यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - III (सामान्य अध्ययन-2: शासन व्यवस्था, संविधान शासन-प्रणाली, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध) - 29, जून 2020


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • पेपर III: सामान्य अध्ययन II: (शासन व्यवस्था, संविधान शासन-प्रणाली, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न - नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइप लाइन (NIP) के लाभों का उल्लेख करते हुए, परीक्षण कीजिए कि, यह किस प्रकार से भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनः तीव गति प्रदान करने में सहयोगी हो सकती है? (250 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों है?
  • प्रस्तावना
  • मुख्य भाग
  • नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइप लाइन परियोजना
  • परियोजना के लाभ
  • यह भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनः तीव्र गति प्रदान करने में किस प्रकार सहयोगी है?
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

हाल ही में केन्द्रीय वित्तमंत्री द्वारा राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन से जुड़ी विषय-वस्तु पर एक रिर्पोट पेश की गई है। इसमें उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024-25 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जी डी पी के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को इस अवधि के दौरान अवसंरचना या बुनियादी दांचागत सुविधाओं पर लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने होंगे।

प्रस्तावना

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था की गति मन्द पड़ गई हैं। इसके साथ ही विभिन्न वैश्विक रेटिंग ऐजेंसीयों द्वारा भारत की जी. डी. पी. की वृद्धि दर में कमी का अनुमान किया गया है। वहीं भारतीय रिर्जव बैंक द्वारा भी देश की वृद्धि दर को कम किया गया है। वर्तमान में भारत की वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत के आस-पास है। भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण 8 क्षेत्रों में भी सुस्ती देखी जा सकती है।

नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइप लाइन

  • अवसंरचना में सुधार लाने के लिए हाल ही में भारत सरकार ने आने वाले 5 वर्षों में 102 लाख करोड़ रूपये खर्च करने की घोषणा की है। अवसंरचना में यह निवेश विभिन्न सेक्टरों से संबंधित है, जैसे ऊर्जा, शहरीकरण, रेलवे, सड़क आदि। इसके लिए सरकार ने एक शस्क फोर्स का गठन भी किया है। इस ट्रास्क फोर्स के गठन का उद्देश्य उपरोक्त परियोजनाओं की पहचान करना है।
  • वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बदलती जनसांख्यिकी रूपरेखा की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तथा नये बुनियादी संरचनाओं के विकास तथा पुराने बुनियादी संरचनाओं में सुधार वर्तमान समय की आवश्यकता है।

परियोजना के लाभ

इस परियोजना से निम्नलिखित लाभ होंगे -

  • अर्थव्यवस्था - सही तरीके से नियोजित एन. आई. पी. और अधिक बुनियादी परियोजनाओं को सक्षम बनाएगा, व्यवसायों में वृद्धि होगी, विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा, लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा तथा सभी के लिए बुनियादी ढाँचे की पहुँच सुनिश्चित होगी। इस प्रकार विकास और अधिक समावेशी होगा।
  • सरकार - अच्छी तरह से विकसित बुनियादी ढांचा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, सरकार को विभिन्न क्षेत्रों से और अधिक आयकर की प्राप्ति होगी, इससे वित्तीय स्थिरता आयेगी तथा उत्पादक क्षेत्रों में केन्द्रित व्यय बुनियादी संरचना में सुधार के साथ-साथ गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
  • डेवलपर्स - एन. आई. पी. से परियोजना आपूर्ति के बारे में बेहतर दृष्टिकोण का विकास होगा। किसी भी परियोजना में बोली लगाने के बेहतर तरीके तैयार होंगें। निवेशकों के आत्म विश्वास में वृद्धि होगी। जिसके परिणामस्वरूप आम लोगों की वित्तीय स्रोत्रों तक पहुँच सुनिश्चित होगी।
  • बैंक/वित्तीय संस्थान - अच्छे तरीके से तैयार एन. आई. पी. बैंकों के विश्वास में वृद्धि करेगा, इससे जिन परियोजनाओं की पहचान की जाएगी, वे परियोजनाएं बेहतर तरीके से तैयार होगी।
  • मांग में वृद्धि - बुनियादी संरचना में सुधार होने से रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे, रोजगार के अवसर प्राप्त होने से लोगों की आय में वृद्धि होगी।

यह भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनः तीव्र गति प्रदान करने में किस प्रकार सहयोगी है ?

विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने की आवश्यकता है जब अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही होती है तो उसको निम्नलिखित 5 तरीकों से गति प्रदान की जा सकता है।

  • निजी अंतिम उपभोग व्यय
  • सरकारी अंतिम उपभोग व्यय
  • सकल निश्चित निजी पूंजी निर्माण
  • सकल निश्चित सार्वजनिक पूंजी निर्माण
  • शुद्ध निर्यात
  • निजी अन्तिम उपभोग व्यय अर्थात् लोग अपने उपभोग व्यय में वृद्धि करे लेकिन वर्तमान समय में लोगों के पास पर्याप्त पूंजी का अभाव है। बुनियादी संरचना में सुधार से रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे जिससे लोगों के पास पूंजी आयेगी जिसके परिणामस्वरूप उपभोग बढ़ेगा।
  • सरकारी अन्तिम उपभोग व्यय अर्थात् सरकार अपने खर्च में वृद्धि करें। सरकार यदि बुनियादी ढ़ांचें में निवेश करती है तो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है जिससे वित्तीय स्थिरता आती है।
  • सकल निश्चित निजी पूंजी निर्माण अर्थात् इस क्षेत्र में निजी उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। निवेशकों में निवेश के लिए विश्वास बढ़ता है जिसके पश्चात् रोजगार सृजन में सहायता मिलती है और लोगों की वित्तीय स्रोत्रों तक पहुँच सुनिश्चित हो जाती है।
  • सकल निश्चित सार्वजनिक पूंजी निर्माण इस मद में सरकार द्वारा कोई कंपनी स्थापित की जाती है या किसी अवसंरचना का निर्माण किया जाता है या किसी अवसंरचना का निर्माण किया जाता है उदाहरण किसी पुल/सेतु का निर्माण। इस परियोजना में सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2020-2025 के मध्य 102 लाख करोड़ व्यय करने का अनुमान है जिससे मांग में वृद्धि होगी।
  • इससे बैंकों में वित्तीय पूंजी बढ़ेगी, जिससे लोगों का इन संस्थानों में विश्वास बढ़ेगा, बेहतर परियोजना में निवेश से आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा जिससे जी. डी. पी. में भी सुधार संभव है।

निष्कर्ष -

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के माध्यम से भारत में अवसंरचना ढांचे में व्याप्त कमियों को दूर किया जा सकेगा। भारत में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बुनियादी संरचना में सुधार होगा, साथ ही गुणवत्ता में भी सुधार होगा, इस प्रकार जी. डी. पी. में भी वृद्धि होगी। अतः आधारभूत संरचनाओं के विकास के साथ ही सतत विकास लक्ष्यों को भी प्राप्त करने की आवश्यकता है।

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