एजीआर विवाद - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी लेख

सन्दर्भ:-

  • उच्चतम न्यायालय ने वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी कंपनियों को दूरसंचार विभाग (डीओटी) को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से संबंधित बकाया चुकाने के लिए सशर्त दस वर्ष का समय दिया है। शीर्ष न्यायालय ने इसके साथ ही दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का 10 प्रतिशत बकाया 31 मार्च, 2021 तक चुकाने का निर्देश दिया।

क्या है एजीआर

  • एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है। इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है।

क्या है विवाद

  • विवाद का आधार दूरसंचार विभाग तथा टेलीकॉम कंपनियों द्वारा दी गई अलग अलग एजीआर की परिभाषा है। दूरसंचार विभाग के अनुसार AGR की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी को होने वाले संपूर्ण आय या रेवेन्यू के आधार पर होनी चाहिए, जिसमें डिपॉजिट इंट्रेस्ट और एसेट बिक्री जैसे गैर टेलीकॉम स्रोत से हुई आय भी शामिल हो। दूसरी तरफ, टेलीकॉम कंपनियों का मत है कि AGR की गणना सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली आय के आधार पर होनी चाहिए।
  • साल 2005 में सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने एजीआर की गणना के सरकारी परिभाषा को चुनौती दी थी, लेकिन तब दूरसंचार विवाद समाधान और अपील न्यायाधिकरण (TDSAT) ने सरकार के रुख को वैध मानते हुए कंपनियों की आय में सभी तरह की प्राप्तियों को शामिल माना था।
  • इसके बाद टेलीकॉम कंपनियों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 24 अक्टूबर, 2019 के अपने आदेश में दूरसंचार विभाग के रुख को सही ठहराया और सरकार को यह अधिकार दिया कि वह करीब 94,000 करोड़ रुपये की बकाया समायोजित ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) टेलीकॉम कंपनियों से वसूलें। ब्याज और जुर्माने के साथ यह करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों से तीन महीने के भीतर यह बकाया राशि जमा करने को कहा था।

क्या है हालिया निर्णय :-

  • पीठ ने दूरसंचार कंपनियों के प्रबंध निदेशकों या मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिया है कि वे बकाया के भुगतान के बारे में चार सप्ताह में वचन या व्यक्तिगत गारंटी दें। न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों को आगाह करते हुए कहा है कि एजीआर के बकाये की किस्त के भुगतान में चूक की स्थिति में उनपर जुर्माना, ब्याज लगेगा। तथा इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा।
  • न्यायालय ने कहा कि दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही दूरसंचार कंपनियों द्वारा स्पेक्ट्रम की बिक्री के मुद्दे पर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) निर्णय करेगा । न्यायालय ने यह निर्णय 1.6 लाख करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान की समयसीमा सहित अन्य मुद्दों पर सुनाया है। तथा टेलीकॉम कंपनियों को सशर्त समय प्रदान किया है।

निर्णय का प्रभाव :-

टेलीकॉम कंपनियों पर प्रभाव :-

  • एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया पर सर्वाधिक बोझ है। एयरटेल को इसके तहत 43,000 करोड़ रुपये और वोडाफोन आइडिया को 40,000 करोड़ रुपये देने होंगे। सरकार के सचिवों की समिति इस बारे में विचार भी कर रही है कि कंपनियों को किस तरह से राहत दी जा सकती है। यही नहीं, PGCIL, RailTel, सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, प्रसार भारती, सैटेलाइट कम्युनिकेशन प्रोवाइडर और केबल ऑपरेटर सहित 40 अन्य लाइसेंस धारक भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय AGR की परिभाषा में आएंगे।
  • देश में जियो की चुनौती और अन्य कई वजहों से पहले से ही कई टेलीकॉम कंपनियों की हालत खराब थी, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उनके लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। खासकर टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड और एयरटेल को एजीआर की वजह से बड़ा घाटा हुआ है। वोडाफोन आइडिया को दूसरी तिमाही में 50,921 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हुआ है। इसे भारत के कॉरपोरेट इतिहास में सबसे बड़ा तिमाही घाटा बताया जा रहा है।
  • घाटे की बड़ी वजह यह है कि कंपनियों को एजीआर के लिए प्रॉविजनिंग करनी पड़ रही है यानी एक तय राशि अलग रखनी पड़ रही है। वोडाफोन ने संकेत दिए हैं कि भारत में कारोबार लंबे समय से बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है तथा यदि सरकार से राहत नहीं मिली तो वोडाफोन भारत से अपना कारोबार समेट सकती है।

भारत में व्यापार पर प्रभाव :-

  • यह निर्णय प्रथम दृष्टया दूरसंचार बिभाग को लाभान्वित करेगा परन्तु आगे कहीं न कहीं यह भारत में व्यापार को कठिन बना रहा है। इस समय अर्थव्यवस्था संकट के दौर से चल रही है। ऐसे में इस प्रकार के निर्णय अन्य व्यापारियों को हतोत्साहित करेंगे।
  • इस निर्णय से जिओ जैसी कंपनियों का भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में एकाधिकार हो जायेगा जो कालांतर में समस्या उत्पन्न करेगा।

भारतीय जनता पर प्रभाव :-

  • इस निर्णय से वोडाफोन , एयरटेल जैसी कम्पनिया अपनी सेवाओं के मूल्य में वृद्धि करेंगी। संकट काल से गुज़र रहे नागरिको की जेब पर अधिक बोझ पड़ने की सम्भावना है।

निष्कर्ष :-

  • इस समय भारत की अर्थव्यवस्था संकट काल का सामना कर रही है।अतः आर्थिक मामलो पर सम्बेदंशील निर्णय की आवश्यकता है। यह निर्णय निश्चित ही व्यापार सुगमता सूचकांक में भारत की स्थिति में गिरावट लेकर आएगा। अतः सरकार को इस मामले में हस्तछेप कर एक उचित मार्ग तलासना चाहिए।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3
  • अर्थव्यवस्था

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • एजीआर से आप क्या समझते हैं ? हाल ही में एजीआर मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय से विभिन्न हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करें ?