यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - II (सामान्य अध्ययन-1: भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज) - 09, अक्टूबर 2019


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-2: सामान्य अध्ययन-1: (भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज)

प्रश्न - वर्तमान भारतीय परिदृश्य में महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए | ( 250शब्द)

मॉडल उत्तर:

चर्चा में क्यो?

हाल ही में 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती मनाई गई।

वर्तमान समय में गाँधी की प्रासंगिकता

महात्मा गाँधी के विचार केवल गाँधी युग तक ही प्रासंगिक नहीं थे अपितु उनके विचारों की प्रासंगिकता वर्तमान परिप्रेक्ष्य में और बढ़ जाती है। आज समाज में हिंसा, लूट-पाट, हत्या, बलात्कार जैसी आपराधिक प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं। मानव इतना स्वार्थी हो गया है कि वह पराए तो क्या अपने संबंधियों की भावनाओं को भी ठेस पहुँचाने में संकोच नहीं कर रहा है। ऐसे में गाँधीजी के विचारों का आलोक ही हमें उचित मार्ग-दर्शन और प्रेरणा दे सकता है, जिसे निम्न शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है

राजनीति के क्षेत्र में:

वर्तमान राजनीति में भ्रष्टाचार, अपराध और अनैतिकता का साम्राज्य चारों ओर व्याप्त है। इसके अलावा नेताओं की छवि धूमिल हुई है और सामान्य जनता का राजनीति एवं राजनीतिक व्यक्तित्व से मोह भंग हुआ है। आज नेता केवल सत्ता और वोटों की राजनीति करते हैं। इसके लिये वे साम, दाम, दण्ड, भेद सभी का प्रयोग करते हैं।

सामाजिक क्षेत्र में: 

समाज में व्याप्त घृणा, आतंक, प्रतिरोध के वातावरण में गाँधी के विचारों का महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है।

  • आज पूरा विश्व शरणार्थियों की समस्या, धार्मिक टकराव, सांप्रदायिकता, कट्टरता जैसे- ISIS द्वारा फैलाया गया हिंसा आदि से ग्रसित हो गया है। एक भीड़ को धार्मिक उन्माद का रूप दे देना अत्यंत सरल हो गया है जिसके चलते मॉब लीचिंग जैसी घटनाएँ बढ़ी हैं। इसके अतिरिक्त मानव संवेदना तथा भावना शून्य होते जा रहे हैं जिसके कारण एक वर्ग को दूसरे के प्रति भड़काना आसान हो गया है। इन सारी समस्याओं का कारगर इलाज गाँधीवाद सिद्धांतों से ही संभव हो सकता है।

स्वच्छता के क्षेत्र में:

  • जन सरोकारों से जुड़े लगभग हर संबोधन में गाँधी जी स्वच्छता के मामले को उठाते थे। उनका मानना था कि नगरपालिका का सबसे महत्वपूर्ण कार्य सफाई की व्यवस्था करना है। वे स्वच्छता को ईश्वर की भक्ति के बराबर मानते थे। वे चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें।
  • उल्लेखनीय है कि वर्तमान सरकार गाँधीवादी दर्शन से प्रभावित होकर स्वच्छ भारत अभियान चला रही है। इस अभियान के अंतर्गत 2 अक्टूबर 2019 तक 'स्वच्छ भारत' की परिकल्पना को साकार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

आर्थिक क्षेत्र में:

  • गाँधी जी आर्थिक विकेन्द्रीकरण के पक्षधर थे। दरअसल इससे संसाधनों का केन्द्रीकरण होने की संभावना कम होती है।
  • हाल ही में 'वर्ल्ड इनिक्वेलिटी लैब-2018 द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 1% लोगों के पास दुनिया की कुल दौलत का 13% हिस्सा है। इसके अलावा पिछले 36 वर्षों में जो नई संपत्तियाँ सृजित की गईं, उनमें से भी 27% पर सिर्फ 1% अमीरों का ही अधिकार है।

