बढ़ती वैश्विक खाद्य कीमतों के संकट से निपटना - समसामयिकी लेख

   

की-वर्ड्स :- वैश्विक खाद्य आपूर्ति बाधित; तीव्र और गंभीर आवधिक मूल्य झटके; खाद्य मूल्य सूचकांक; सामरिक उदारीकरण की नीति; वैश्विक खाद्य सुरक्षा स्टॉक।

संदर्भ :-

  • हाल ही में यूक्रेन-रूस संघर्ष और COVID महामारी ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति को नकारात्मक तरीके से प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक खाद्य कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।
  • इन बढ़ोतरी के व्यापक प्रभाव हो सकते हैं और इसलिए जल्द से जल्द इसका समाधान किया जाना चाहिए।

मुख्य विचार :-

  • देश अपने व्यापार और घरेलू नीतियों में बदलाव के माध्यम से साल-दर-साल अस्थिरता का प्रबंधन कर सकते हैं।
  • लेकिन, यह तीव्र और गंभीर आवधिक मूल्य आघात है जो वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर संकट पैदा करता है।
  • भोजन की कमी कई संकट को उभार सकती है। जैसे :-
  1. व्यापार व्यवधान
  2. भूख और गरीबी के स्तर में वृद्धि और प्रसार,
  3. निवल खाद्य-आयात करने वाले देशों के लिए विदेशी मुद्रा भंडार में कमी,
  4. खाद्य सुरक्षा जाल पर खर्च में वृद्धि के कारण देश के वित्तीय संसाधनों पर दबाव,
  5. कुछ जगहों पर शांति और यहां तक कि सामाजिक अशांति के लिए खतरा।

संकट और इतिहास :-

  • डब्ल्यूबी, एफएओ और आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार, 1960 के दशक की शुरुआत में हरित क्रांति प्रौद्योगिकी को अपनाने के बाद भी दुनिया खाद्य कीमतों के संकट से 3 बार प्रभावित हुई है। इसे खाद्य मूल्य सूचकांक (FPI) द्वारा माँ[प जाता है।
  • पहला दौर 1973-76 के दौरान आया था।
  • अगला खाद्य मूल्य संकट 2008-12 के दौरान देखा गया था।
  • तीसरा खाद्य मूल्य संकट 2020 की तीसरी तिमाही में शुरू हुआ।
  • इस बार खाद्य मूल्य सूचकांक में वृद्धि बहुत तेजी से हुई। यह खाद्य मूल्य सूचकांक (FPI) को ऐतिहासिक रूप से अपने उच्चतम स्तर पर ले गयी है।

सीख :-

  • इन संकटों की उत्पत्ति कृषि क्षेत्र के बाहर हुई थी।
  • यह साफ़ देखा गया है कि दो खाद्य मूल्य संकट के बीच का अंतराल काफी कम हो गया है।
  • साथ ही इस संकट कि भेद्यता बढ़ती जा रही है।

हाल के सन्दर्भ में बढ़त :-

व्यापार पैटर्न में व्यवधान

  • खाद्य पदार्थों की कीमतों में हालिया वृद्धि COVID-19 के कारण आपूर्ति में व्यवधान और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण और बढ़ गई है। कीमतों में इस वृद्धि में व्यापार पैटर्न ने भी योगदान दिया है।
  • यह वनस्पति तेलों से शुरू हुआ और फिर अनाज तक फैल गया।
  • इन वस्तुओं के व्यापार पैटर्न से पता चलता है कि निम्नलिखित प्रतिशत पर विश्व स्तर पर कारोबार किया जाता है
  • वनस्पति तेल के लिए 38%
  • गेहूं के लिए 25%
  • मक्का के लिए 16%
  • चावल के लिए केवल 10%

इसलिए गेहूं, वनस्पति तेल और मक्का की कीमतें व्यापार में व्यवधान से अधिक प्रभावित होंती हैं।

जैव ईंधन की जरूरतों के लिए भोजन का डायवर्जन

  • बायोडीजल के लिए उपयोग किए जाने वाले वनस्पति तेल का अनुपात 1% (2003) - 11% (2011) - 15% (2021) से बढ़ा।
  • कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि के कारण तिलहन आदि से उसका उत्पादन करना सस्ता हो जाता है।
  • जैव ईंधन के लिए खाद्य फसलों के उपयोग का कारण अक्षय ऊर्जा संसाधनों की हिस्सेदारी बढ़ाना है।

उत्पादन लागत में वृद्धि :-

  • उर्वरक और अन्य कृषि रसायनों की कीमतों में वृद्धि के कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि होगी।
  • अप्रैल 2021 और अप्रैल 2022 में उर्वरक की अंतरराष्ट्रीय कीमत में 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

भारत के लिए निहितार्थ :-

  • कृषि क्षेत्र में निर्यात और आयात 2020-21 के दौरान कृषि में सकल मूल्य वर्धित मूल्य का 13% है।
  • इसलिए, घरेलू कीमतों पर वैश्विक कीमतों में वृद्धि का कुछ संचरण अपरिहार्य है।
  • घरेलू बाजार में वैश्विक कीमतों के इस संचरण को व्यापार नीति और अन्य उपकरणों के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

