यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौता (India-Australia Trade Agreement)

खबरों में क्यों?

  • 2 अप्रैल को भारत और ऑस्ट्रेलिया ने एक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) पर हस्ताक्षर किए। ईसीटीए से पांच वर्षों में दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ाकर 45-50 अरब डॉलर करने की उम्मीद है, जो वर्तमान में 27 अरब डॉलर है, तथा यह 10 लाख से अधिक अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

समझौते के तत्व

  • ईसीटीए में एक प्रस्तावना है और द्विपक्षीय व्यापार को नियंत्रित करने के लिए इसे कई वर्गों में विभाजित किया गया है।
  • ईसीटीए के तहत, भारत अपने घरेलू बाजार में, ऑस्ट्रेलिया के निर्यात को 85% जीरो-ड्यूटी एक्सेस देगा।
  • भारत को पांच वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में अपने निर्यात के लिए जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने लगेगा।
  • माल निर्यात अनुभाग में, "रूल्स ऑफ ओरिजिन" का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य डंपिंग रोधी उपाय करना है।
  • व्यापार विवादों को हल करने के लिए उपाय और तंत्र प्रदान करने के अनुभाग भी शामिल किए गए हैं।
  • यह भारत द्वारा हस्ताक्षरित पहला व्यापार सौदा है जिसमें कार्यान्वयन के 15 वर्षों के बाद अनिवार्य समीक्षा तंत्र का प्रावधान है।

भारत के कृषि बाजार तक पहुंच

  • ईसीटीए के तहत, ऑस्ट्रेलिया को कृषि उत्पादों की कुछ किस्मों जैसे आलू, दाल और मांस उत्पादों को कुछ शर्तों के साथ निर्यात करने का अवसर मिलेगा।
  • गोजातीय मांस समझौते का हिस्सा नहीं है।
  • ऑस्ट्रेलिया इस समझौते के तहत खाद्य प्रसंस्करण के लिए आवश्यक मशीनरी भी भेज सकता है।
  • भारत ऑस्ट्रेलियाई बियर सहित मादक और गैर-मादक पेय की एक विस्तृत श्रृंखला निर्यात कर सकता है।
  • वाइन के क्षेत्र में, दोनों देशों के सहयोग और लाभ सुनिश्चित करने के लिए लिए एक संयुक्त समिति बनाई जा सकती है।

सेवा क्षेत्र के लिए अवसर

  • ऑस्ट्रेलिया ने लगभग 135 उप-क्षेत्रों में "व्यापक प्रतिबद्धताओं" की पेशकश की है और 120 उप-क्षेत्रों में "मोस्ट फेवर्ड नेशन" की पेशकश की है जो आईटी, आईटीईएस, व्यावसायिक सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऑडियो-विजुअल सेवाओं जैसे भारतीय सेवा क्षेत्र के प्रमुख क्षेत्रों को कवर करते हैं।
  • भारतीय रसोइये और योग शिक्षकों को ऑस्ट्रेलिया में विशिष्ट प्रवेश कोटा मिलेगा।
  • ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र पारस्परिक आधार पर 18 महीने से लेकर 4 साल तक की अवधि के लिए वर्क वीजा हासिल करने में सक्षम होंगे।

फार्मास्युटिकल क्षेत्र

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया पेटेंट, जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं के लिए फास्ट ट्रैक अनुमोदन को सक्षम करने के लिए सहमत हुए हैं।
  • दोनों पक्षों के चिकित्सीय सामान नियामकों को दोनों पक्षों के बीच फार्मा उत्पादों में सुचारू व्यापार और निगरानी, सुनिश्चित करने में भूमिका निभानी होगी।
  • दोनों पक्ष उन आयातों के ऑडिट के लिए सहमत हुए हैं जिनमें भूमि के कानून के अनुसार सेनेटरी और फाइटोसेनेट्री निरीक्षण की आवश्यकता होती है।
  • आयात करने वाला पक्ष यह सुनिश्चित करेगा कि पौधों और पौधों के उत्पादों, पशु उत्पादों और अन्य सामानों और उनकी पैकेजिंग का निरीक्षण मान्यता प्राप्त पद्धतियों के माध्यम से किया जाता है।
  • यदि किसी भी पक्ष को गैर-अनुपालन के उदाहरण मिलते हैं, तो दोनों पक्षों द्वारा उपचारात्मक उपाय किए जाएंगे।

विवाद निपटान तंत्र

  • दोनों पक्षों ने परामर्श करने और वस्तुओं या सेवाओं के व्यापार के दौरान उभरने वाले विवादों के मामले में समाधान खोजने के लिए "हर संभव प्रयास" करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के मामले में, वे एक ऐसे संगठन का विकल्प चुन सकते हैं जहां दोनों देश सदस्य हों।
  • वे विवादों को सुलझाने के लिए "अच्छे कार्यालयों" का भी उपयोग कर सकते हैं और सरकार और व्यवसाय के योग्य सदस्यों का पैनल बना सकते हैं।
  • विवाद समाधान समय 45 दिनों से लेकर 15 महीने तक का हो सकता है।

समझौते में रूल्स ऑफ ओरिजिन

  • रूल्स ऑफ ओरिजिन इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि उन्हें "एक या दोनों पक्षों के क्षेत्र में पूरी तरह से प्राप्त या उत्पादित किया जाना चाहिए"।
  • यह खंड सुनिश्चित करता है कि अपशिष्ट सामग्री को किसी भी पक्ष द्वारा निर्यात नहीं किया जाएगा जब तक कि वे ईसीटीए में सूचीबद्ध किसी भी वस्तु के उत्पादन में योगदान नहीं करते हैं।