यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: भारत-ताइवान सम्बन्धों में नई ऊर्जा (New Energy in India-Taiwan Relations)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): भारत-ताइवान सम्बन्धों में नई ऊर्जा (New Energy in India-Taiwan Relations)

भारत-ताइवान सम्बन्धों में नई ऊर्जा (New Energy in India-Taiwan Relations)

चर्चा का कारण

  • इस वर्ष भारत और ताइवान अपनी साझेदारी के 25 वर्ष मना रहे हैं। हालाँकि दोनों देशों के मध्य बढ़ते सम्बन्धों को पूर्व में बहुत कम महत्व दिया गया था इसका मुख्य कारण भारत सार्वजनिक रूप से सुधार संबंधी समझौतों को स्वीकार करने में संकोच करता रहा है। अब समय आ गया है कि भारत-ताइवान संबंधों को पुनर्गठित किया जाए।

भारत-ताइवान संबंधों की आवश्यकता

  • राजनीतिक सुदृढीकरण- दोनों देशों के मध्य राजनीतिक सुदृढीकरण के लिए एक शर्त ये है कि दोनों साझेदारों ने सामूहिक विकास के प्रमुख सिद्धांतों के रूप में लोकतंत्र और विविधता के खुलेपन के परस्पर सम्मान को गहरा किया है। स्वतंत्रता, मानवाधिकार, न्याय और कानून के शासन में साझा विश्वास उनकी भागीदारी को और मजबूत करता है। इस रिश्ते को और अधिक सार्थक बनाने के लिए, दोनों पक्ष एक निश्चित समय सीमा में एक रोड मैप बनाने के लिए सशक्त व्यक्तियों के समूह का गठन कर सकते हैं या टास्क फोर्स बना सकते हैं।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र- विदित है कि भारत और ताइवान पहले से ही पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। वर्तमान समय में भी दोनों देशों के लिए स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार करना समय की मांग है। इसके अलावा, नई दिल्ली और ताइपे भी जैविक खेती के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और विकास की पहल कर सकते हैं।
  • भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण, पेट्रोकेमिकल, मशीन, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तथा ऑटो पार्ट्स के क्षेत्र में लगभग 200 ताइवानी कंपनियां कार्यरत हैं।
  • दिल्ली और ताइपे के बीच आपसी प्रयासों ने कृषि, निवेश, सीमा शुल्क सहयोग, नागरिक उड्डयन, औद्योगिक सहयोग और अन्य क्षेत्रों को मजबूत करने वाले कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। जिस पर दोनों देशों को आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
  • वर्ष 2000 में भारत और ताइवान के बीच कुल 1 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ था, वहीं वर्ष 2019 में यह बढ़कर 7.8 बिलियन डॉलर पर पहुँच गया है। वर्ष 2020 में इसे 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
  • ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड (TSMC) एक बहुराष्ट्रीय विनिर्माण और डिजाइन कंपनी है। यह ताइवान की सबसे बड़ी कंपनी है और दुनिया भर में सबसे मूल्यवान सेमीकंडक्टर का निर्माण करती है।
  • इसके अलावा ताइवान हार्डवेयर विनिर्मान, निर्माण खदान अन्वेषण, एलेक्ट्रॉनिक एवं आटोमोबाइल आदि के क्षेत्र अग्रणी है। वहीं भारत सॉफ्रटवेयर के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता है। इन दोनों के सहयोग के माध्यम से मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, तथा कौसल विकास पहल की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

चुनौतियां

  • भारत और ताइवान के मध्य व्यापारिक समझौते के प्रमुख अवरोध के रूप में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर जारी वार्ता में की जाने वाली देरी है जो कई वर्षों से चल रही है। इसे कार्यान्वित किए जाने कि अभी भी कोई व्यापक संभावना नहीं है।
  • दोनों देशों के मध्य व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने में टैक्स संरचना भी एक प्रमुख चुनौती है। कुछ समय पूर्व ही जापान के साथ ताइवान विश्व व्यापार संगठन के विवाद निवारण (Dispute Settlement Panel) में भारत के टैरिफ संरचना के विरुद्ध अपील की गई है।
  • दोनों देशों के मध्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा समेत अन्य वाणिज्य नियमों को भी लेकर गतिरोध हैं क्योंकि आर्थिक नीतियों के संदर्भ में भारत की तुलना में ताइवान के कानून और नियम काफी उदार हैं।
  • ताइवान के बारे में- ताइवान पूर्वी एशिया का एक द्वीप है। तकरीबन 36,197 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस द्वीप की आबादी 23.59 बिलियन के आस-पास है। ताइवान की राजधानी ताइपे है जो कि ताइवान के उत्तरी भाग में स्थित है। ताइवान में बहु-दलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था है। मंदारिन (Mandarin) ताइवान में राजकीय की भाषा है।

निष्कर्ष

  • भारत को इस अवसर का लाभ उठाते हुए मुक्त व्यापार संधि ना सही लेकिन जनरल ट्रेड एग्रीमेंट किया जाना चाहिए क्योंकि ताइवान का अन्य कई देशों के साथ व्यापारिक संबंध पहले से ही है। भारत को चीन को नजरअंदाज कर ताइवान के साथ ट्रेड डील को आगे बढ़ाना चाहिए। जहां ताइवान को एक भारत जैसा विस्तृत बाजार प्राप्त होगा तो वही ताइवान की कंपनियों के विनिर्माण स्थल के रूप में भारत एक शीर्ष गतवन्य स्थल हो सकता है। वहीं दूसरी ओर भारत को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश समेत चीन के व्यापार पर अत्यधिक निर्भरता को हस्तांतरित करने में मदद मिलेगी। दोनों देशों के बीच सहयोग और संबंध बनाने के लिए बहुत कुछ है। जरूरत है रिश्ते को फिर से जीवंत करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की।