विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • हाल ही में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया है । यह विधेयक विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम 2010 में संशोधन करता है।

परिचय :-

  • यह अधिनियम व्यक्तियों, संघों और कंपनियों के लिए विदेशी योगदान की प्राप्ति तथा उपयोगिता को नियंत्रित करता है। । विदेशी योगदान से तात्पर्य किसी विदेशी निकाय द्वारा मुद्रा, सुरक्षा या लेख (निर्दिष्ट मूल्य से परे) का दान या हस्तांतरण है। गैर सरकारी संगठनों में बढ़ता हुआ विदेशी योगदान देश की नीतियों को प्रभावित करता है। विदेशी योगदान से संचालित संस्थाएं विदेशी राष्ट्रों के निर्देश पर भारत में नीतियों को प्रभावित करते हुए दबाव समूह का कार्य करती हैं। ऐसी स्थिति में विदेशी वित्तीय योगदान को विनियमित करना अनिवार्य है।

संशोधन के मुख्य प्रावधान :-

  • संशोधन अधिनियम के द्वारा , कुछ व्यक्तियों को किसी भी विदेशी योगदान को स्वीकार करने के लिए निषेध कर दिया गया है। जिसमे चुनावी उम्मीदवार ,समाचार पत्रों के संपादक या प्रकाशक, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी, किसी भी विधायिका के सदस्य, तथा राजनीतिक दल सम्मिलित हैं। विधेयक इस सूची मेंलोक सेवकों (भारतीय दंड संहिता के तहत परिभाषित) को जोड़ता है। लोक सेवक में कोई भी व्यक्ति शामिल होता है जो सरकार की सेवा में होता है, तथा सरकार द्वारा उसे किसी भी सार्वजनिक कर्तव्य के प्रदर्शन के लिए पारिश्रमिक दिया जाता है।
  • अधिनियम के तहत, विदेशी योगदान को किसी अन्य व्यक्ति को तब तक स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है जब तक कि ऐसे व्यक्ति को विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिए पंजीकृत नहीं किया जाता है।यदि व्यक्ति प्राप्तकर्ता के रूप में पंजीकृत नहीं है तो उसे केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी। अधिनियम के तहत 'व्यक्ति' शब्द में एक व्यक्ति, एक एसोसिएशन या एक पंजीकृत कंपनी शामिल है।
  • अधिनियम में कहा गया है कि पंजीकृत होने या अनुमति प्राप्त करने के उपरान्त किसी भी व्यक्ति को पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, किसी संस्था को अपने पदाधिकारियों, निदेशकों या प्रमुख अधिकारियों की आधार संख्या प्रदान करनी होगी । विदेशी निकाय होने ही स्थिति में उन्हें पहचान के लिए पासपोर्ट या ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड की एक प्रति प्रदान करनी होगी।
  • अधिनियम के अंतर्गत एक पंजीकृत व्यक्ति को केवल उनके द्वारा निर्दिष्ट एक निर्धारित बैंक की एक शाखा में विदेशी योगदान को स्वीकार करना होगा। हालांकि, वे योगदान के उपयोग के लिए अन्य बैंकों में अधिक खाते खोल सकते हैं। विधेयक में यह कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित भारतीय स्टेट बैंक, नई दिल्ली की ऐसी शाखा में बैंक द्वारा "एफसीआरए खाता" के रूप में निर्दिष्ट खाते में केवल विदेशी अंशदान प्राप्त किया जाना चाहिए। विदेशी योगदान के अलावा कोई धन इस खाते में प्राप्त या जमा नहीं किया जाना चाहिए। प्राप्त योगदान को रखने या उपयोग करने के लिए व्यक्ति अपनी पसंद के किसी भी अनुसूचित बैंक में एक और एफसीआरए खाता खोल सकता है।
  • यदि किसी व्यक्ति ने (जिसने विदेशी अंशदान प्राप्त करने की अर्हता प्राप्त की हो ) नियमो का उलंघन किया हो तो केंद्र सरकार उनके पंजीकरण को रद्द करने की क्षमता रखती है।
  • अधिनियम के तहत, हर व्यक्ति को, जिसे पंजीकरण का प्रमाण पत्र दिया गया है,पंजीकरण समाप्ति के छह महीने के भीतर प्रमाणपत्र को नवीनीकृत करना होगा। विधेयक उपबंध करता है कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रमाण पत्र को नवीनीकृत करने से पहले एक जांच का आयोजन कर सकती है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति धार्मिक रूपांतरण में, धन के विचलन या धन के दुरुपयोग के लिए दोषी नहीं पाया गया हो ।
  • अधिनियम के अंतर्गत , विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले व्यक्ति को केवल उसी उद्देश्य के लिए इसका उपयोग करना चाहिए जिसके लिए योगदान प्राप्त होता है।उस उद्देश्य को प्राप्त करने के निम्मित निकाय उस राशि के 20% (संशोधन पूर्व 50%) का उपयोग ही प्रशासनिक व्यय हेतु कर सकता है।
  • विधेयक केंद्र सरकार को एक व्यक्ति को अपने पंजीकरण प्रमाण पत्र को समर्पण करने की अनुमति देने के लिए एक प्रावधान जोड़ता है।
  • अधिनियम के तहत, सरकार किसी व्यक्ति के पंजीकरण को 180 दिनों से अधिक की अवधि के लिए निलंबित कर सकती है। इस तरह के निलंबन को अतिरिक्त 180 दिन तक बढ़ाया जा सकता है

