पर्यावरणीय नैतिकता के आयाम - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • बंगाल सरकार द्वारा कोविड-19 के लिए प्लाज्मा थेरेपी के परीक्षणों के संचालन में मदद करने के उद्देश्य से कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में एक प्लाज्मा बैंक स्थापित करने पर विचार किया है ।

परिचय :-

  • हमारे जीवन को बनाए रखने के लिये जैव मंडल पर निर्भर हैं। अभी तक प्रत्येक समुदाय एवं प्रत्येक देश अपनी उत्तरजीविता के लिये अन्य लोगों पर निर्भर रहता है एवं समृद्धि के लिये इसके प्रभाव के लिये दूसरों पर निर्भर होते हैं। इसी प्रकार सम्पूर्ण मानव समाज प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण पर निर्भर है
  • अतः यह हमारा मौलिक कर्तव्य है कि इस ग्रह पृथ्वी को एक रहने योग्य सभ्य स्थान बनाना है। पृथ्वी पर सद्भाव के साथ रहने की चुनौती उतनी ही पुरानी है जितना कि मानव समाज। पर्यावरण-नैतिकता हमारे दायित्वों और प्रकृति के प्रति अनेक जिम्मेदारियों से जुड़ी है। एक समान जिम्मेदारी निभाना हम सबका बराबर का कर्तव्य है। वर्तमान में पर्यावरणीय नैतिकता आवश्यकता :- वर्तमान में कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हे हल करने हेतु पर्यावरणीय नैतिकता आवश्यक है।
  • कृषि , शहरीकरण तथा औद्योगिकीकरण हेतु भूमिगत जल को निकाला जा रहा है। जिससे भूमिगत जलस्तर में तेजी से गिरावट आई है और अगर यह लंबे समय तक जारी रहता है तो जल्द ही बहुत से क्षेत्रों का मरूस्थलीकरण निश्चित है। अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा कई एजेंसियों के साथ मिलकर तैयार किये गए मरुस्थलीकरण एटलस 2016 के अनुसार देश की 96 मिलियन हेक्टेयर भूमि भूमिअवनयन तथा 82 मिलियन हेक्टेयर भूमि मरूस्थलीकरण के अंतर्गत है।
  • दोनों प्रकार के ठोस और द्रव पदार्थ आमतौर से आस-पास की भूमि और जल निकायों में बेरोकटोक फेंक दिया जाता है। क्या यह नैतिकता है किसी की चाहर दीवारी के बाहर कूड़ा फेंका जाए? क्या कोई उद्योग पर्यावरण के लिये संवेदनशीलता को वहन कर सकता है या नहीं?
  • आवास , इमारती लकड़ी की आवश्यकता के कारण होने वाले वनोन्मूलन ने जैवविविधता तथा पर्यावरण को हानि पहुचाई है।
  • क्या पक्षियों, जन्तुओं, पौधों, मृदा एवं जल गुणवत्ता की महत्ता एक उद्यमी के लिये महत्त्वपूर्ण नहीं या पुरुष/स्त्री केवल अपने लाभ के बारे में जानना चाहिए, ?
  • इसके साथ ही वाहनों के अतिशय उपयोग , अनियोजित शहरीकरण तथा औद्योगिकीकरण ने पर्यावरण को हानि पहुंचाई है।

पर्यावरणीय नैतिकता और उनका महत्त्व

  • पर्यावरणीय नैतिकता दर्शन शास्त्र का वह भाग है जो मानव और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच नैतिक संबंधों को समझाता है। पर्यावरण नैतिकता का वह मार्गदर्शक बल है कि जिससे हर मानव को अपने आस-पास के वातावरण का ध्यान रखना चाहिए।

पर्यावरणीय नैतिकता निम्न दुविधाओं पर निर्णय हेतु सहायक होती है

  • क्या मानव उपयोग हेतु वनोन्मूलन आवशयक है ?
  • क्या नवीकरणीय ऊर्जा होते हुए भी हमे पेट्रोल तथा डीजल युक्त वाहनों का अतिशय उपयोग करना चाहिए ?
  • क्या जानबूझ कर अन्य प्रजातियों को विलुप्त करना सही है ? इसके फलस्वरूप विश्व छटवे सामूहिक विलोपन की ओर अग्रसर है।
  • अंतरिक्ष प्रदूषण कहाँ तक उचित है ?

