भारत तथा एक सशक्त दक्षेस - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • 2020 में आयोजित होने वालेदक्षेस देशो के शासनाध्यक्षों के सम्मलेन को पाकिस्तान में कराने के लिए पाकिस्तान सभी देशो से समर्थन मांग रहा है। भारत तथा पाकिस्तान का द्वन्द इस समस्या की मुख्य जड़ है।

परिचय :-

  • दक्षेश के सम्मलेन के लिए एक बार फिर भारत तथा पाकिस्तान का द्वन्द समस्या बन रहा है। अभी हाल में आयोजितदक्षेस विदेश मंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग मीटिंग में यह समस्या एक बार फिर दृष्टिगोचर हुई। जहाँ पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर की स्थिति तथा अनुच्छेद 370 के बदलाव का मुद्दा उठाया गया वहीँ भारत के विदेश मंत्री ने सीमापार आतंकवाद के सामूहिक निदान की आवश्यकता को बल दिया। पाकिस्तान द्वारादक्षेस के शासनाध्यक्षों की बैठक इस्लामाबाद में करने के लिए सभी देशो से समर्थन लिया जा रहा है , नेपाल श्रीलंका जैसे देशो ने समर्थन को स्वीकार भी कर लिया है परन्तु रणनीतिज्ञ इस मामले पर भारत की भूमिका पर संदेह कर रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार क्षेत्रीय सहयोग के महत्व को देखते हुएदक्षेस को मजबूत करने की आवश्यकता है।

सार्क के बारे में: -

  • दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका में SAARC चार्टर पर हस्ताक्षर करने के साथ हुई थी। संगठन का सचिवालय 17 जनवरी 1987 को काठमांडू में स्थापित किया गया था। SAARC सदस्य -SAARC में आठ सदस्य देश शामिल हैं: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका।

दक्षेश की अस्थिरता के कारण

  • सभी सार्क देशों के बीच भारत का 70% क्षेत्र है। पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान को छोड़कर सभी देश एक दूसरे के साथ सीमा साझा नहीं करते हैं। इससे भारत के प्रति सदस्यों के बीच विश्वास की कमी पैदा होती है। और छोटे देश भारत को संतुलित करने के लिए चीन की ओर देख रहे हैं।
  • पाकिस्तान में अधिकतम सैन्य शासन था, अफगानिस्तान तालिबानी समस्या से ग्रस्त है । नेपाल में 2006 तक राजशाही है। तथा इस समय का नेपाल माओवाद के विचारो से प्रभावित है तथा भारत में लोकतंत्र है यह समस्या भी दक्षेस की साझा विकास में बाधक है
  • भारत को छोड़कर सदस्य राज्य अभी भी आर्थिक एकीकरण और सहयोग के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। लेकिन भारत ऐसा करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं है जो इसके क्षेत्रीय विकास में बाधक है।
  • भारत के बाद पाकिस्तान इस क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा देश है। दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दे हैं जो सार्क की वृद्धि को कम करते हैं। बीआरआई
  • दक्षेश में रेल, सड़क संपर्क की कोई प्रगति नहीं जो आर्थिक सहयोग में बहुत बड़ी बाधा है। क्षेत्र का सबसे बड़ा देश भारत भी आर्थिक रूप उतना मनहीं है कि अकेले कनेक्टिविटी प्रदान कर सके
  • इसके साथ साथ सभी सार्क देशदक्षेस के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर तत्परता से सहयोग करते हैं।

दक्षेस में बढ़ता चीन :-

  • दक्षेश देशो के आपसी विश्वास घाटे के कारण चीन को दक्षिण एशिया में हस्तक्षेप का अवसर प्राप्त हो रहा है। नेपाल , पाकिस्तान , बांग्लादेश , श्रीलंका के द्विपक्षीय सम्बन्ध चीन से बहुत अच्छे हैं। अपनी वित्तीय ताकत का लाभ उठाकर चीन दक्षिण एशिया को अस्थिर कर रहा है जिसमे निस्संदेह दक्षेस का अहित है। भारत के साथ लगातार चीन का विवाद बढ़ रहा है ऐसे में भारत को सार्क को मजबूत करना आवश्यक है

वैश्विक अस्थिरता का दौर :-

  • इस समय सम्पूर्ण विश्व अस्थिर है।संयुक्त राष्ट्र , विश्व स्वास्थ्य संगठन की अस्थिरता , अमेरिका चीन में चल रहा व्यापार विवाद , मध्य एशियाई अस्थिरता , इत्यादि कारणों के परिणामो के संकटो से उत्पन्न हानि को काम करने हेतुदक्षेस के पुनुरुथान की आवश्यकता है।

वैश्विक समस्या :-

  • लगातार वैश्विक समस्याएं बढ़ रही है। कोरोना ,आतंकवाद , पर्यावरण की समस्या इत्यादि का समाधान वैश्विक होना चाहिए जिसके लिए क्षेत्रीय सहयोगो की भी आवश्यकता है। भारत द्वारा सार्क में 10 मिलियन डॉलर का कोविड इमरजेंसी फण्ड बनवाया गया है जो कि एक बेहतर कदम है।

आरसीईपी से भारत का हटना :-

  • भारत मेक इन इंडिया जैसे महत्वकांछी परियोजनाओं को लागू कर रहा है। इस दृष्टिकोण से भारत को बड़े बाजार की आवश्यकता है अभी हाल ही में भारत ने आसियान द्वारा प्रस्तावित आरसीईपी से सदस्यता को छोड़ा है ऐसे मेंदक्षेस भारत के लिए उस कमी को पूर्ण कर सकता है।

आंतरिक सुरक्षा में सहायक दक्षेस

  • हाल ही में भारत में ड्रग के मामलो की बढ़ोत्तरी देखी गई है। ड्रग मामलो का स्वर्णिम चतुर्भुज अफगानिस्तान क्षेत्र में है जहाँ से यह पाकिस्तान के रास्ते भारत में आता है। इस स्थिति में दक्षेस के द्वारा भारत इस समस्या को भी हल कर सकता है।

भारत का अफगान हित तथा दक्षेस :-

  • स्थिर तथा लोकतान्त्रिक अफगानिस्तान का भारत समर्थन करता है ऐसे में अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए भारत कोदक्षेस को मजबूत करना आवश्यक होगा।

निष्कर्ष :-

  • स्थिर दक्षिण एशिया में ही भारत का हित है चुकि भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है ऐसे में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। परन्तु आंतरिक सुरक्षा , सम्पूर्णाभूता तथा आतंकवाद की कीमत पर अन्य कार्य नहीं किये जा सकते।परन्तु भारत यदि वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकर्ता के रूप में स्वयं की भूमिका चाह रहा है तो भारत को दक्षेस को स्थिर करना होगा।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2

  • अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • अनेक समस्याओं के उपरांत भीदक्षेस में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हाल की परिश्थितियों के आधार पर भारत के लिएदक्षेस के महत्व को स्पष्ट करें ?