यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: घोषित विदेशी और विदेशी अधिकरण (A Declared Foreigner and Foreigners' Tribunal)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): घोषित विदेशी और विदेशी अधिकरण (A Declared Foreigner and Foreigners' Tribunal)

घोषित विदेशी और विदेशी अधिकरण (A Declared Foreigner and Foreigners' Tribunal)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये आदेश के बाद से असम के बराक घाटी में निरोध केंद्र से लाभार्थी के रूप में रिहा होने वाले सिद्दकी अली अंतिम घोषित विदेशी बन गए हैं।

वर्तमान स्थिति

  • इस साल अप्रैल में कोविड-19 महामारी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने उन बंदियों को रिहा करने का निर्देश दिया था जिन्हें विदेशी घोषित किया गया था और दो साल या उससे अधिक समय से असम के हिरासत केंद्रों में रखा गया था।
  • इसके लिए कोर्ट ने व्यत्तिफ़गत बॉन्ड राशि को भी 1 लाख रुपये से घटाकर 5,000 रुपये कर दिया था। 13 अप्रैल से अब तक 339 घोषित विदेशियों को निरोध केंद्रों से मुक्त किया जा चुका है।

घोषित विदेशी

  • घोषित विदेशी (Declined Foreigner), के रूप में उस व्यक्ति को चिह्नित किया जाता है जिसे 100 विदेशी अधिकरण (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) में से किसी एक द्वारा पहचान की गई हो, जो राज्य पुलिस की बॉर्डर विंग द्वारा अवैध नागरिक के रूप में चिह्नित करने के बाद अपनी नागरिकता साबित करने में विफल रहता है।

घोषित विदेशियों की स्थिति

  • गौरतलब है कि असम के विभिन्न निरोध केंद्रों में कुल 802 घोषित विदेशी हैं।
  • कुछ लोगों को खराब दस्तावेज या खराब कानूनी सहायता और संसाधनों की कमी के कारण विदेशी घोषित कर दिया जाता है क्योंकि वे साबित करने में सक्षम नहीं होते हैं कि वे भारतीय नागरिक हैं।
  • इनमें से कुछ उच्च न्यायालयों में अपने मामलों को आगे बढ़ाने हेतु समर्थ नहीं होते है या उनकी अपीलों को ठुकरा दिया गया है।
  • 2016 के बाद से विभिन्न बीमारियों के कारण 29 घोषित विदेशियों की मौत हो चुकी है, जिनमें से दस की मौत मार्च, 2019 और फरवरी 2020 के बीच हुई है।

विदेशी ट्रिब्यूनल क्या है?

  • विदेशी (अधिकरण) आदेश, 1964 को केंद्र सरकार ने विदेशी अधिकरण अधिनियम, 1946 की धारा 3 के तहत जारी किया था। इस आदेश में प्रमुख रूप से साल 2013 में संशोधन किये गए।
  • असम में वर्तमान में 100 विदेशी अधिकरण हैं, इसके अलावा 200 से अधिक विदेशी अधिकरणों को बनाने सम्बन्धी प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है।

विदेशी अधिकरण की सदस्यता

  • उसे असम न्यायिक सेवा का सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी होना चाहिए
  • इसके अलावा न्यायिक अनुभव रखने वाला सिविल सेवक जो सचिव या अतिरिक्त सचिव के पद से नीचे सेवानिवृत्त नहीं हुआ हो या फिर
  • प्रैक्टिस करता हुआ एक वकील जिसकी उम्र 35 (पैंतीस)वर्ष से कम न हो और जिसे कम से कम सात वर्ष के अभ्यास का अनुभव हो।
  • इसके अलावा उसे असम (असमिया, बंगाली, बोडो और अंग्रेजी) की आधिकारिक भाषाओं की अच्छी समझ भी होनी चाहिए।
  • इसके अलावा विदेशी मामलों का भी अनुभव होना चाहिए।
  • वे लोग जिनका नाम नागरिकता रजिस्टर में नहीं है वे इन अधिकरणों में संपर्क कर सकते हैं। इसके बावजूद अगर कोई व्यत्तिफ़ ट्रिब्यूनल के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वो इसके िखलाफ आगे अपील कर सकता है।
  • व्यक्ति की नागरिकता एक बुनियादी मानवाधिकार है। न्यायिक रूप से अपनी पहचान को सत्यापित किये बिना जल्दबाजी में लोगों को विदेशी घोषित करना बहुत से नागरिकों को राज्यविहीन (Stateless) कर देगा, अतः जो लोग सूची में शामिल नहीं हो पाते हैं उन्हें पर्याप्त कानूनी सहायता दी जानी चाहिये।