उद्योग 4.0 तथा विश्व व्यवस्था - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • विश्व अत्यंत तीव्रता से औद्योगिक क्रांति के चतुर्थ चरण में प्रवेश कर रहा है। यह परिवर्तन वर्तमान वैश्विक व्यवस्था के परिवर्तन का कारक सिद्ध होगा।

परिचय :-

  • उद्योग 4.0 विनिर्माण / उत्पादन और संबंधित उद्योगों और मूल्य निर्माण प्रक्रियाओं का डिजिटल परिवर्तन है। उद्योग 4.0 का उपयोग चौथी औद्योगिक क्रांति के साथ किया जाता है तथा यह औद्योगिक एक नए चरण का प्रतिनिधित्व कर औद्योगिक मूल्य श्रृंखला को नियंत्रित करता है। साइबर-फिजिकल सिस्टम उद्योग 4.0 (जैसे, स्मार्ट मशीनें) का आधार बनाते हैं। इसमें आधुनिक नियंत्रण प्रणालियों का उपयोग होता है सॉफ्टवेयर सिस्टम एम्बेडेड होते हैं और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) के माध्यम से कनेक्ट होते हैं। इंटरनेट के द्वारा उत्पादों और उत्पादन के साधनों को नेटवर्क मिलता है जिससे वे 'संचार' कर सकते हैं, जिससे उत्पादन के नए तरीके, मूल्य निर्माण और वास्तविक समय का अनुकूलन हो सकता है। साइबर-फिजिकल सिस्टम स्मार्ट कारखानों के लिए आवश्यक क्षमताओं का निर्माण करते हैं। ये वही क्षमताएं हैं जिन्हें हम इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे रिमोट मॉनिटरिंग या ट्रैक एंड ट्रेस के नाम से जानते हैं इस प्रकार उद्योग 4.0 मशीन लर्निंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता को संदर्भित करता है।

चतुर्थ औद्योगिक क्रांति के स्तम्भ :-

  • यह मुख्य रूप से इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के उपयोग के माध्यम से कारखानों के डिजिटलीकरण या स्वचालन पर आधारित है। इसके अलावा, इसे साइबर-भौतिक प्रणालियों के साथ जोड़ा जाता है। ये सिस्टम स्वायत्त प्रकार के सिस्टम होंगे, जिसमें स्वयं निर्णय लेने की क्षमता होगी,तथा इनमे मशीन लर्निंग को लागू करना होगा इसमें वास्तविक समय में डेटा भी एकत्र करेगा, जिसका विश्लेषण और क्लाउड में सहेजा जाएगा।

उद्योग 4.0 निम्न आधारों पर निर्भर होगा

  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT),
  • बिग डेटा और डेटा एनालिटिक्स,
  • संवर्धित वास्तविकता (वास्तविक दुनिया का एक आभासी प्रतिनिधित्व),
  • साइबर स्पेस,
  • सहयोगी रोबोट,
  • एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग,
  • क्लाउड कंप्यूटिंग,
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,
  • 5G नेटवर्क।

औद्योगिक क्रांति 4.0 राज्यों और विश्व व्यवस्था की शक्ति को कैसे प्रभावित कर सकती है ?

  • यद्यपि राज्यों की शक्ति अवधारणा को परिभाषित करने के लिए एक बहुत ही जटिल और कठिन है, लेकिन कारकों की एक उच्च संख्या से प्रभावित होकर एक सूत्र की स्थापना की गई है P = (C + E + M ) x (S + W )
  • P - राज्य शक्ति ;
  • C - जनसंख्या, संसाधनों और क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण द्रव्यमान है;
  • E - आर्थिक क्षमता
  • M - सैन्य क्षमता
  • S - राज्य का रणनीतिक उद्देश्य
  • W -राष्ट्रीय रणनीतियों को आगे बढ़ाने की इच्छाशक्ति / दृढ़ संकल्प अर्थात किसी राज्य की शक्ति यह दर्शाती है कि वह राज्य अपने मूर्त संसाधनों अर्थात जनसँख्या , सैन्य क्षमता तथा आर्थिक क्षमता का किस रणनीति तथा इक्षाशक्ति के साथ प्रयोग करता है। उपरोक्त सूत्र को देखते हुए यह स्पष्ट है कि औद्योगिक क्रांति 4.0 मूर्त और अमूर्त तत्वों दोनों को प्रभावित करेगी। प्रासंगिक स्रोतों के व्यापक शोध के आधार पर यह भी कहा जा सकता है कि 4 वीं औद्योगिक क्रांति इन कारको को पहले से ही प्रभावित कर रही है भविष्य में इनका प्रभाव बढ़ेगा।

