भारत में डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): एक समग्र अवलोकन - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (National Statistical Organisation-NSO) ने भारत में डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) की स्थित पर अपनी रिपोर्ट जारी की है।

परिचय

  • भारत में शिक्षा क्षेत्र से संबंधित घरेलू सामाजिक उपभोग( household social consumption) का सर्वेक्षण जुलाई 2017 से जून 2018 तक आयोजित राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) के 75 वें दौर का हिस्सा था। जिसकी अंतिम रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई है ।
  • इस रिपोर्ट में भारत में डिजिटल डिवाइड की स्थिति के संबंध में कई महत्वपूर्ण आंकड़े दिये गए हैं।
  • एनएसओ की इस हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में विभिन्न राज्यों, शहरों और गांवों तथा विभिन्न आय समूहों में डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) काफी अधिक है।

क्या है डिजिटल डिवाइड?

  • इंटरनेट और संचार प्रौद्योगिकियों के उपयोग और प्रभाव के संबंध में आर्थिक और सामाजिक असमानता को ‘डिजिटल डिवाइड’ की संज्ञा दी जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो डिजिटल डिवाइड, इंटरनेट व अन्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग और प्रभाव के संबंध में आर्थिक और सामाजिक असमानता को दर्शाता है ।
  • सामान्यतया ‘डिजिटल डिवाइड’, इंटरनेट व संचार प्रौद्योगिकियों के उपयोग को लेकर विभिन्न सामाजिक, आर्थिक स्तरों या अन्य जनसांख्यिकीय श्रेणियों में व्यक्तियों, घरों, व्यवसायों या भौगोलिक क्षेत्रों के बीच असमानता का उल्लेख करता है। डिजिटल डिवाइड के सन्दर्भ में एनएसओ की रिपोर्ट की मुख्य बातें
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में, दस में से केवल एक घर में एक कंप्यूटर (डेस्कटॉप, लैपटॉप या टैबलेट) है ।
  • भारत के में सभी घरों में से लगभग एक चौथाई घरों में इंटरनेट की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो एक निश्चित(fixed) या मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से एक्सेस की जाती हैं ।
  • भारत के इन इंटरनेट-सक्षम घरों (Internet-enabled homes) में से अधिकांश घर शहरों में ही स्थित हैं। जहां शहरों के कुल घरों में से 42% घरों में इंटरनेट का उपयोग होता है, तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र के कुल घरों में से केवल 15% ही घर इंटरनेट से जुड़े हैं।
  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सबसे अधिक इंटरनेट का उपयोग होता है, यहाँ लगभग 55% घरों में इंटरनेट की सुविधाएं हैं। दिल्ली के अतिरिक्त, हिमाचल प्रदेश और केरल ही ऐसे राज्य हैं जहाँ आधे से अधिक घरों में इंटरनेट है।
  • इंटरनेट के मामले में ओडिशा की स्थिति काफी चिंताजनक है, यहाँ दस घरों में से केवल एक में ही इंटरनेट है।
  • 20% से कम इंटरनेट की पहुंच वाले दस अन्य राज्य हैं, जिनमें कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे सॉफ्टवेयर हब शामिल हैं।
  • एनएसओ ने रिपोर्ट में बताया है कि देश में डिजिटल डिवाइड का सर्वप्रमुख कारक आर्थिक स्थिति है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर केरल राज्य में सबसे कम डिजिटल डिवाइड की स्थिति दिखती है जबकि असम में यह सबसे अधिक है।
  • एनएसओ की रिपोर्ट बताती है कि 5 वर्ष से अधिक आयु के 20% भारतीयों में बुनियादी डिजिटल साक्षरता है, जबकि 15 से 29 वर्ष के महत्वपूर्ण आयु समूह में यह 40% है।

