भारत में बढ़ती कैंसर की समस्या - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) -नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (NCDIR) तथा नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम ने अगस्त 2020 की रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि भारत में 2020 में कैंसर के मामलों की संख्या बढ़कर 13.9 लाख हो जायेगी ।

परिचय :-

  • भारत में कई दशकों में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी है। 2017 की एक रिपोर्ट से पता चला है कि 1990 से 2016 के बीच भारत में कैंसर का बोझ 2.6 गुना बढ़ गया और समय के साथ कैंसर के कारण होने वाली मौतों में दोगुनी वृद्धि हुई।
  • कैंसर के इन मामलों में से लगभग दो-तिहाई अपने अंतिम चरण में हैं । पुरुषों में, फेफड़े का कैंसर , ओरल कैविटी , स्टमक कैंसर सामान्य हैं जबकि महिलाओं में, स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, अंडाशय और पित्ताशय के कैंसर समान्य हैं ।

कैंसर के विषय में

  • कैंसर रोगों का एक समूह है जिसमें शरीर के भागों में आक्रमण करने या फैलने की क्षमता के साथ असामान्य कोशिका वृद्धि होती है।
  • इसके संभावित संकेतों और लक्षणों में एक गांठ, असामान्य रक्तस्राव, लंबे समय तक खांसी, अस्पष्टीकृत वजन का घटना सम्मिलित है ।हालांकि ये लक्षण कैंसर का संकेत देते हैं, परन्तु ये अन्य कारण से भी हो सकते हैं। 100 से अधिक प्रकार के कैंसर मनुष्यों को प्रभावित करते हैं।
  • तम्बाकू के उपयोग से लगभग होने वाला कैंसर लगभग 22 %से 25 % मृत्यु का कारण है।
  • 10% कैंसर की मृत्यु मोटापा, खराब आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी या शराब के अत्यधिक सेवन के कारण होते हैं। अन्य कारकों में कुछ संक्रमण यथा आयनित विकिरण और पर्यावरण प्रदूषकों के संपर्क सम्मिलित हैं ।
  • विकासशील देशों में, 15% कैंसर हेलिकोबैक्टर पाइलोरी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मानव पैपिलोमावायरस संक्रमण, एपस्टीन-बार वायरस और मानव इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) जैसे संक्रमणों के कारण होते हैं।आमतौर पर, कैंसर विकसित होने से पहले कई आनुवंशिक परिवर्तनों की आवश्यकता होती है।
  • लगभग 5-10 % कैंसर किसी व्यक्ति के माता-पिता से वंशानुगत आनुवंशिक दोष के कारण होते हैं। कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों का पता चलने के बाद बाद आमतौर पर मेडिकल इमेजिंग द्वारा जांच की जाती है और बायोप्सी द्वारा इसकी पुष्टि की जाती है।

भारत में कैंसर की स्थिति

  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में कहा कि "उच्च स्तरीय" मानव विकास सूचकांक वाले देशों की तुलना में भारतीय कैंसर रोगियों कैंसर से होने वाली मृत्युदर 20 % अधिक है
  • पैनल ने यह भी कहा है कि भारत का कैंसर देखभाल बुनियादी ढांचा "अत्यधिक अपर्याप्त" है और अधिकांश रोगियों को उपचार के लिए "हजारों किलोमीटर" यात्रा करने हेतु विवश करता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकशित विश्व कैंसर रिपोर्ट ने कहा कि 2018 में भारत में अनुमानित कैंसर की स्थिति के अनुसार, देश में 1.35 बिलियन की जनसंख्या में लगभग 1.16 मिलियन नए मामले, 2. 26 मिलियन पुराने मामले ( न्यूनतम 5 वर्ष से पुराने ) तथा लगभग 70000 मृत्यु होती है

कैंसर के प्रभाव

  • कैंसर से जीवन का नुकसान होता है और इसका सामाजिक रूप से भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • कैंसर से पीड़ित व्यक्ति मृत्यु के पूर्व अत्यंत गंभीर मनःस्थिति से गुजरता है तथा उसका सम्पूर्ण परिवार संकटो का सामना करता है।
  • इसके निदान में लगने वाला व्यय उनके बचत को प्रभावित करता है।
  • अतः कैंसर को कम करना सामाजिक और आर्थिक असमानता को संबोधित करने, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और सतत विकास को गति देने के लिए आवश्यक है ।