पर्यावरणीय नैतिकता के दृष्टिकोण :-

  • पर्यावरण-नैतिकता के मूलतः तीन दृष्टिकोण हैं।
    1. मानव केंद्रित दृष्टिकोण
    2. जीवन केंद्रित दृष्टिकोण
    3. परितंत्रात्मक दृष्टिकोण :

मानव केंद्रित दृष्टिकोण :-

  • एक मत के अनुसार मनुष्य प्रभावी है एवं पृथ्वी ग्रह पर एक प्रमुख महत्त्वपूर्ण जीव है। मानव ने स्वयं के लाभ के लिये प्रकृति का इस्तेमाल किया है। यह मानव केन्द्रित विचार है इसलिये इसे मानव केन्द्रित (Anthropocentric) कहा जाता है।

जीवन केंद्रित दृष्टिकोण

  • एक दूसरा मानव-केन्द्रित मत यह है कि मानव की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह मानव की भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदार बने। यही दृष्टिकोण सतत विकास का आधार है।

परितंत्रात्मक दृष्टिकोण :-

  • ऐसे लोग जो सभी जीवों के प्रति सद्भावना चाहते हैं तथा सम्पूर्ण पर्यावरण की ओर अपनी श्रद्धा और प्रति सम्मान की मांग रखते हैं। इस तरह के कार्य जो कि दूसरी जीवो के प्रति नैतिक जिम्मेदारियों की बात करता है। परितंत्रात्मक दृष्टिकोण का सूचक है।

पर्यावरणीय नैतिकता के विभिन्न उदाहरण

  • दिल्ली एवं एन.सी.आर. (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) से प्रदूषण उत्पन्न करने वाले उद्योगों को बाहर स्थानान्तरित कर दिया गया; दिल्ली एवं एनसीआर में सीएनजी के उपयोग की अनिवार्यता का अभियान चलाया गया। ‘‘हरा ईंधन स्वच्छ ईंधन’’ के अभियान ने दिल्ली में कार में सीसारहित पेट्रोल के उपयोग का अभियान चलाया। ऐसा भारत में पहली बार हुआ था।
  • पश्चिमी घाटों में शांत घाटी परियोजना पर्यावरण कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन और जन प्रतिनिधित्व की वजह से समाप्त कर दी गयी थी। इससे इस क्षेत्र के वर्षा वनों को बचाने में मदद मिली जो कि विश्व में जैव विविधता वाला एक हॉट स्पॉट है।
  • बांधों के विरुद्ध प्रदर्शन करना एक विवादास्पद मुद्दा है और नर्मदा बचाओ आंदोलन अत्यंत सक्रिय रूप से नर्मदा बांध से हटाये गये लोगों के लिये किया जाने वाला आंदोलन है। (इस बांध के निर्माण के कारण बहुत से लोग विस्थापित हो रहे हैं।) इसी तरह का मुद्दा टिहरी बांध के ऊपर भी उठा
  • राजस्थान के विश्नोई समाज ने एक बार स्थानीय खेजड़ी पेड़ों (प्रोसोपिस स्पाइसीगेरा) को बचाने के लिये अपने जीवन का बलिदान किया था।
  • प्रसिद्द चिपको आंदोलन इसी सिलसिले की महत्वपूर्ण कड़ी है।
  • वकील एम-सी- मेहता बनाम भारत सरकार वाद जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के ताजमहल को मथुरा रिफाइनरी से निकलने वाले बहिर्पदार्थों से बचाना था। इस प्रसिद्ध मामले के कारण प्रत्येक नागरिक का शुद्ध हवा, जल एवं भूमि पर अधिकार है, की जागरूकता उत्पन्न हुई। इस मामले के निर्णय ने भारतीय संविधान के जीवन के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार माना।

निष्कर्ष :-

  • आज हम देख रहे की पर्यावरण की समस्या वैश्विक हो चुकी है। निजी हितो के कारण लोग पर्यावरणीय हितो की बलि दे रहे यथा अमेरिका का पेरिस संधि से हटना। ऐसी स्थिति में पर्यावरणीय नैतिकता महत्वपूर्ण हो जाती है।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 तथा 4
  • पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी व नीतिशास्त्र

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • पर्यावरणीय नैतिकता से आप क्या समझते हैं ? क्या पर्यावरणीय नैतिकता पर्यावरण की समस्याओं के निदान में सहायक हो सकती है ?