भारत में डिजिटल डिवाइड के कारण

  • देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में टेली घनत्व (अर्थात टेलीकॉम सुविधाओं का घनत्व) में भारी अंतर है जो कि बड़े पैमाने पर डिजिटल डिवाइड का कारण बनाता है।
  • कुछ पूर्वी राज्यों के मामले में टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स का रुख अनुकूल नहीं है। इसके अलग-अलग कारण हैं। इसमें बिजली की उपलब्धता जैसे बुनियादी ढांचे का अभाव तथा व्यापार अवसरों को लेकर उदासीनता भी है।
  • भारत के दूर-दराज इलाकों में आज भी इलेक्ट्रिसिटी जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है। इलेक्ट्रिसिटी की सुविधा डिजिटल डिवाइड का प्रमुख कारण है , क्योंकि लोग इलेक्ट्रिसिटी के अभाव में मोबाइल , कंप्यूटर आदि जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरण प्रयोग नहीं कर पाते हैं। इसीलिए टेलीकॉम कंपनियाँ भी यहाँ निवेश नहीं करती हैं , क्योंकि उन्हें अपेक्षित संख्या में ग्राहक नहीं मिल पाते हैं।
  • भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टीविटी काफी कमजोर स्थिति में है।
  • जैसा कि एनएसओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न वर्गों में आय की असमानता ने भी भारत में डिजिटल डिवाइड को बढ़ाया है। गरीबों में इंटरनेट के उपयोग की स्थिति काफी चिंताजनक है । उनके पास मोबाइल , कंप्यूटर आदि जैसे इलेक्ट्रानिक संसाधनों का भारी अभाव है । कम आय वाले लोगों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा उनकी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने में ही चला जाता है। वे प्रौद्योगिकी को एक विलासिता के रूप में देखते हैं।
  • भारत में लैंगिक असमानता ने भी डिजिटल डिवाइड को बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई है । यहाँ आज भी लड़कियों या महिलाओं को लड़कों या पुरुषों की तरह डिजिटल संसाधनों के उपयोग की स्वतन्त्रता नहीं है।
  • शिक्षा का स्तर और गुणवत्ता का डिजिटल डिवाइड पर काफी प्रभाव रहता है। भारत में अभी भी शिक्षा की स्थिति काफी कमजोर हालत में है , जो डिजिटल डिवाइड को बढ़ाने में अपनी प्रमुख भूमिका अदा कर रही है।
  • भारत में शिक्षा की गुणवत्ता काफी खस्ताहाल में है , यहाँ अभी भी परंपरागत पाठ्यक्रमों पर जोर दिया जाता है, जिसमें डिजिटल शिक्षा का अभाव रहता है। इस प्रकार डिजिटल साक्षरता की कमी भी डिजिटल डिवाइड को बढ़ा रही है।
  • भारत में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु बुनियादी ढाँचे और शिक्षकों आदि की कमी है।
  • भारत में आज भी इंटरनेट या इलेक्ट्रानिक उपकरणों का उपयोग अँग्रेजी भाषा के अतिरिक्त क्षेत्रीय भाषा में सुनिश्चित नहीं हो पाया है, जो क्षेत्रीय भाषा में शिक्षित लोगों में इंटरनेट के उपयोग को सीमित करता है।
  • भारत की भौगोलिक स्थिति भी डिजिटल डिवाइड में अपनी भूमिका अदा करती है। पहाड़ी क्षेत्रों की अपेक्षा मैदानी क्षेत्रों में डिजिटल ढाँचा को बनाना अपेक्षाकृत आसान है।

डिजिटल डिवाइड के प्रभाव

  • एक तरफ जहां शिक्षा का स्तर और गुणवत्ता का डिजिटल डिवाइड को बढ़ती है तो वहीं किसी समाज में डिजिटल डिवाइड के होने पर वहाँ का शिक्षा क्षेत्र काफी नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। इस प्रकार शिक्षा और डिजिटल डिवाइड दोनों ही एक-दूसरे को वाइस-वर्सा (vice-versa) रूप में प्रभवित करते हैं।
  • वर्तमान में पूरा देश कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है और लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हैं । इस स्थिति में कुछ विद्यार्थी आनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन भारत में डिजिटल डिवाइड की स्थिति अधिक होने के कारण ज़्यादातर विद्यार्थी आनलाइन कक्षाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है।
  • कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन ने जहां उन कंपनियों व दूकानदारों की बिक्री में इजाफा किया जो डिजिटल रूप से सशक्त थे । लेकिन वहीं डिजिटल रूप से अक्षम एवं रेहड़ी-पटरी वाले दूकानदारों को भारी मात्र में नुकसान पहुंचाया है।
  • डिजिटल डिवाइड किसी देश में व्यवसाय को भी प्रभावित करत है। डिजिटल डिवाइड के कारण ई-बिजनेस कंपनियाँ (यथा-अमेज़न आदि), टेलीकॉम कंपनियाँ एवं अन्य ऐसी कंपनियाँ जिनका व्यापार आनलाइन माध्यमों पर अधिक निर्भर होता है, वो निवेश नहीं करती हैं।
  • डिजिटल डिवाइड लोगों के बीच सूचनाओं के पहुँच की असमानता को भी बढ़ाता है। डिजिटल डिवाइड के कारण ग्रामीण भारत आवश्यक सूचना की कमी का सामना कर रहा है, जो कि गरीबी, अभाव और पिछड़ेपन के दुष्चक्र को और मज़बूत करता है। इसके अतिरिक्त , यह सामाजिक असमानता को भी बढ़ाता है। आज समाज को डिजिटल आधार पर भी विभाजित किया जा रहा है।
  • भारत में डिजिटल डिवाइड ने ‘डिजिटल इंडिया मिशन’ को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। आज सरकार, गवर्नेंस हेतु डिजिटल माध्यमों पर अधिक ज़ोर दे रही है , ताकि इसमे पारदर्शिता, जवाबदेहिता, तेजी आदि को लाया जा सके । ऐसे में यदि देश में डिजिटल डिवाइड की स्थिति बनी रही तो गवर्नेंस भी प्रभावित होगा।