कैंसर का उचित निदान :-

केवल कैंसर के इलाज में निवेश करना आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प नहीं है। हमें तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है:

  • जोखिम में कमी,
  • प्रारंभिक पहचान और प्रोग्रामेटिक
  • नीतिगत समाधान।

जोखिम में कमी

  • एक अनुमान के अनुसार लगभग 50% -60% कैंसर के मामलों को ज्ञात जोखिम कारकों प्रभावी तरीके से निदान प्राप्त किया जा सकता है ।
  • बहुसांस्कृतिक दृष्टिकोण के माध्यम से सामुदायिक सशक्तीकरण जो स्वास्थ्य साक्षरता को बढ़ाने और कुछ व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी, निजी चिकित्सकों और नागरिक समाज को एक साथ लाता है,यह संभावित जोखिम को कम कर सकता है।
  • धूम्रपान न करने, स्वस्थ वजन बनाए रखने, बहुत अधिक शराब न पीने, बहुत सारी सब्जियां, फल और साबुत अनाज खाने, कुछ संक्रामक रोगों के खिलाफ टीकाकरण, बहुत अधिक संसाधित और लाल मांस नहीं खाने और धूम्रपान से बचने से कुछ कैंसर के विकास के जोखिम को कम किया जा सकता है।

प्रारम्भिक पहचान

  • कैंसर के सामाजिक कलंक बन जाने के कारण प्रारम्भ में मरीज इसे छुपाते हैं। बेहतर जागरूकता से बीमारी से जुड़े कलंक को भी रोका जा सकता है।
  • टीकाकरण तथा प्रारम्भिक जांच के माध्यम से प्रारम्भिक पहचान होनी अत्यंत आवश्यक है।

नीतिगत समाधान

  • बड़े पैमाने पर प्रभाव के लिए जनसंख्या स्वास्थ्य दृष्टिकोण भी प्रासंगिक है। प्रोग्रामेटिक और नीति-स्तरीय समाधानों को डेटा द्वारा संचालित करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के माध्यम से एकत्र की गई जानकारी का उपयोग स्क्रीनिंग, प्रारंभिक पहचान, रेफरल, उपचार और उपशामक देखभाल सेवाओं की बेहतर पहुंच की वकालत करने के लिए वर्षों से प्रभावी रूप से किया गया है।
  • आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत, स्वच्छ भारत अभियान, पोशन अभियान और प्रधानमंत्री भारतीय जनधन योजना जैसे सरकारी कार्यक्रम और एफएसएसएआई की नई लेबलिंग और प्रदर्शन विनियम और दवा मूल्य नियंत्रण जैसी पहल अंतर-क्षेत्रीय और बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
  • अन्य पहल जैसे कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम और कैंसर के रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक भी प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
  • देश में कैंसर अनुसंधान को बेहतर करने की आवश्यकता है जो कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण पर हमारे प्रयासों का मार्गदर्शन करने के लिए महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य नीति तथा अन्य योजनाओं में कैंसर हेतु लक्षित उपाय करना आवश्यक है।

निष्कर्ष :-

  • भारत 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों के हिस्से के रूप में कैंसर से होने वाली मृत्यु में एक तिहाई की कमी लाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसने काफी प्रगति की है। भारत में कुछ क्षेत्रों में सुधार हुआ है, जैसे कि व्यक्तिगत स्वच्छता, जो कैंसर के दूर करने में सहायक होगा ।
    हमारा दृष्टिकोण केवल निदान, उपचार के तौर-तरीकों और टीकों पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए, बल्कि समान समाधानों के लिए सोच और कार्रवाई में समावेशिता पर जोर देना चाहिए जो देश में सभी सामाजिक आर्थिक स्तरों पर कैंसर के प्रभाव को काफी कम कर सकता है।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • कैंसर न केवल मनुष्य के जीवन बल्कि सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति को भी क्षतिग्रस्त करता है। कैंसर के उचित निदान हेतु उठाये जा सकने वाले कदमो पर चर्चा करें ?