का चयन किया गया है. ये वे जिले हैं, जहां सबसे अधिक प्रवासी श्रमिक वापस आए हैं। इनमें बिहार के 32 जिले, उत्तर प्रदेश के 31 जिले, मध्य प्रदेश के 24 जिले, राजस्थान के 22 जिले, ओड़िशा के 4 और झारखंड के 3 जिले शामिल हैं।
  • इस अभियान के तहत ग्रामीण विकास, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, रेलवे, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि के क्षेत्र में श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

निष्कर्ष

  • इस समय राष्ट्र को अल्प समय में रोग के प्रसार को रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उत्पादक तरीके से बड़ी संख्या में प्रवासियों को समायोजित करने की दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हमें अपने प्रदेश लौटने वाले प्रवासियों की बड़ी संख्या से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक उपाय की आवश्यकता है क्योंकि वे वर्तमान स्थिति के कारण शहरों में जल्दी वापस नहीं आना चाहेंगे। इस स्थिति में बिहार तथा उत्तर प्रदेश की स्थिति सर्वाधिक सुभेद्य है।
  • अल्पकालीन उपाय लंबे समय तक मदद नहीं कर सकते हैं। कृषि क्षेत्र की क्षमता का पूरी तरह लाभ उठाने और हमारी मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने के लिए हमें अपने किसानों को अहमियत देने की जरूरत है- जो हर किसी को भोजन प्रदान करने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
  • शहरो से अवांछित भीड़ हटाने , अनैक्षिक प्रवासन को रोकने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है। ऐसे में कृषि के साथ साथ अन्य क्षेत्रो में भी कार्य करना आवश्यक होगा। जिस प्रकार सरकार में पूर्व में कई योजनाओ यथा दीं दयाल ग्रामीण सड़क योजना को मनरेगा से जोड़कर ग्रामीण श्रम को राष्ट्र के लिए उपयोगी बनया है उस प्रकार के अन्य पहले की आवश्यकता है यदि हम इस चुनौती का उपयोग अपनी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक रचनात्मक अवसर के रूप में करते हैं तो प्रगति की अपार संभावनाएं हैं।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 तथा 3

  • शासन तथा अर्थव्यवस्था

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • प्रवासी श्रमिकों की स्थिति में सुधार हेतु ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार अनिवार्य हो गया है। उन उपायों पर चर्चा करें जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ साथ प्रवासी श्रमिकों की स्थिति में सुधार करेंगे ?