डिजिटल डिवाइड को कम करने हेतु भारत सरकार के प्रयास

  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम: यह भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसमें भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने की दृष्टि है।इसमें नागरिकों के डिजिटल सशक्तिकरण पर फोकस किया गया है जोकि निम्नलिखित है-
  1. यूनिवर्सल डिजिटल साक्षरता
  2. सभी डिजिटल संसाधन सर्वत्र सुलभ
  3. सभी सरकारी दस्तावेज/प्रमाण पत्र क्लाउड पर उपलब्ध
  4. भारतीय भाषाओं में डिजिटल संसाधनों/सेवाओं की उपलब्धता
  5. सहभागी शासन के लिए सहयोगात्मक डिजिटल प्लेटफॉर्म
  6. क्लाउड के माध्यम से व्यक्तियों की सभी पात्रताओं की पोर्टेबिलिटी
  • भारतनेट कार्यक्रम: भारतनेट कार्यक्रम या परियोजना का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा राज्यों तथा निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी से भारत के दूर- दराज़ के क्षेत्रों में नागरिकों एवं संस्थानों को सुलभ व हाईस्पीड ब्रॉडबैंड किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। इसके तहत अब तक 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर के ज़रिये जोड़ा जा चुका है।
  • राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन(NDLM): राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन की शुरुआत हाल ही में हुई है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के प्रत्येक घर में कम-से-कम एक व्यक्ति को डिजिटल साक्षर बनाना है।
  • राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018 : इस नीति का उद्देश्य भारत के प्रत्येक नागरिक को 50 एमबीपीएस की गति से यूनिवर्सल सुलभ व हाईस्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देना है। इसके अतिरिक्त , इस नीति में यह भी लक्ष्य है कि एक राष्ट्रीय फाइबर प्राधिकरण को गठित करके राष्ट्रीय डिजिटल ग्रिड की स्थापना करना है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : इसमें भी डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने हेतु भारतीय शिक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलावों के लक्ष्यों को रखा गया है।
  • कुछ नवीनतम पहल-
  1. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि आने वाले 1000 दिनों में देश के हर गांव को ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा जाएगा।
  2. हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीप को बेहतर इंटरनेट सेवा के लिए समुद्र तल केबल के साथ जोड़ा गया है इसके साथ ही अब लक्षद्वीप को केबल से जोड़ेंगे।
  3. रणनीतिक, दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में 354 गांवों में ऐसी कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए एक निविदा को अंतिम रूप दिया गया है और बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात के अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के 144 गांवों में जम्मू- कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया जा रहा है। इन गांवों को रणनीतिक रूप से मोबाइल पर सीमा क्षेत्र कनेक्टिविटी को कवर करने के लिए चुना गया है। इन गांवों में चालू होने के बाद, मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में कोई भी ऐसा गाँव नहीं होगा जहां मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्‍ध नहीं होगी।
  4. दूरसंचार विभाग बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के 24 आकांक्षी जिलों के गाँवों में मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने पर काम कर रहा है और छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश में बचे हुए 44 आकांक्षी जिलों के 7287 के गांवों को भी कवर किया जाएगा जिसके लिए सरकार की मंजूरी प्राप्‍त करने की प्रक्रिया चल रही है।
  5. बीएसएनएल द्वारा भारत एयर फाइबर सेवाओं‘ का को शुरु किया गया है जोकि भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहलों के एक हिस्से के रूप में प्रस्तुत की गई हैं और इसका लक्ष्य बीएसएनएल स्थान से 20 किमी के दायरे में वायरलेस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

आगे की राह

  • आज डिजिटलीकरण मानव जीवन के लगभग हर पक्ष को प्रभावित कर रहा है। इस वैश्वीकरण के युग ने साबित किया है कि डिजिटल सशक्तिकरण किसी भी देश के चौहमुखी विकास हेतु अति आवश्यक है। अतः भारत में सभी नागरिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने हेतु सरकार एवं अन्य हितधारकों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। प्रश्न: डिजिटल डिवाइड से क्या तात्पर्य है? भारत में डिजिटल डिवाइड के विभिन्न कारणों की चर्चा करने के साथ-साथ इसके प्रभावों का भी उल्लेख करें।