डाउनलोड ओआरएफ (ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन) ऑकेजनल पेपर्स सारांश : भारत - अफ्रीका संबंधो हेतु दस सिद्धांत : भारत की अफ्रीका के प्रति नीति में सामंजस्य


डाउनलोड ओआरएफ (ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन) ऑकेजनल पेपर्स सारांश - जून 2019
(Download The Gist of ORF (Observer Research Foundation) Occasional Papers - June 2019)


Topic: भारत - अफ्रीका संबंधो हेतु दस सिद्धांत : भारत की अफ्रीका के प्रति नीति में सामंजस्य (The Ten Guiding Principles for India-Africa Engagement: Finding Coherence in India’s Africa Policy)

भारत और अफ्रीका ऐतिहासिक रूप से सांस्कृतिक, आर्थिक व राजनीतिक संबंध साझा करते हैं, जो कि समानता के साथ परस्पर विकास की भावना में निहित हैं। 70 वर्षों से भी अधिक घनिष्ठ साझेदारी के बावजूद, भारत की इस महाद्वीप के प्रति कोई सुस्पष्ट व दीर्घकालिक रणनीति नहीं रही है। यह लेख हाल में जारी सरकारी दस्तावेज ‘भारत-अफ्रीका संबंधों हेतु दस सिद्धांत’ क्या संबंधो में मौजूद रिक्तता की पूर्ति करता है, का विश्लेषणात्मक अध्ययन करता है।

परिचय

अफ्रीका एक ऐसा महाद्वीप है, जो कि तीव्र आर्थिक वृद्धि, बढ़ते शैक्षिक व स्वास्थ्य मानक, बढ़ती लैंगिक समानता तथा अवसंरचनात्मक विस्तार की ओर बढ़ रहा है। भारत अफ्रीका के विकास में मदद हेतु स्वाभाविक रूचि रखता है। "समानता के साथ परस्पर विकास" की भावना द्विपक्षीय साझेदारी को परिभाषित करती है। उभरता हुआ अफ्रीका व भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत बनाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं, विशेषतः स्वच्छ तकनीक, जलवायु-अनुकूल कृषि, समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा नीली (ब्ल्यू) अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रें की समस्याओं से निपटने हेतु सहयोग कर सकते हैं।

जुलाई 2018 में, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी राजकीय यात्रा के दौरान युगांडा की संसद को संबोधित किया तथा फ्भारत-अफ्रीका संबंधों हेतु दस सिद्धांतय् दस्तावेज का उद्बोधन किया। प्रधानमंत्री की युगांडा यात्रा के दौरान दिए गए, भारत-अफ्रीका संबंधों को निर्देशित करने वाले सिद्धांत निम्नलिखित हैं:-

  1. "अफ्रीका हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होगा। हम अफ्रीका के साथ सहयोग बढ़ाना जारी रखेंगे। तथा यह सहयोग सतत व नियमित होगा।"
  2. हमारी विकास साझेदारी आपकी प्राथमिकताओं से निर्देशित होगी। आपकी अनुकूल शर्तों पर हमारी साझेदारी होगी जो आपकी क्षमता को स्वतंत्र बनाएगी न कि आपके भविष्य को बाधित करेगी। हम अफ्रीकी योग्यता व कुशलता को प्रोत्साहित करेंगें। हम स्थानीय क्षमता निर्माण के साथ-साथ यथा संभव अनेक स्थानीय अवसरों का सृजन करेंगे।
  3.  हम अपने बाजार को मुक्त रखेंगे तथा भारत के साथ व्यापार करने हेतु इसे इसे सहज और अधिक आकर्षक बनाएंगे हम अफ्रीका में निवेश हेतु अपने उद्योग को समर्थन देंगे।
  4. हम अफ्रीका के विकास को समर्थन देने हेतु, सेवा देने में सुधार के लिए, शिक्षा व स्वास्थ्य सुधार के लिए, डिजिटल साक्षरता विस्तार के लिए, वित्तीय समावेशन के विस्तार के लिए व वंचित लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए डिजिटल क्रांति के अनुभवों का लाभ लेंगे।
  5. अफ्रीका में विश्व की 60 प्रतिशत उपजाऊ भूमि है, लेकिन विश्व उत्पादन में अफ्रीका की हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत है। हम अफ्रीका की कृषि में सुधार हेतु आपके साथ काम करेंगे।
  6. हमारी साझेदारी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के समाधान हेतु भी होगी।
  7. हम आतंकवाद व चरमपंथियों का मुकाबला करने, साइबर सुरक्षा तथा शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र को समर्थन देने में अपने सहयोग व पारस्परिक क्षमताओं को मजबूत बनाएंगे।
  8. हम समुद्री-परिवहन को मुक्त व सभी देशों के लाभ के लिए अफ्रीकी देशों के साथ काम करेंगे। अफ्रीका व हिन्द महासागर के पूर्वी तटों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की आवश्यकता है।
  9. अफ्रीका में वैश्विक सहयोग में वृद्धि को देखते हुए, हम सब को एक साथ काम करना होगा, ताकि अफ्रीका एक बार फिर देशों की बढ़ती प्रतिस्पर्धी आकांक्षाओं का केन्द्र न बने, बल्कि अफ्रीका के युवाओं की आकांक्षाओं का केन्द्र बने।
  10. जिस प्रकार भारत व अफ्रीका ने साथ मिलकर औपनिवेशिक शासन के विरूद्ध लड़ाई लड़ी थी, उसी प्रकार हम एक न्यायोचित, लोकतांत्रिक व प्रतिनिधिमूलक वैश्विक व्यवस्था हेतु, जिसमें अफ्रीका व भारत में रहने वाली वैश्विक आबादी की 1/3 जनसंख्या के हितों को संरक्षित करने हेतु साझा सहयोग करेंगे।