कारको के यथेष्ट उपयोग के तरीके

  • कोई देश अपने राज्य संसाधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, ज्ञान) का उपयोग कैसे करेगा तथा उस देश के द्वारा किन संसाधनों का उपयोग किया जाता है
  • चतुर्थ औद्योगिक क्रांति की संभावनाओं को भुनाने के लिए राज्य की जनसँख्या किस प्रकार शिक्षित होते हैं, तथा उनके पास श्रम को प्रशिक्षित और उपयोग करने की कौन सी रणनीति है।
  • संसाधनों को आर्थिक और सैन्य संसाधनों में बदलने की राज्यों की क्षमता, जिसमें बाहरी स्थान पर आर्थिक और सैन्य गतिविधियों का विस्तार भी शामिल है;
  • विश्व व्यवस्था की नई स्थिति में लाभकारी तरीके से भाग लेने के लिए कूटनीति और विदेशी संबंधों का उपयोग करने की दक्षता और प्रभावशीलता
  • नेतृत्वकर्ताओं की निर्णय क्षमता तथा लोगों के व्यवहार को प्रभावित करने के बिंदु तक सूचना उत्पन्न और प्रसारित करने की क्षमता।

उद्योग 4 .0 तथा राज्य शक्ति के सूत्र के आधार पर विश्व के विभिन्न देशों की स्थिति :-

