लिपुलेख : भारत द्वारा सड़क चौड़ीकरण पर नेपाल की आपत्ति - समसामयिकी लेख

प्रासंगिकता / पाठ्यक्रम से सम्बद्धता की वर्ड्स -: मानसरोवर यात्रा, भारत-नेपाल मैत्री संधि 1950, सुगौली की संधि 1816, नेपाल के साथ नदी सीमा, लिपुलेख दर्रा

संदर्भ

हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा एक घोषणा की गई थी जिसके अनुसार भारत उत्तराखंड के लिपुलेख में बनी सड़को को चौड़ा करने का कार्य कर रहा था। भारत के इस कदम पर नेपाल द्वारा आपत्ति दर्ज करते हुए यह कहा गया है कि काली नदी के पूर्व में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी सहित क्षेत्र, नेपाल का एक अभिन्न अंग हैं और भारत के द्वारा इस क्षेत्र में सड़कों के किसी भी निर्माण या विस्तार को रोका जाना चाहिए।

लिपुलेख दर्रा कहाँ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • लिपुलेख कालापानी घाटी के ठीक ऊपर स्थित है तथा यह भारत, नेपाल और चीन के बीच एक ट्राई -जंक्शन बनाता है और इसका उपयोग सदियों से हिंदू और बौद्ध तीर्थयात्रियों और पर्यटकों द्वारा कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने के लिए किया जाता है।
  • नेपाल द्वारा इस दर्रे का उपयोग कभी नहीं किया गया। भारत और चीन द्वारा 1954 में हस्ताक्षरित एक समझौते के अनुसार इसका उपयोग मुख्यतः व्यापार और पारगमन के लिए किया गया था। इस समझौते के तहत दोनों देशों के व्यापारी और तीर्थयात्री लिपुलेख से यात्रा कर सकते हैं।
  • लिपुलेख रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निकट है तथा यह चीन के साथ सशस्त्र संघर्ष में चिंता का विषय हो सकता है।
  • 1950 के दशक के मध्य में चीनी सेना द्वारा तिब्बत पर कब्जा करने के साथ कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा रोकी गए थी। इसके साथ भारत ने 1959 में लिपुलेख दर्रे पर सैनिको को तैनात किया था ।

क्या आप जानते हैं?

  • 1954 में, भारत और चीन ने एक व्यापार संधि पर हस्ताक्षर किया गया। इस संधि के अनुसार लिपुलेख दर्रे को भारतीय प्रवेश द्वार के रूप में स्वीकार किया गया।
  • 1962 में, भारत ने चीनी घुसपैठ के कारण लिपुलेख दर्रे को बंद कर दिया था परन्तु लिपुलेख को बंद किये जाने से नेपाल द्वारा की गई आपत्ति का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

दारचुला-लिपुलेख रोड

  • दारचुला-लिपुलेख सड़क पिथौरागढ़-तवाघाट-घाटीबागढ़ सड़क का विस्तार है।
  • यह घाटियाबागढ़ से निकलती है और कैलाश मानसरोवर के प्रवेश द्वार लिपुलेख दर्रे पर समाप्त होती है।
  • इसकी लम्बाई 80 किमी है तथा यह सड़क 6000 से 17.060 की ऊंचाई तक विस्तृत है।
  • नेपाल ने यह कहा गया है कि यह सड़क उसके क्षेत्र से होकर गुजरती है।

लिपुलेख में सड़क चौड़ीकरण का महत्व :-

  • यह सड़क "रणनीतिक, धार्मिक तथा व्यापारिक " कारणों से महत्वपूर्ण है।
  • कैलाश मासरोवर यात्रा के लिए महत्वपूर्ण :- इस परियोजना के पूरा होने के साथ, कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्रियों के यात्रा जोखिम को कम किया जा सकेगा। इससे यात्रा में लगने वाले समय में लगभग 6 दिनों की कमी आएगी।
  • सरकार ने यह बताया है कि इस मार्ग के प्रयोग के बाद अन्य वैकल्पिक मार्गो (सिक्किम में नाथू ला सीमा के माध्यम से और दूसरा नेपाल के माध्यम से) की आवश्यकता नहीं होगी। इस मार्ग के बाद 84% यात्रा भारतीय क्षेत्र तथा 16 % यात्रा चीनी क्षेत्र में होगी (इस मार्ग के अतिरिक्त अन्य में 20% यात्रा भारतीय क्षेत्र तथा 80 % यात्रा चीनी क्षेत्र में होती थी)
  • इस सड़क के निर्माण से दिल्ली से लिपुलेख की दूरी 2 दिन में तय की जा सकेगी।
  • नई सड़क के निर्माण से प्रतिवर्ष जून और सितंबर के बीच लिपुलेख दर्रे पर भारत-चीन सीमा व्यापार के लिए भारतीय व्यापारियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