परिचर्चा

1- सर्वोच्च प्राथमिकता देना

भारत अफ्रीका के देशों के साथ भारत-अफ्रीका फोरम सम्मेलन (IAFS) के अंतर्गत एक संरचनात्मक साझेदारी रखता है। मार्च 2018 में भारत सरकार ने IAFS-III के अंतर्गत 2018-2021 तक 4 साल की अवधि में अफ्रीका में 18 नए भारतीय मिशन खोलने को स्वीकृति दी है।

2- अफ्रीकी प्राथमिकताओं द्वारा निर्देशित

अफ्रीका के साथ भारत की विकासात्मक साझेदारी के चार महत्वपूर्ण स्तंभ निम्न हैः भारतीय तकनीकी व आर्थिक सहयोग (ITEC) के तहत क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण, ऋण सहायता (Line of credit), अनुदान सहायता तथा व्यापार व निवेश।

अफ्रीका में चौथा प्रमुख निवेशक होने, सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला, स्थानीय युवाओं हेतु क्षमता-निर्माण को बढ़ाने हेतु भारत, अफ्रीका के साथ बहु-आयामी साझेदारी विकसित करने हेतु कार्य कर रहा है। भारत की ऋण सहायता पोषित परियोजनाओं का प्रभावी व समयबद्ध क्रियान्वयन, इन परियोजनाओं की सबसे बड़ी चुनौती है।

3- मुक्त बाजार व निवेश हेतु उद्योगों को समर्थन

भारत का अफ्रीका के साथ व्यापार पिछले वर्ष की तुलना में 22% की वृद्धि के साथ 2017-18 में 62.66 बिलियन यूएस डॉलर रहा। भारतीय पहल जैसे फोकस अफ्रीका (2002), अल्प विकसित देशों हेतु शुल्क-मुक्त शुल्क अधिमान्य योजना (DFTP), आईएएफएस संस्थान तथा निजी संस्थाएँ जैसे भारतीय उद्योग परिसंघ-एग्जिम बैंक कॉन्क्लेव ने द्विपक्षीय व्यापार व निवेश को नई ऊँचाईयों पर पहुँचाया है। भारत-अफ्रीका व्यापार में मुख्यतः तीन बाधाएँ हैं:

  1. व्यापार हेतु वित्त तक सीमित पहुँच
  2. परिवहन व परिचालन की लागत
  3. बाजार की सीमित सूचना व ज्ञान

निवेश के मुद्दे पर, भारत सरकार अफ्रीका में निवेश का समर्थन करती है, तथा सभी अफ्रीकी देशों को स्वयं के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन हेतु सहयोग करती है। भारत 7% की सतत वार्षिक वृद्धि दर तथा कर-सुधार जैसे वस्तु एवं सेवा कर (GST) के परिणामस्वरूप, एक पारदर्शी व एकीकृत बाजार के रूप में उभरा है।

भारत को अफ्रीका के देशों के साथ निवेश को प्रोत्साहन देने हेतु द्विपक्षीय निवेश संवर्धन तथा संरक्षण समझौता (BIPA) करना आवश्यक है।

4- अफ्रीका की कृषि में सुधार

कृषि क्षेत्र में भारत-अफ्रीका सहयोग की भरपूर संभावनाएँ हैं। इन्क्यूबेशन केन्द्रों के द्वारा कृषि-उद्यमिता को प्रोत्साहन भारत की अफ्रीका के साथ कृषिगत साझेदारी का महत्वपूर्ण भाग है। कृषि सहयोग हेतु मुख्यतः चार प्रकार के संस्थान प्रस्तावित हैं:-

  1. व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान
  2. कृषि-उद्यमिता इन्क्यूबेशन कार्यक्रम
  3. खाद्य-जाँच प्रयोगशालाएं
  4. मृदा जाँच व मृदा स्वास्थ्य कार्ड

दालें, जिनकी भारत में कमी है, आयात की प्रमुख मदें हैं भारत मोजाम्बिक व तंजानिया से आयात करता है। भारत, अफ्रीकी देशों विशेषतः मोजाम्बिक, तंजानिया, केन्या व मालावी में अनुबंध-कृषि (Contract-Farming) की संभावनाएं तलाश रहा है।

5- शांति, प्रतिरक्षा व सुरक्षा सहयोग

शांति व सुरक्षा परंपरागत सैन्य क्षमता व सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, अपितु गैर-परंपरागत चुनौतियों जैसे खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा व प्रवसन से भी संबद्ध है।

