पर्यावरणीय प्रभाव आकलन - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ

  • भारत सरकार द्वारा लाये गए ड्राफ्ट पर्यावरणीय प्रभाव आकलन संसोधन के प्रावधानों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है तथा इसे अंतर्राष्ट्रीय नियमो से अलग बताया है।

परिचय

  • सयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा है कि जहाँ अभी हाल ही में विज़ाग गैस लीक जैसी स्थितियां भारत में उभरकर सामने आईं है ऐसे में ईआईए नियमो में लचीलापन पर्यावरण को बड़ा आघात पंहुचा सकता है तथा ये नियम स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को संपन्न नहीं कर पाएंगे । इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को लिखा है कि पर्यावरण के नियम अंतर्राष्ट्रीय स्थिति तथा अंतराष्ट्रीय कानूनों को ध्यान में रखकर बनाये जाए।

पर्यावरणीय प्रभाव आकलन :-

  • यह एक प्रस्तावित परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभाव के मूल्यांकन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह एक परियोजना यथा खनन , सिंचाई बांध, औद्योगिक इकाई या अपशिष्ट उपचार संयंत्र के संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक अनुमान लगाता है,। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत किसी भी विकास परियोजना या गतिविधि को अंतिम मंजूरी देने के लिए पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखा जाता है।अतः यह मूल रूप से, एक निर्णय लेने वाला उपकरण है जो निर्धारित करता है कि परियोजना को मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं।

नवीन अधिसूचना :-

  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत केंद्र सरकार में निहित शक्तियों के तहत मसौदा अधिसूचना जारी किया जाता है जिससे पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार के लिए ऐसे सभी उपाय किए जा सकें।
  • सरकार के अनुसार, ऑनलाइन प्रणाली के क्रियान्वयन, प्रक्रिया के अधिक प्रतिनिधिमंडल, युक्तिकरण और मानकीकरण के द्वारा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समीचीन बनाने के लिए नई अधिसूचना लाई जा रही है। हालांकि, पर्यावरणविद ने कहा कि मसौदा ईआईए प्रक्रिया को और कमजोर करेगा। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अधिसूचना 2020 में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान
  • अधिसूचना पर्यावरणीय प्रभावों की सामाजिक और आर्थिक प्रभाव और भौगोलिक सीमा पर स्थापित ए, बी 1 और बी 2 जैसी परियोजनाओं की तीन श्रेणियों को परिभाषित करती है।
  • अधिसूचना में दो प्रकार की स्वीकृति परिकल्पना की गई है प्रथम विशेषज्ञ समितियों की मंजूरी के बिना पर्यावरणीय अनुमति (ईपी ) तथा विशेषज्ञ समितियों की अनुमति के साथ पर्यावरण क्लीयरेंस (ईसी )
  • लगभग 40 अलग-अलग परियोजनाओं जैसे मिट्टी और रेत की निकासी या अच्छी तरह से खुदाई या इमारतों की नींव, सौर थर्मल पावर प्लांट और सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों को पूर्व ईसी या पूर्व ईपी से छूट दी गई है।
  • कई परियोजनाओं जैसे सभी बी 2 परियोजनाएं, सिंचाई, हलोजन का उत्पादन, रासायनिक उर्वरक, एसिड निर्माण, जैव चिकित्सा अपशिष्ट उपचार सुविधाएं, भवन निर्माण और क्षेत्र विकास, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर, राजमार्ग या एक्सप्रेसवे को सार्वजनिक परामर्श से छूट दी गई है।
  • पुरानी परियोजनाएं जो एआईए क्लीयरेंस नहीं प्राप्त कर सकीं नवीन अधिसूचना के आधार पर पुनः याचिका कर सकती हैं।

ईआईए 2020 के बारे में क्या विवादास्पद है?

  • मुख्य रूप से, अधिसूचना कुछ परियोजनाओं या किसी भी मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार या आधुनिकीकरण पर सीमाओं और अभियोजन को लागू करने के लिए जारी की जाती है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना है। लेकिन नए ईआईए ड्राफ्ट के प्रावधान इसके मूल अधिनियम और खुद के उद्देश्य के खिलाफ हैं।