कालापानी क्षेत्र का स्थान

  • यह कैलाश मानसरोवर मार्ग पर स्थित है। यह उत्तर में चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और पूर्व और दक्षिण में नेपाल के साथ एक सीमा साझा करता है।
  • यह क्षेत्र लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी के बीच केक के टुकड़े जैसा दिखता है।
  • यह क्षेत्र भारत के नियंत्रण में है परन्तु नेपाल ऐतिहासिक और कार्टोग्राफिक कारणों से इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है।
  • यह क्षेत्र नेपाल और भारत के बीच सबसे बड़े क्षेत्रीय विवाद का कारण है। इस क्षेत्र में उच्च हिमालय की लगभग 37,000 हेक्टेयर भूमि सम्मिलित है।

सुगौली संधि (1816) तथा उसके बाद सम्बन्ध

  • गोरखा युद्ध/एंग्लो-नेपाल युद्ध (1814-16) के बाद काठमांडू के गोरखा शासकों और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच सुगौली की संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • सुगौली संधि में काली नदी को भारत तथा नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में निर्धारित किया गया ।
  • 1860 के दशक में अंग्रेजों ने अपने सैन्य अड्डे को कालापानी में स्थानांतरित कर दिया, जो काली नदी के स्रोत अत्यंत निकट था। यह स्थिति 1947 तक बनी रही। इसी बीच 1923 में एक बार फिर नेपाल और ब्रिटिश भारत के बीच एक दूसरी संधि द्वारा सुगौली संधि की शर्तों को दोहराया गया ।
  • भारत और नेपाल ने उत्तर-औपनिवेशिक युग में प्राचीन संबंधों को औपचारिक रूप देने के लिए 1950 में एक मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किया । नेपाल दशकों से भारत से अधिक जुड़ा हुआ था तथा 1950-51 में तिब्बत पर चीन के अधिकार के बाद इस क्षेत्र की सुरक्षा का दायित्व भारत पर छोड़ दिया गया था।

कालापानी विवाद के कारण

  • काली नदी के स्रोत से संबंधित अलग-अलग विचारों के कारण भारत और नेपालियों द्वारा कालापानी क्षेत्र अलग अलग दावे किये जाते हैं जो प्रतिद्वंदिता का कारण हैं।
  • दोनों पक्षों के पास अपनी स्थिति के प्रमाण के रूप में अलग -अलग ब्रिटिश-युगीन के नक्शे हैं।
  • ब्रिटिश सर्वेक्षकों के अनुसार कालापानी नदी का स्रोत सीमा निर्धारण करता है परन्तु यह नदी अपनी धारा परिवर्तित करती है जिसके कारण स्रोत की जानकारी में विसंगति उत्पन्न होती है। दोनों देशो ने अपने अपने दावों के अनुसार मानचित्रो को तैयार किया है।
  • नेपाल यह कहना है कि कालापानी नदी लिपुलेख के उत्तर-पश्चिम में लिंपियाधुरा में एक धारा से निकलती है। कालापानी, लिंपियाधुरा, और लिपुलेख, उस धारा के पूर्व में धारचूला जिले में गिरते हैं जो नेपाल के सुदूर पश्चिम प्रांत का एक भाग है।
  • भारत का यह कहना है कि भारत की सीमा कालापानी नदी से आरम्भ होती है तथा भारत अपनी सीमा उस स्थान से मानता है जहाँ से नदी आरम्भ होती है। भारत का तर्क है कि यही नदी कालापानी के समीप काली नदी के नाम से जानी जाती है।
  • भारत यह भी मानता है कि यह नदी काली दर्रे के नीचे के झरनों से निकलती है तथा भारत का यह भी मानना है कि यद्यपि संधि इन झरनों के उत्तर के क्षेत्र का सीमांकन नहीं करती है, लेकिन 19वीं शताब्दी में वापस जाने वाले प्रशासनिक और राजस्व रिकॉर्ड से पता चलता है कि कालापानी भारतीय सीमा में पिथौरागढ़ जिले (वर्तमान में उत्तराखंड में स्थित ) के भाग के रूप में था।