शिक्षा क्षेत्रः

  • आधुनिक भारत के निर्माण में महात्मा गाँधी का बहुआयामी योगदान रहा है। गाँधीजी की शिक्षा संबंधी विचारधारा उनके नैतिकता तथा स्वावलंबन संबंधी सिद्धांतों पर आधारित थी। 'हरिजन' पत्रिका तथा 'वर्धा शिक्षा' योजना में निहित उनके विचारों के माध्यम से इसे देखा जा सकता है।
  • वर्तमान में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य रोजगार प्राप्त करना हो गया है। हम केवल व्यावसायिक शिक्षा को ही महत्त्व दे रहे हैं जिसका परिणाम यह हुआ कि नैतिक मूल्यों में गिरावट आयी है और आज का युवा वर्ग नैतिक रूप से कमजोर होता जा रहा है। परिवार बिखरने लगे हैं, राष्ट्र के प्रति तथा उसकी संस्थाओं के प्रति सम्मान में कमी आने लगी है।

युवाओं का मार्गदर्शनः

  • आज के युवा को अपने निजी और सामाजिक जीवन में तरह-तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चौतरफा अवसरवाद और भ्रष्टाचार को देखकर युवाओं को लगता है कि सत्य और कठोर परिश्रम अपने आप में सफलता के लिए अपर्याप्त हैं।
  • ऐसे में गाँधी अपने कर्तव्यों के प्रति विमुख ऐसी युवा पीढ़ी को सजगता और भोग की बजाय सादगी में संतोष और आनंद का रास्ता दिखाते हैं। युवकों को यह समझना और जानना चाहिए कि स्वार्थ और भोग को महत्ता देने वाला जीवन समाज से ही नहीं, बल्कि हमें अपने तक से दूर कर देता है। दूसरी तरफ, यदि हम अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहें और सादगी को जीवन-यात्रा का आधार बनाएं, तो चरित्रहीनता, स्वार्थ और भ्रष्टाचार जैसे खतरे अपने आप हमारा पीछा छोड देंगे।

विश्व शांति के क्षेत्र में:

  • आज जबकि विश्व के लगभग सभी देश अशांति से जूझ रहे हैं। साथ ही, परमाणु तथा जैविक हथियारों का संभावित प्रयोग मानवता के लिए खतरा बन गया है। विज्ञान के प्रयोग ने हमारे जीवन को सुखमय अवश्य बनाया है परंतु इसके ऋणात्मक प्रभाव को भी नकारा नहीं जा सकता है।
  • मानव समाज भौतिक सखों के पीछे भाग रहा है और आत्मिक सुखों की अनदेखी कर रहा है। यही कारण है कि उन्नति व प्रगति के कारण भी समाज में तथा मानव जीवन में रिक्तता का अनुभव हो रहा है। यह रिक्तता तभी पूर्ण हो सकती है, जब मानव स्वयं इस पर चिंतन मनन करें और यह चिंतन आशावादी आत्मिक सुखों की दिशा में होना चाहिए। इस संदर्भ में गाँधी जी के नैतिक सिद्धांत काफी कारगर हो सकते हैं।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि महात्मा गाँधी 20वीं शताब्दी के दुनिया के बड़े राजनीतिक नेताओं में से एक थे। वे पूरी दुनिया में शांति, प्रेम, अहिंसा, सत्य, ईमानदारी, मौलिक शुद्धता जैसे हथियारों के सफल प्रयोगकर्ता के रूप में याद किये जाते हैं। इन्हीं हथियारों के बल पर उन्होंने भारत को आजाद कराने में मुख्य भूमिका निभाई। आज दुनिया के किसी भी देश में जब कोई शांति मार्च निकालता है या अत्याचार व हिंसा का विरोध किया जाता है, तो ऐसे सभी अवसरों पर पूरी दुनिया को गाँधी याद आते हैं। गाँधी जी ने स्वयं कहा था कि "गाँधी मर सकता है पर गाँधीवाद कभी नहीं मर सकता", जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सही साबित होता दिख रहा है।

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