संशोधन के संदर्भ में विभिन्न हितधारकों के वक्तव्य

विपक्षी दल :-

  • विपक्षी दलों ने प्रस्तावित संशोधन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संशोधन "सरकार के खिलाफ बोलने वालों को निशाना बनाने" के लिए एक साधन हैं जो राजनैतिक दुश्मनी से प्रेरित है
  • विधेयक में एक खंड में कहा गया है कि यह केंद्र सरकार किसी व्यक्ति को जांच लंबित होने की स्थिति में भी विदेशी योगदान पर रोक लगा सकती है "इस खंड पर विपक्षी दलों ने कहा है कि यह सरकार को इस सन्दर्भ में असीमित शक्ति दे देगी।

नागरिक समाज

  • कई नागरिक समाज के नेताओं और गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं यथा नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया के कार्यकारी निदेशक ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधनों को "सिविल समाज घातक " बताया है
  • यह आशंका व्यक्त की गई कि जो संगठन सरकारी नीतियों का विरोध कर रहे हैं उन्हें सरकार का कोपभाजन बनना होगा। संशोधन विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा किया जा रहा "सामुदायिक कार्य पर विनाशकारी प्रभाव" डालेगा ।
  • मानवाधिकार संगठन पीपुल्स वॉच के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक कहा कि इस खंड ने सरकार के "दोहरे मानकों" को उजागर किया है।
  • एकतरफ “यदि राजनीतिक दलों को विदेशी दान की अनुमति है, अगर पीएम-केयर्स फण्ड विदेशी दान प्राप्त कर सकते हैं, तो सरकार कैसे कह सकती है कि एक सार्वजनिक सेवक विदेशी योगदान का उपयोग नहीं कर सकता है? यह सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है

सरकार का तर्क

  • सरकार ने कहा है कि कई सस्थान विदेशी योगदान के माध्यम से काले धन की राउंड ट्रिपिंग कर मनी लॉन्ड्रिंग में सहायक होते थे। यह संशोधन उन गतिविधियों पर अंकुश लगाएगा।
  • यह विदेश द्वारा निर्देशित होकर राष्ट्र की नीतियों में हस्तछेप करने की प्रवृत्ति में अंकुश लगाएगा।
  • इससे विदेशी धन नियंत्रित होगा जिससे इन भ्रष्टाचार की गतिविधियां रुक सकें तथा जिन उदेश्यों को दिखाकर धन लिया जा रहा उन उदेश्यों की पूर्ती संभव हो सके।

निष्कर्ष :

  • यह सत्य है कि कई संस्थान विदेशी धन प्राप्त कर सरकार पर दबाव समूह का कार्य कर रहे थे जिन्हे नियंत्रित करना आवश्यक है। किन्तु राजनैतिक दुश्मनी इसका आधार नहीं हो सकती। जनादेश प्राप्त सरकार की मंशा पर सभी को विश्वास रखना होगा। परन्तु सरकार को भी आवश्यक है कि वह बिभिन्न हितधारकों के पास विधयेक के प्रावधानों को भेजकर उचित संशोधन की मांग करे तथा इसे पब्लिक फोरम पर रखा जाए। जिससे लोकतंत्र के तत्वार्थ की प्राप्ति हो सके।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • शासन

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • विदेशी अंशदान (विनयमन ) संशोधन विधेयक 2020 के प्रावधान की उपयोगिता पर चर्चा करें ? बिभिन्न हितधारकों पर इसके प्रभावों की समालोचनात्मक विवेचना करें ?