क्षेत्र की वर्तमान स्थिति :-

  • अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बाद , भारत ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत 1950 के दशक में कालापानी में एक पुलिस चौकी का निर्माण किया ।
  • 1979-80 से, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) क्षेत्रीय सीमाओं की निगरानी कर रही है।
  • भारत अपराधियों के भागने तथा नेपाल से अवैध सीमा पार गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए यहाँ एक सख्त सीमा व्यवस्था बनाए रखता है।

भारत और नेपाल के बीच कालापानी पर विवाद :- हाल की घटनाएं

  • नवंबर 2019 में जब भारत द्वारा नव निर्मित केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को दिखाते हुए एक संशोधित राजनीतिक मानचित्र प्रकाशित किया गया। इस मानचित्र में कालापानी को उसकी वास्तविक स्थिति अर्थात उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के सबसे पूर्वी कोने पर दिखाया गया था। इस मानचित्रण के साथ ही नेपाल तथा भारत के बीच विवाद पुनः आरम्भ हो गए।
  • भारत के नए राजनीतिक मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर अन्य सभी सीमाएं यथावत थीं जैसा 1947 से अबतक दिखाया गया था।
  • नेपाल ने लिपुलेख दर्रे, लिंपियाधुरा दर्रे , कालापानी के साथ-साथ गुंजी, नबी और कुटी गांवों पर दावा करते हुए भारत के नवीन मानचित्र पर आपत्ति जताई थी ।
  • भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपने क्षेत्र के अभिन्न अंग के रूप में दावा करते हैं। भारत इसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के हिस्से के रूप में बताता है वहीं नेपाल इसे धारचूला जिले का अंग मानता है।
  • इसी दौरान भारत के द्वारा दारचुला-लिपुलेख दर्रा लिंक रोड का उद्घाटन किया गया। यह मार्ग विवादित कालापानी क्षेत्र से गुजरता है।
  • 2020 में नेपाल ने एक नया राजनीतिक नक्शा जारी किया जो उत्तराखंड के कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल का अंग बताया । यह नवीन मानचित्र नेपाल की संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस नवीन मानचित्र में सुस्ता (पश्चिम चंपारण जिला, बिहार) के क्षेत्र को भी नोट किया जा सकता है।

क्या आप जानते हैं?

वर्तमान में भारत -नेपाल के मध्य सीमा विवाद निम्न क्षेत्रो -

  • कालापानी - लिंपियाधुरा - लिपुलेख ट्राई जंक्शन पर भारत-नेपाल और चीन के मध्य
  • सुस्ता क्षेत्र (पश्चिम चंपारण जिला, बिहार)।

लिपुलेख दर्रे को 1992 में व्यापारिक उद्देश्यों के लिए खोला गया था।

भारत और चीन के बीच लिपुलेख समझौता

  • 2015 में भारत और चीन के बीच लिपुलेख समझौते द्वारा भारत से मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों को अनुमति दी गई।
  • इस समझौते से पूर्व भारत अथवा चीन द्वारा नेपाल से किसी भी प्रकार का परामर्श नहीं किया गया। इस समझौते के बाद तिब्बत में तीर्थयात्रा और व्यापार में वृद्धि भी हुई।
  • इसका अर्थ यह है कि 2015 तक चीन लिपुलेख को भारत का भाग मान रहा था।

निष्कर्ष

यद्यपि भारत-नेपाल सीमा पर भारत सरकार की स्थिति सर्वविदित, सुसंगत और स्पष्ट है फिर भी घनिष्ठ पड़ोसियों के रूप में, भारत और नेपाल मित्रता और सहयोग का एक अनूठे सम्बन्ध( जिसकी विशेषताएं खुली सीमाएँ , घनिष्ठता ,लोगों के बीच दयालुता तथा संस्कृति संपर्क है ) को ध्यान में रखते हुए , सीमा विवाद को कूटनीति और बातचीत के माध्यम से हल करने का प्रयास करना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • भारत और उसके पड़ोसी देश

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  • नेपाल द्वारा हाल ही में उठाया गया कालापानी क्षेत्र का मुद्दा इतिहास के परीक्षण में सफल नहीं होगा । सिद्ध करें (150 शब्द/10 अंक)