कृषि अवसंरचना कोष: कृषि बाजार की दिशा में एक और बड़ा कदम - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने कृषि विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपए का कोष जारी किया है। इस कोष का इस्तेमाल कृषि संबंधी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने के लिये कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। जिनमें आवश्यक वस्तु अधिनियम में सुधार, कृषि उपज विपणन समिति (APMC) से जुड़े सुधार और अनुबंध कृषि (Contract Farming) से जुड़ी नीतियों में सुधार सुधार भी शामिल हैं।
  • सरकार द्वारा किए गए इन सुधारों के बाद कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना भी आवश्यक हो गया था जिसे ध्यान रखते हुये सरकार द्वारा कृषि अवसंरचना कोष बनाया जाना कृषि-बाजार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कृषि अवसंरचना कोष (AIF) क्या है?

  • कोरोना संकट से उभरने के लिए सरकार ने 20 लाख करोड़ का विशेष राहत पैकेज घोषित किया था। कृषि अवसंरचना कोष भी उसी पैकेज का हिस्सा है। कृषि अवसंरचना कोष की अवधि वर्ष 2029 तक यानी 10 साल तक के लिए है।
  • इस एक लाख करोड़ रुपए के एग्री इंफ्रा फंड का इस्तेमाल गांवों में कृषि क्षेत्र से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाएगा। इस फंड से कोल्ड स्टोर, वेयरहाउस, साइलो, ग्रेडिंग और पैकेजिंग यूनिट्स लगाने के लिए लोन दिया जाएगा।
  • इस स्कीम के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ओर से एक लाख करोड़ रुपए का लोन दिया जाएगा। यह लोन प्राइमरी एग्री क्रेडिट सोसायटी, किसानों के समूह, किसान उत्पाद संगठनों, एग्री एंटरप्रिन्योर, स्टार्टअप्स और एग्रीटेक प्लेयर्स को दिया जाएगा।
  • मौजूदा वित्त वर्ष में 10 हजार करोड़ रुपए का लोन बांटा जाएगा। अगले तीन वित्त वर्ष में 30-30 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया जाएगा।
  • इस सुविधा के तहत लोन पर सालाना ब्याज में 3 फीसद छूट दी जाएगी। यह छूट अधिकतम 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर होगी। ब्याज छूट का लाभ ज्यादा से ज्यादा 7 साल तक मिलेगा।

कृषि अवसंरचना कोष के लाभ:

  • कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर होने से किसान के पास फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों के रखने के लिए बेहतर भंडारण की सुविधा होगी।
  • कोल्ड स्टोरेज में किसान अपनी फसल रख पाएंगे। इससे फसलों की बर्बादी कम होगी और उचित समय पर उचित कीमत के साथ किसान अपनी फसल बेच पाएंगे।
  • फूड प्रोसेसिंग यूनिट लग जाने से भी किसानों का बहुत फायदा होगा और हर साल होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी।
  • इसकी मदद से किसानों को उनकी फसल के लिए ज्यादा पैसे मिलेंगे और उनकी आय को दुगुना करने के संकल्प को प्राप्त किया जा सकेगा।
  • भंडारण की सुविधा से कृषि उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी एवं वर्ष भर अनवरत रूप से कृषि उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी जिससे खाद्य मुद्रास्फीति पर लगाम लगेगी।
  • इस योजना के तहत सरकार द्वारा कृषि क्लस्टर चिन्हित किये जाने से फसलों के लिए आवश्यक अवसंरचना सृजित होगी एवं फसल विशेषीकरण को बढ़ावा मिलेगा ।
  • इस योजना के क्रम में सृजित किये गए एग्री इंफ्रा पोर्टल से इच्छुक व्यक्ति/संस्थान ऋण के लिये अलग-अलग बैंकों द्वारा प्रस्तावित ऋण दरों के बीच तुलना करके बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होंगें जिससे ऋण वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी ।