  • इस समय विश्व परिवर्तित हो चुका है। जिस प्रकार प्रथम औद्योगिक क्रांति जो इंग्लैंड में हुई थी (कारखानों तथा मशीन से उत्पादन का प्रारम्भ ) अथवा दूसरी औद्योगिक क्रांति जो अमेरिकी नेतृत्व में आगे बढ़ी ( नवीन ऊर्जा का प्रयोग ) या तीसरी औद्योगिक क्रांति ( कम्प्यूटर का आविर्भाव ) के समय विश्व के शक्ति केन्द्रो की संख्या कम थी। परन्तु बढ़ती प्रतिस्पर्धा , बढ़ती तकनीक , बढ़ता उपभोक्तावाद के कारण यह स्थिति बदल चुकी है।
  • विश्व के पटल से अमेरिका , ब्रिटेन का एकाधिपत्यता समाप्त हो चुकी है तथा भारत , चीन ,दक्षिण कोरिया जैसे देश आगे आ चुके हैं।
  • वर्तमान में विश्व संक्रमण काल के दौर से गुज़र रहा है। यह विश्व न ही 1945-1991 के दौर की तरह द्विध्रुवीय है तथा न ही अमेरिका द्वारा नियंत्रित विश्व। अब विश्व में अमेरिका , रूस , चीन , भारत , यूरोपियन संघ जैसे कई शक्ति केंद्र स्थापित हो चुके हैं। 2008 की मंदी के उपरांत संरक्षणवाद की बाढ़ ने कई परिवर्तनों को जन्म दे दिया है। संरक्षण वाद से प्रेरित होकर जहाँ अमेरिका विश्व के अन्य देशो , संस्थाओं से अपने सहायता के साधनो को वापस कर रहा है वहीँ चीन का आईएमएफ , विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे संस्थाओं में दान का प्रतिशत बढ़ रहा है।
  • तकनीकियों के विषय में जहाँ चीन ,दक्षिण कोरिया जैसे देश अग्रणी हो रहे हैं वहीँ पुरानी शक्तियां यथा फ्रांस ,ब्रिटेन अब पिछड़ रहे हैं। भारत ने अब अर्थव्यवस्था के मामले में ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है तथा अंतरिक्ष की भी महान शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है।
  • इस परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में सुधार की मांग निरंतर बढ़ रही है। जो विश्व व्यवस्था को परिवर्तित करने के सन्दर्भ में है।
  • कई विषेशज्ञों का यह मानना है कि चतुर्थ औद्योगिक क्रांति का केंद्र चीन होगा। ऐसी स्थिति में चतुर्थ औद्योगिक क्रांति में विश्व व्यवस्था को परिवर्तित करने की क्षमता है भारत तथा औद्योगिक क्रांति 4.0 सम्पूर्ण विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में एक तीव्र तकनीकी बदलाव हो रहा है । उन्नत विनिर्माण तकनीकों को समझने और तथा स्वीकारने की आवश्यकता है यदि करने में भारत असफल रहा तो भारत का जनसांख्यिकीय वरदान जनसांख्यिकीय अभिशाप में परिवर्तित हो जाएगा। वर्तमान समय में, उद्योग 4.0 की विभिन्न स्तरों पर बात की जाती है।
  • “मेक इन इंडिया” पहल के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र में भारत सरकार ने उद्योग से काफी ध्यान आकर्षित किया है भारत द्वारा उन्नत विनिर्माण के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार कर रहा है, जो विनिर्माण उत्पादन के योगदान को बढ़ाने के अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक होगा। 'उद्योग 4.0' की शुरुआत के लिए रूपरेखा पर विचार किया जा रहा है। जिसमे आधुनिक सामग्री सहित उन्नत सामग्री, उन्नत रोबोटिक्स और 3 डी प्रिंटिंग सहित अन्य चीजों के लिए जबरदस्त प्रोत्साहन होगा।
  • उद्योग 4.0 में विनिर्माण प्रौद्योगिकी, साइबर भौतिक प्रणाली, चीजों के इंटरनेट, क्लाउड कंप्यूटिंग और बहुत कुछ में स्वचालन और डेटा विनिमय के आगामी रुझान सहित इसके कई पहलू हैं। उद्योग के संयोजन के लिए नया मूलमंत्र और मौजूदा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) प्रौद्योगिकी , पर देश में काम किया जा रहा है ।
  • सूचना प्रौद्योगिकी में भारत की ताकत और आईटी पेशेवरों के एक बड़े कार्यबल पर बैंकिंग, उद्योग 4.0 के माध्यम से विनिर्माण की परिवर्तनकारी यात्रा देश में पहले ही शुरू हो चुकी है। भारत सरकार के स्मार्ट सिटीज मिशन ’के तहत, पूरे भारत में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की परियोजनाओं को उद्योग 4.0 पर्यावरण के अग्रदूत के रूप में देखा जा रहा है।
  • इसके अतिरिक्त, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बोइंग कंपनी बॉश से बीज फंडिंग के साथ बेंगलुरु में भारत का पहला स्मार्ट कारखाना बना रहा है, एक जर्मन ऑटो पार्ट्स निर्माता 2018.3 तक भारत में अपने 15 केंद्रों पर स्मार्ट विनिर्माण का कार्यान्वयन शुरू कर देगा।
  • विशाखापत्तनम में पार्टनरशिप समिट 2017 ’में, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (DIPP) के सचिव, ने आद्योगिक क्रांति 4.0 पर विशेष ध्यान दिया है

निष्कर्ष :-

  • निस्संदेह वर्तमान वैश्विक व्यवस्था को परिवर्तित करने में आद्योगिक क्रांति 4.0 एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसे में विश्व नेतृत्वकर्ता बनने हेतु भारत को भी प्रयासरत होने की आवश्यकता है। गौरतलब यह भी है कि औद्योगिक क्रांति 4.0 के नैतिक पहलू पर अभी तक संशय है। वैश्विक समुदाय को औद्योगिक क्रांति की रणनीतियों को इस प्रकार बनाना होगा जिससे मानव कल्याण के लक्ष्य को पूर्ण किया जा सके।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 तथा 3

  • अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • औद्योगिक क्रांति का चतुर्थ चरण वैश्विक व्यवस्था को परिवर्तित करने में किस प्रकार भूमिका निभाएगा ? चर्चा करें ?