भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझेदारी: समय की मांग - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

संदर्भ

  • हाल ही में 2013 से निलंबित किए गए एक मुक्त व्यापार समझौते पर हुई वार्ता को पुनर्जीवित करने की एक नई पहल के रूप में भारत और यूरोपीय संघ के पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते (बीटीआईए) को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करने हेतु एक फ्उच्च स्तरीय बातचीतय् की घोषणा की।
  • इस शिखर बैठक में भारत और यूरोपीय संघ ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में सहयोग समझौते से लेकर दूरगामी महत्व के सामरिक साझेदारी हेतु 2025 तक का रोडमैप बताने वाला एक दस्तावेज जारी किया, जिसमें रक्षा और सैन्य सहयोग का दायरा बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए वार्ता प्रक्रिया स्थापित करना, सुरक्षा मसलों पर नियमित संवाद स्थापित करना, भारतीय और यूरोपीय नौसेना के बीच आपसी सहयोग बेहतर करने के लिए सहयोग और आदान-प्रदान आदि शामिल हैं।
  • भारत-यूरोपीय संघ, यूरोपीय संघ से आने वाले निवेश को बढ़ावा देने के लिए 2017 में स्थापित निवेश सुविधा तंत्र (आईएफएम) का बेहतर उपयोग करने के लिए भी सहमत हुए।

पृष्ठभूमि

  • 27 सदस्य देशों का यूरोपीय संघ अपने भारी आर्थिक विकास के अनुरूप वैश्विक स्तर पर समुचित राजनीतिक भूमिका नहीं निभा पा रहा था, परन्तु अब ब्रिटेन के यूरोपियन संघ से अलग हो जाने के बाद संघ ने विश्व के राजनयिक क्षेत्रें में अपनी हलचल कुछ बढ़ाई है और इसका इरादा भविष्य में और सक्रिय भूमिका निभाने की है। इसी संदर्भ में भारत ने भी यूरोपीय संघ के साथ तीन साल बाद विगत 15 जुलाई को 15वीं शिखर बैठक की जरूरत महसूस की।
  • गौरतलब है कि यूरोपीय संघ में तीन देश ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी सबसे प्रभावशाली रहे हैं, इसलिए वैश्विक मामलों के बारे में तीनों में आम राय और एकजुटता जरूरी थी, पर ब्रिटेन द्वारा अलग राग अलापने की वजह से साझा नीति नहीं बन पा रही थी।
  • अलबत्ता वैश्विक मामलों में यूरोपीय संघ कभी प्रभावशाली आवाज नहीं बन सका, इसलिए भारतीय सामरिक हलकों में यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों को उतनी अहमियत नहीं दी गई। यूरोपीय संघ भी भारत के प्रति अब तक इसलिए उदासीन रहा कि भारत ने मुक्त व्यापार संधि और निवेश संरक्षण संधि को हरी झंडी नहीं दी थी, पर चीन के िखलाफ यूरोप में जिस तरह भावनाएं प्रबल होने लगी हैं, वैसे में, भारत के लिए यह सुनहरा मौका है कि यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने की दिशा में कदम उठाया जाए।
  • 15 वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में घोषणाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, रणनीतिक साझेदारी के उद्देश्यों का गठन है, जो अगले पांच वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को निर्देशित करने के लिए तैयार किया गया है।

यूरोपीय संघ के बारे में

  • यूरोपीय संघ एक आर्थिक और राजनीतिक ब्लॉक के रूप में काम करता है। इनमें से 19 देश यूरो को अपनी आधिकारिक मुद्रा के रूप में उपयोग करते हैं जबकि अन्य 9 यूरोपीय संघ के सदस्य (बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम) यूरो का उपयोग नहीं करते हैं।
  • यूरोपीय संघ का यूरोपीय देशों के बीच सदियों से चली आ रही युद्ध की समाप्ति के लिए एक एकल यूरोपीय राजनीतिक इकाई बनाने की इच्छा से विकास किया गया था, जिसका समापन द्वितीय विश्व युद्ध के साथ शुरू हुआ और इसका अधिकांश भाग समाप्त हो गया।
  • यूरोपीय संघ ने कानून के एक मानकीकृत प्रणाली के माध्यम से एक आंतरिक एकल बाजार विकसित किया है, जो सभी सदस्य राज्यों पर लागू होता है, जहां सदस्य एक साथ कार्य करने के लिए सहमत हुए हैं।

भारत और यूरोपीय यूनियन

  • यूरोपीय संघ और भारत में रणनीतिक,वैचारिक और आर्थिक समानता पिछले कुछ वर्षों से पुनः दृष्टिगोचार हो रही है। उदाहारणस्वरुप दोनों का उद्देश्य रणनीतिक स्वायत्तता और उनकी वैश्विक स्थिति को बढावा देना है। रणनीतिक मूल्य शृंखलाओं में विविधता लाना भी एक सामान्य हित में शामिल है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्द्दों का निवारण करना भी आवश्यक है और यूरोपीय संघ और भारत इन प्रयासों में एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं।
  • गौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच 2000 में सामरिक साझेदारी का रिश्ता स्थापित हुआ, फिर नियमित तौर पर सालाना शिखर बैठकें होती रहीं, पर हाल में उदासीनता के कारण शिखर बैठकें नहीं हुईं, फिर भी 20 साल में दोनों के बीच 15 शिखर बैठकें हो चुकी हैं।
  • वर्तमान में एक सौ अरब यूरो के द्विपक्षीय व्यापार के साथ यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बन चुका है और अंतरिक्ष से लेकर विज्ञान-तकनीक के कई क्षेत्रें में दोनों के बीच गहरा सहयोग रहा है। साथ ही यह द्विपक्षीय व्यापार कुछ हद तक भारत के पक्ष में है।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार

  • विशुद्ध रूप से आर्थिक शर्तों पर, यूरोपीय संघ भारत का पहला व्यापारिक साझेदार है और 2018 में किए गए 67.7 बिलियन यूरो निवेश के साथ सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है, जो कुल एफडीआई प्रवाह के 22% के बराबर है। परन्तु सुधार की गुंजाइश अभी भी है, खासकर जब चीन में यूरोपीय संघ के निवेश की तुलना में, जो उसी वर्ष (2018) में 175.3 बिलियन यूरो था।
  • उन्नत व्यापारिक सहयोग यूरोपीय संघ और भारत दोनों को अपने रणनीतिक मूल्य शृंखलाओं में विविधता लाने और चीन पर आर्थिक निर्भरता को कम करने में एक दूसरे की मदद कर सकते हैं।
  • आपसी समझ को बेहतर बनाने और नवाचार और विकास के अवसर पैदा करने के लिए लोगों की गतिशीलता और कनेक्टिविटी को सुगम बनाना भी दोनों देशों के लिए बेहतरीन तरीका है।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच FTA पर समझौता

  • यूरोपीय संसद के एक नए अध्ययन में यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार समझौते के संभावित प्रभाव का आकलन किया गया है जिसके अनुसार दोनों पक्षों के लिए 8 बिलियन यूरो से 8.5 बिलियन यूरो के व्यापार में वृद्धि हुई है, साथ ही व्यापार के अधिक वृद्धि से भारत में प्रवाह की संभावना है।
  • यह अध्ययन पर्यावरणीय मानकों जैसे वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के प्रावधान पर अतिरिक्त समन्वय से संभावित लाभ को भी संदर्भित करता है।
  • जलवायु परिवर्तन पर, यूरोपीय संघ अपने नए औद्योगिक रणनीति ग्रीन डील के माध्यम से 2050 तक कार्बन-उत्सर्जन को तटस्थ बनाने के लिए अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर निर्माण कार्य कर रहा है।

भारत के लिए अवसर

  • यूरोपीय लोग भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि प्रदान करने में भारत की अहम भूमिका स्वीकार करते हैं। वे प्रौद्योगिकियों और भविष्य के मुद्दों पर एक साथ काम करने में काफी संभावनाएं देखते हैं।
  • परन्तु भारत COVID-19 के बाद यूरोप के लिए एकमात्र आर्थिक विकल्प नहीं है इसलिए, भारत को यूरोपियन स्थानांतरण कंपनियों को आकर्षित करने के लिए निम्नलििखत सुझावों पर अमल करना चाहिए:
  • ब्रॉड-आधारित व्यापार और निवेश समझौते को वापस ट्रैक पर लाना होगा।
  • एक नए निवेश समझौते को शामिल करते हुए, हमें 5 जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित उच्च-प्रौद्योगिकी सहयोग में शामिल होना होगा।
  • इसके अलावा यूरोप को भी व्यापार पर अपनी स्थिति को बदलने और सेवाओं पर भारत को समायोजित करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता होगी।

COVID-19 के कारण उभरी परिस्थितियाँ

  • COVID-19 के कारण उत्पन्न हुए संकट को यूरोपीय संघ के लिए अवसर माना गया है, ताकि इसकी कीमत साबित हो सके। इस संदर्भ में यूरोपीय आयोग द्वारा प्रस्तुत फ्अगली पीढ़ी के यूरोपीय संघ के प्रस्तावय् ने अपने साहसिक दृष्टिकोण से कई लोगों को आश्चर्यचकित किया है।
  • इसने वास्तव में एक गेम-चेंजर का कम किया है जो न केवल इसके वित्तीय निहितार्थ में है, जिससे यूरोपीय संघ को कर्ज लेने की अनुमति देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यूरोपीय संघ को बांधने वाले संबंध किसी संधियों और व्यत्तिफ़गत सदस्यों के स्वार्थ से परे है।

निष्कर्ष

  • यूरोपीय संघ के विकास की जड़ें विभाजित यूरोप के एकीकरण की तलाश में हैं, क्योंकि यहाँ लंबे समय तक अत्यधिक राष्ट्रवाद की वजह से विश्व युद्ध भी हुए हैं। हालाँकि समूह के कमजोर सदस्यों की आर्थिक स्थिति को सुधारने और लोगों के जीवन स्तर को बढ़ाने में यूरोपियन यूनियन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के साथ बहुपक्षीय संस्थानों के सतत सुधार को बढ़ावा देने के लिए यूरोपीय संघ और भारत को भी सशस्त्र बलों में शामिल होना चाहिए।
  • परन्तु अब सवाल यह है कि क्या यूरोपीय संघ और भारत वर्ष 2050 तक कार्बन-तटस्थ अर्थव्यवस्थाओं में बदलने में सफल हो सकते हैं और क्या यह निवेश दोनों पक्षों को लाभान्वित कर सकता है। इसलिए, एक मजबूत साझेदारी यूरोपीय संघ और भारत दोनों को वैश्विक निर्णय लेने में मदद करेगी। 

सामान्य अध्ययन पेपर-

  • द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/ अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और समृद्धि के अपार अवसर हैं। उल्लेख करें।