विभिन्न परियोजनाओं को छूट का प्रावधान :-

  • चिंता का एक मुख्य कारण यह है कि मसौदे में लगभग 40 अलग-अलग परियोजनाओं जैसे मिट्टी और रेत की निकासी या खुदाई कुओं या इमारतों की नींव, सौर तापीय बिजली संयंत्र और सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों को पूर्व ईसी या पूर्व ईपी से छूट दी गई है।
  • कई परियोजनाओं जैसे कि सभी बी 2 परियोजनाएं, सिंचाई, हलोजन का उत्पादन, रासायनिक उर्वरक, एसिड निर्माण, जैव चिकित्सा अपशिष्ट उपचार सुविधाएं, भवन निर्माण और क्षेत्र विकास, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर, राजमार्ग या एक्सप्रेसवे को सार्वजनिक परामर्श से छूट दी गई है।
  • बी 2 श्रेणी के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं में अपतटीय और तटवर्ती तेल, गैस और शेल की खोज, 25 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाएँ, 2,000 से 10,000 हेक्टेयर के बीच सिंचाई परियोजनाएँ, छोटे और मध्यम खनिज लाभकारी इकाइयों ,की कुछ श्रेणियां शामिल हैं।
  • पुनः रोलिंग मिलों, छोटे और मध्यम सीमेंट संयंत्रों, छोटे क्लिंकर पीस इकाइयों, फॉस्फोरिक या अमोनिया, सल्फ्यूरिक एसिड के अलावा अन्य एसिड, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में डाई और डाई मध्यवर्ती, थोक दवाओं, , मध्यम- आकार की पेंट इकाइयां, सभी अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाएं, 25 -100 किमी के बीच राजमार्गों का विस्तार, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में हवाई रोपवे, और निर्दिष्ट भवन निर्माण और क्षेत्र विकास परियोजनाएं इसी श्रेणी के अंतर्गत सम्मिलित हैं।
  • निस्संदेह, सार्वजनिक आक्रोश इस आशंका से अधिक है कि ईआईए से छूट और सूचीबद्ध बी 2 श्रेणी गतिविधि और विस्तार और आधुनिकीकरण परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक परामर्श, पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा, क्योंकि इनके आकलन के नियमो में लचीलापन आ गया है।

जन सुनवाई की नोटिस की अवधि को घटाना :-

  • इसके अतिरिक्त जन सुनवाई के लिए नोटिस की अवधि 30 दिन से 20 दिन कम कर दी गई है । इससे ड्राफ्ट ईआईए रिपोर्ट का अध्ययन करना मुश्किल हो जाएगा, तथा यह क्षेत्रीय भाषा में व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हो पायेगी ।

सार्वजानिक परामर्श का न्यूनीकरण :-

  • खनन, नदी घाटी और अन्य परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी की वैधता अवधि बढ़ाई गई है। तथा इसमें सार्वजनिक परामर्श को कम कर दिया गया है।
  • ईआईए अधिसूचना 2020 उल्लंघन और गैर-अनुपालन की जनता द्वारा रिपोर्टिंग को महत्वहीन करती है। इसके स्थान पर सरकार केवल उल्लंघनकर्ता-प्रवर्तक, सरकारी प्राधिकरण, मूल्यांकन समिति या नियामक प्राधिकरण से रिपोर्टों का संज्ञान लेगी।
  • पुरानी परियोजनाएं जो एआईए क्लीयरेंस नहीं प्राप्त कर सकीं नवीन अधिसूचना के आधार पर पुनः याचिका कर सकती हैं।
  • पुरानी परियोजनाओं को शर्तों के साथ मंजूरी दी जा सकती है, जिसमें पारिस्थितिक क्षति के निवारण के लिए, उल्लंघनकर्ता द्वारा मूल्यांकन और रिपोर्ट किया जाएगा (और एक असंबद्ध एजेंसी नहीं), हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों का उपयोग किया जाना चाहिए।

क्या केवल क्षतिपूर्ति ही पर्यावरणीय मानको को सुधार देगी

    जिन परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी अंततः खारिज कर दी जाती है उन्हें क्षतिपूर्ति लेकर क्लीयरेंस देने से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी। जो भी परियोजनाएं अवैध रूप से या ज़बरदस्ती से या धोखाधड़ी से और बिना पर्यावरण सुरक्षा उपायों के अनुसार डिज़ाइन नहीं हैं उनके पास भी इस अधिसूचना से लाभ उठाने का विकल्प है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में औद्योगिक इकाइयों से संबंधित एक मामले में पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के बिना काम करते हुए एक आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया कि पोस्ट फैक्टो क्लीयरेंस पर्यावरण कानून के न्यायशास्त्र के खिलाफ हैं और यह पर्यावरण के लिए हानिकारक है। तीन औद्योगिक इकाइयाँ बिना किसी मंजूरी के कई वर्षों से फार्मास्यूटिकल्स और बल्क ड्रग्स का निर्माण कर रही थीं और इससे उनके क्षेत्रों में वायु प्रदूषण फैल रहा था। अप्रैल 2020 में, लॉकडाउन के दौरान, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देहिंग पटकाई हाथी रिजर्व फॉरेस्ट में एक कोयला खनन परियोजना को मंजूरी दी गई थी। दूसरी ओर, असम वन विभाग द्वारा 2003 से 16 वर्षों की अवधि के लिए अवैध खनन द्वारा देहिंग पटकाई अभ्यारण्य को नष्ट करने के लिए 43.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। यह स्थिति काफी समस्याग्रस्त है।

निष्कर्ष :-

  • यद्यपि इस अधिसूचना का लक्ष्य परियोजनाओं को सिंगल विंडो क्लीयरेंस , तथा त्वरित मंजूरी देकर बुनियादी ढांचा तथा अर्थव्यवस्था को गति देना है परन्तु हम सभी को सतत विकास की अवधारणा को भी समझना अनिवार्य है । भारत सदा से ही स्वच्छ पर्यावरण का पक्षधर रहा है , वैश्विक स्तर पर भी भारत सरकार की कई पहल पर्यावरणीय सुधारो के हित में थी। अतः इन परिस्थितियों में इस नवीन अधिसूचना पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • पपर्यावरणीय प्रभाव आकलन से आप क्या समझते हैं ? पर्यावरणीय प्रभाव आकलन में हालिया प्रस्तावित संसोधन पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करेंगे ?