कृषि अवसंरचना कोष से जुड़े मुद्दे और समाधान

  • इसमें कोई संदेह नहीं है कि अधिक और बेहतर भंडारण सुविधाएं किसानों को फसल के तुरंत बाद संकट से बचने में मदद कर सकती हैं क्योंकि उस समय कीमतें आमतौर पर सबसे कम होती हैं।
  • छोटे किसान लंबे समय तक फसल को भंडारित नहीं रख सकते हैं क्योंकि परिवार के अन्य जरूरी खर्चों के लिए उसको नकदी की तत्काल आवश्यकता होती है।
  • इसलिए, कृषक-उत्पादक संघ (एफ़पीओ) के स्तर पर इन भंडारण सुविधाओं को मालगोदाम रसीद हस्तांतरण सुविधा (negotiable warehouse receipt system) के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
  • इस प्रणाली के तहत, एफपीओ किसानों को उनकी उपज के वर्तमान बाजार मूल्य का 75-80% तक अग्रिम भुगतान कर सकता है।
  • हालांकि इसकी सफलता के लिए, एफपीओ को किसानों की फसलों के अग्रिम भुगतान के लिए एक बड़ी कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होगी।
  • चूंकि नाबार्ड द्वारा 10,000 से अधिक एफपीओ का गठन किया जाना है, अतः नाबार्ड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एफपीओ को भी उनकी कार्यशील पूंजी 4%-7% की ब्याज दर मिलती रहे। अन्यथा सिर्फ भंडारण सुविधाओं के निर्माण से किसानों को लाभ नहीं होगा। किसानों के लिए बाजार जोखिम कम करने और बेहतर कीमत वसूली के लिए के उपाय
  • मालगोदाम रसीद हस्तांतरण सुविधा का प्रयोग: चूंकि नाबार्ड द्वारा 10,000 से अधिक एफपीओ का गठन किया जाना है और एआईएफ़ के माध्यम से बुनियादी भंडारण सुविधाएं तैयार करनी है। इसमें एफपीओ के लिए एक अनिवार्य प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल होना चाहिए। जिसमें-
  • मालगोदाम रसीद हस्तांतरण सुविधा के उपयोग का प्रशिक्षण और
  • बाजार जोखिमों से निपटने के लिए कृषि-वायदा बाजार की समझ शामिल हो।
  • जिंस बाजारों में प्रतिभाग करने वाली सरकारी एजेंसियां जैसे भारतीय खाद्य निगम (FCI), नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED), स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (STC) इत्यादि को कृषि- वायदा डेरिवेटिव्स में अधिक भाग लेना चाहिए।
  • जो बैंक एफपीओ, व्यापारियों, आदि को ऋण देते हैं, उन्हें भी कृषि-बाजारों के स्वस्थ विकास के लिए कृषि-वायदा में भाग लेना चाहिए।
  • सरकार की नीति को और अधिक स्थिर और बाजार के अनुकूल होना होगा। अतीत में, ये अत्यधिक प्रतिबंधात्मक और अप्रत्याशित रही हैं।
  • कृषि-कीमतों में किसी भी वृद्धि के साथ, सरकार की नीति का पहला शिकार कृषि-वायदा था जिसमें प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था।

निष्कर्ष

  • निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि भारत को अपने कृषि-बाजार (एक राष्ट्र, एक बाजार) को न केवल स्थायी रूप से एकीकृत करने की आवश्यकता है, बल्कि उन्हें समय की मांग के अनुसार वायदा बाजारों में परिवर्तित करने की भी आवश्यकता है। कृषि अवसंरचना कोष की यह स्कीम किसानों, प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, किसान उत्पाद संगठन, कृषि उद्यमियों आदि को सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों और फसलोपरांत कृषि मूलभूत संरचना के निर्माण में सहायता प्रदान करेगी। भारतीय किसानों को उनकी उपज के लिए सबसे अच्छी कीमत दिलाने और बाजार जोखिम बाधाओं से बचाने के लिए इस दिशा में शीघ्रता से आगे बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही वश्विक कृषि बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति हेतु उत्पादन और प्रबंधन में सुधार के साथ कृषि से जुड़े प्रचलित अंतर्राष्ट्रीय मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए इनको लागु करना होगा।