अफ्रीका में शांति हेतु वर्तमान में लगभग 6,000 भारतीय सैनिक पाँच शांति अभियानों में सैनिक नीले हेलमेट पहन कर अफ्रीकी लोगों की शांतिपूर्ण भविष्य सुनिश्चित करने हेतु सेवाएं दे रहे हैं।

भारत की सुरक्षा प्रदर्शनियों जैसे डिफेन्स एक्सपो और एयरो इण्डिया में पिछले कुछ वर्षों में अफ्रीकी प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ी हैं।

6- खुले और मुक्त महासागर

सभी देशों के लाभ हेतु भारत व अफ्रीका देश खुले व मुक्त महासागर बनाए रखने हेतु सहयोग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की सागर परियोजना (क्षेत्र में सभी की सुरक्षा व वृद्धि) तथा सागरमाला (पत्तन विकास) परियोजना के साथ एशिया- अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर, हिन्द महासागर के क्षेत्र में निर्णायक साबित हो सकते हैं। भारतीय नौसेना के मानवीय सहायता/आपदा प्रबंधन मिशनों द्वारा अफ्रीकी देश लाभान्वित हो रहे हैं फ्चक्रवात ईदाईय् के बाद चलाया गया ऑपरेशन हाल ही का उदाहरण है।

7- आतंकवाद

भारत तथा अफ्रीका आतंकवाद को मानवता व विकास के लिए एक बड़ी चुनौती मानते है। कई वर्षों से, भारत अफ्रीकी सैनिकों को प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु विभिन्न भारतीय संस्थानों में प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

भारत और अफ्रीका संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौते (CCIT) को पारित कराने हेतु अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग कर रहे हैं।

8- साइबर सुरक्षा व डिजिटल क्रांति

भारत, अफ्रीका तथा अन्य देश नई तकनीक के विकास के कारण नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। साइबर सुरक्षा, डिजिटल अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण भाग है।

भारत का अफ्रीका के साथ डिजिटल क्षेत्र में सहयोग का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं, ‘पैन अफ्रीका ई-नेटवर्क’ (PAeN) प्रोजेक्ट जो कि 2004 में टेली-एजुकेशन व टेली-मेडिसिन हेतु शुरू किया गया।

सितम्बर 2018 में, भारत के विदेश मंत्रलय ने एक नया नेटवर्क प्रोजेक्ट शुरू किया- ई-विद्या भारती तथा ई-आरोग्य भारती।

9- जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटना

जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों ने भारत व अफ्रीका में आर्थिक वृद्धि को दशकों तक नकारात्मक रूप में प्रभावित किया है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र ढाँचागत अभिसमय (UNFCC) के तहत समान जवाबदेही सभी सदस्य देशों के अभीष्ट राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (INDC) में परिलक्षित है, जबकि भारत व अफ्रीका देश जवाबदेहियों में विभेदन को लागू करने पर भी केन्द्रित है।

भारत व अफ्रीका के जलवायु परिवर्तन एजेंडे का एक प्रमुख भाग हरित प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देना है। जलवायु परिवर्तन के प्रति दोनों की प्रतिबद्धताएं भारत के सतत विकास लक्ष्यों (ैक्ळ) व अफ्रीका के एजेंडा 2063 में निहित है।

भारत-अफ्रीका सतत विकास साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण भारत व फ्रांस के नेतृत्व में गठित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (SDG) के माध्यम से परिलक्षित होता है।

10- न्यायोचित, प्रतिनिधि मूलक व लोकतांत्रिक वैश्विक व्यवस्था

भारत-वैश्विक आबादी के 1/6 जनसंख्या के साथ विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र तथा अफ्रीका-यूएन सदस्यों के एक चौथाई से अधिक सदस्यों वाले महाद्वीप, को निर्णय निर्माण मंच से बाहर नहीं रखा जा सकता है।

विकासशील देशों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होना चाहिए तथा वैश्विक संस्थानों में उचित भागीदारी होनी चाहिए।

वैश्विक संस्थानों में लोकतांत्रिक सुधार अनिवार्य है। इसलिए भारत व अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी व अस्थायी सदस्यता हेतु एक-दूसरे का समर्थन किया है।

निष्कर्ष

भारत-अफ्रीका संबंधों को निर्देशित करने वाले दस सिद्धांतों का घोषणापत्र अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों हेतु एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत को प्रत्येक सिद्धांत को कार्यान्वित करने हेतु एक कार्य-योजना तैयार करनी चाहिए।

इन सिद्धांतों पर एक समग्र कार्य योजना द्विपक्षीय व्यापार व निवेश को बढ़ाने में मदद करेगी। भारत व अफ्रीका आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने हेतु BIPA व FTA जैसे आर्थिक ढाँचागत संस्थागत प्रयासों को अपनाना चाहिए। भारत व अफ्रीका के मध्य अधिक जुड़ाव व आम लोगों को जोड़ने हेतु प्रयास करना होगा, जो कि संबंधों के विकास हेतु महत्वपूर्ण है।

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Courtesy: ORF (Observer Research Foundation)