उत्पादकों का पक्ष लेना - जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें बहुत कम हो जाती हैं, तो भारत उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए सस्ते आयात पर रोक लगाता है।

उपभोक्ताओं का पक्ष लेना - जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें बहुत अधिक हो जाती हैं, तो आयात को उदार बनाया जाता है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त उपलब्धता और उचित खाद्य मूल्य सुनिश्चित करने के लिए निर्यात की जाँच की जाती है।

  • खाद्य पदार्थों का एक बफर स्टॉक मूल्य स्थिरता बनाए रखने में सहायक होता है (वैश्विक खाद्य संकट के दौरान)।
  • खाद्य और कृषि अधिशेष को बढ़ाने के लिए कृषि निर्यात पर निर्भरता बढ़ गई है।
  • एक अनुमान के अनुसार, भारत को 2030 तक अपने घरेलू खाद्य उत्पादन का 15% विदेशी बाजार में खपाना होगा।
  • यह निर्यात और उत्पादन के मौजूदा अनुपात के दोगुने से भी अधिक है।
  • इसलिए भारत को एक विश्वसनीय निर्यातक की छवि बनाए रखनी चाहिए।

हालांकि, दो स्थितियों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है : सामान्य निर्यात को बाधित करना और सामान्य स्तर से अधिक निर्यात को विनियमित करना।

गेहूं निर्यात प्रतिबंध :-

  • असामान्य स्थिति के कारण, भारत द्वारा गेहूं के निर्यात पर हालिया प्रतिबंध और अन्य खाद्य वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध उचित है।
  • यह एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में भारत की छवि के लिए एक झटका नहीं है क्योंकि यह कदम निर्यात चैनलों को नियमित करने के रूप में देखा जाता है।
  • भारत गेहूं का एक छोटा निर्यातक है, 2015-16 से 2020-21 के दौरान दुनिया के गेहूं का केवल 0.1% से 1% भारत से आया था।
  • रूस और यूक्रेन से गेहूं के निर्यात में आई रुकावट की भरपाई के लिए दुनिया को करीब 50 मिलियन टन गेहूं की जरूरत है।
  • यह देश में आधे गेहूं के उत्पादन के करीब है और बाजार में आने वाले गेहूं के दो तिहाई से अधिक है।
  • यदि प्रतिबंध नहीं लगाया गया होता तो इसके परिणामस्वरूप देश में गेहूँ की भारी कमी हो जाती।
  • कोई भी जिम्मेदार देश अतिरिक्त निर्यात की अनुमति देकर अपनी खाद्य सुरक्षा को खतरे में नहीं डालेगा।
  • भारत को उत्पादकों और उपभोक्ताओं के हितों को संतुलित करने के लिए रणनीतिक उदारीकरण की नीति जारी रखनी चाहिए।

वैश्विक प्रभाव :-

  • हरित क्रांति प्रौद्योगिकी ने खाद्य कीमतों को कम और अपेक्षाकृत स्थिर रखने में मदद की है। लेकिन तब से, कीमतों के झटकों के खिलाफ खाद्य क्षेत्र के लचीलेपन के कमजोर होने के साथ-साथ क्रांति की गति धीमी हो गई है।
  • अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पर सलाहकार समूह को कृषि से संबंधित अनुसंधान एवं विकास में एक सहयोगी दृष्टिकोण के लिए पुर्नोत्थान किया जाना चाहिए।
  • यह हरित क्रांति बड़े पैमाने पर अपनाने की आवश्यकता है यह प्रौद्योगिकी का उपयोग करके, खाद्य कीमतों पर नियंत्रण कर सकता है।
  • जैव ईंधन प्रोटोकॉल ने पिछले 15 वर्षों में दूसरी बार वैश्विक खाद्य संकट में योगदान दिया है। इसलिए, इसे 2 और उससे अधिक डिग्री जैव ईंधन तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।
  • 2-डिग्री जैव ईंधन में गैर-खाद्य संयंत्र शामिल हैं।
  • 3-डिग्री जैव ईंधन में सूक्ष्म शैवाल शामिल होते हैं।

निष्कर्ष :-

जलवायु परिवर्तन आगे आने वाले वर्षों में आपूर्ति के झटके प्रदान करेगा। इसलिए, वैश्विक समुदाय को बढ़े हुए लचीलेपन के लिए वैश्विक बफर स्टॉक रखने की योजना बनानी चाहिए। स्थिति को वैश्विक समुदाय द्वारा समन्वित और समय पर कार्रवाई की आवश्यकता है।

स्रोत – हिंदू

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3:
  • बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • हाल ही में देखा गया खाद्य मूल्य वृद्धि संकट पहला नहीं है और यह आखिरी नहीं होगा? इस संकट का कारण बताते हुए आगे के लिए उपयुक्त उपाय सुझाएं।