यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट (Fall in GDP)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट (Fall in GDP)

सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट (Fall in GDP)

चर्चा का कारण

  • केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रलय के अनुसार कोविड-19 महामारी के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को जोरदार झटका दिया है। भारत की पहली तिमाही (अप्रैल-मई -जून) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सालाना आधार पर (-)23.9% की ऐतिहासिक गिरावट आई है। कम उपभोक्ता मांग और घटते निजी निवेश के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस दौरान कृषि क्षेत्र को छोड़कर ज्यादातर गतिविधियां नीचे आ गईं।

प्रमुख बिन्दु

  • 1 990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण के बाद से, भारतीय अर्थव्यवस्था ने हर साल औसतन 7% की जीडीपी वृद्धि दर हासिल की है। इस साल, 7% की जीडीपी वृद्धि दर प्राप्त होने की संभावना नहीं है।
  • अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रें द्वारा जोड़े गए सकल मूल्य (उत्पादन और आय) के संदर्भ में, आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि में ग्रोथ रेट 3.4 जीवीए रही है।
  • सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र निर्माण (-50%), व्यापार, होटल और अन्य सेवाएं (-47%), विनिर्माण (-39%), और खनन (-23%) हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये ऐसे क्षेत्र हैं जो देश में अधिकतम नई नौकरियों का सृजन करते हैं।
  • निजी खपत- भारतीय अर्थव्यवस्था को चलाने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है जो 27% तक गिर गया है। दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र -व्यवसायों द्वारा निवेश है जो कोरोना के कारण और भी कठिन हो गया है। देखा जाये तो निजी खपत और व्यवसाय, जो कुल जीडीपी का 88% से अधिक है, ने बड़े पैमाने पर पहली तिमाही में संकुचन देखा। बीते साल इसी जून तिमाही की दर 5.2 फीसदी थी।

सकल घरेलू उत्पाद

  • किसी अर्थव्यवस्था या देश के लिये सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक निर्धारित अवधि में उस देश में उत्पादित वस्तु और सेवाओं का कुल मूल्य होता है। यह अवधि आमतौर पर एक साल की होती है।
  • जीडीपी में सभी निजी और सार्वजनिक खपत, निवेश, सरकारी परिव्यय, निजी आविष्कार, भुगतान-निर्माण लागत और व्यापार का विदेशी संतुलन शामिल है। सीधे शब्दों में कहें, तो जीडीपी एक देश की समग्र आर्थिक गतिविधि का एक व्यापक माप है।
  • जीडीपी के डेटा को आठ क्षेत्रें से इकट्टòा किया जाता है- इनमें कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी, गैस सप्लाई, माइनिंग, क्वैरीइंग, वानिकी और मत्स्य, होटल, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड और कम्युनिकेशन, फाइनेंसिंग, रियल एस्टेट और इंश्योरेंस, बिजनेस सर्विसेज और कम्युनिटी, सोशल और सार्वजनिक सेवाएँ शामिल हैं।

जीडीपी का डाटा अहम क्यों

  • ज ब अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती है, तो कारोबारी और ज्यादा पैसा निवेश करने के साथ उत्पादन को बढ़ाते हैं,लेकिन जब जीडीपी के आँकड़े कमजोर होते हैं, तो निवेश में कमी देखने को मिलती है। इससे आर्थिक विकास और सुस्त हो जाता है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि जीडीपी डेटा में असंगठित क्षेत्र की स्थिति का पता नहीं चलता है जो देश के 94 फीसदी रोजगार का उत्तरदायित्व उठाता है।

प्रभाव

  • ज ब आय में तेजी से गिरावट होती है, तो निजी कंपनी खपत में कटौती करती हैं। जब निजी खपत तेजी से गिरती है, तो व्यवसाय करने वाले संस्थान निवेश करना बंद कर देते हैं। चूंकि ये दोनों स्वैच्छिक निर्णय हैं, इसलिए लोगों को वर्तमान परिदृश्य में अधिक निवेश करने के लिए या व्यवसायों पर खर्च करने के लिए मजबूर करने का कोई तरीका नहीं है। यही तर्क निर्यात और आयात के लिए भी है।
  • व्यापार ,होटल खनन इत्यादि क्षेत्र में उत्पादन और आय गिर रही है जिससे रोजगार में गिरावट हो रही है परिणामस्वरूप बेरोजगारी में वृद्धि होगी। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दूसरे एशियाई देशों के मुकाबले रिकवरी करने में भारत को ज्यादा वक्त लग सकता है।
  • इन सभी परिस्थितियों में जब सरकार जब अधिक खर्च करती है तो अर्थव्यवस्था में गिरावट मध्यम अवधि के लिए हो सकती है। इसके विपरीत यदि सरकार पर्याप्त खर्च नहीं करती है तो अर्थव्यवस्था को ठीक होने में लंबा समय लगेगा। इस प्रकार सरकार को संसाधनों को उत्पन्न करने के लिए कुछ नवीन समाधानों के बारे में सोचना होगा।