सन्दर्भ:
हाल ही में लोकसभा और राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पास हुआ।
वक्फ क्या है?
- वक्फ एक इस्लामी परंपरा और कानून पर आधारित व्यवस्था है, जिसमें कोई मुस्लिम व्यक्ति धार्मिक या परोपकारी उद्देश्यों के लिए अपनी संपत्ति का दान करता है।
- यह दान मस्जिद, स्कूल, अस्पताल या अन्य जनसेवा से जुड़े संस्थान स्थापित करने के लिए किया जाता है।
- वक्फ की गई संपत्ति को बेचा, उपहार में दिया, विरासत में सौंपा या गिरवी नहीं रखा जा सकता।
- एक बार वक्फ की घोषणा हो जाने के बाद, संपत्ति वाक़िफ़ (दानदाता) से अलग हो जाती है और इस्लामिक मान्यता के अनुसार वह संपत्ति ईश्वर (अल्लाह ) की मानी जाती है, जो हमेशा के लिए सुरक्षित रहती है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी?
यह विधेयक वक्फ संपत्तियों से जुड़ी विभिन्न जटिलताओं और समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से लाया गया है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी के आरोप लगते रहे हैं।
2. वक्फ भूमि के अधूरे सर्वेक्षण और रिकॉर्ड में अनियमितताओं के कारण स्वामित्व को लेकर विवाद उत्पन्न होते हैं।
3. मुस्लिम महिलाओं को वक्फ संपत्तियों में समुचित अधिकार और हिस्सा न मिलना, जो लैंगिक समानता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
4. वक्फ भूमि पर अवैध कब्जे और उनसे जुड़े लंबित मुकदमे, जिनका समाधान समय पर नहीं हो पाता।
5. वक्फ बोर्डों द्वारा मनमाने ढंग से संपत्तियों को वक्फ घोषित करना, जिससे कानूनी और सामाजिक विवाद बढ़ते हैं।
6. सरकारी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित करने से संबंधित लगातार बढ़ते विवाद।
7. वक्फ संपत्तियों के लेखा-जोखा, ऑडिट और वित्तीय पारदर्शिता की गंभीर कमी।
8. प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
9. वक्फ ट्रस्ट की संपत्तियों का उद्देश्यपूर्ण और प्रभावी उपयोग न होना।
10. केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्डों में सभी हितधारकों का समुचित प्रतिनिधित्व न होना, जिससे निर्णय प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण मानी जाती है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के मुख्य प्रावधान
1. गैर-मुस्लिम संपत्तियों को वक्फ घोषित करने पर रोक: यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने का प्रयास करता है। साथ ही, यह ऐतिहासिक धरोहरों और नागरिकों की निजी संपत्ति के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है। विभिन्न राज्यों में इस मुद्दे पर उत्पन्न विवादों और कानूनी संघर्षों को ध्यान में रखते हुए यह प्रावधान जोड़ा गया है।
2. मुस्लिम महिलाओं और उत्तराधिकारियों के अधिकार: इस विधेयक का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं ‘विशेष रूप से विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं’ की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति सामाजिक स्थिति को सुधारना है। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों और आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
3. प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता: विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन को संगठित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में अनेक कदम उठाता है, जैसे:
o संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
o वक्फ बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना
o सभी हितधारकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
4. समावेशी प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण: विधेयक वक्फ बोर्डों को मुस्लिम समुदाय के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कदम बढ़ाता है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक लोकतांत्रिक और समावेशी बन सके। यह पिछड़े वर्गों और अन्य उपेक्षित समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में भी सहायक सिद्ध होगा।
निष्कर्ष:
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन हेतु एक धर्मनिरपेक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी प्रणाली की स्थापना करना है। यह विधेयक न केवल संबंधित हितधारकों को सशक्त बनाता है, बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रभावी प्रबंधन और सुसंगठित संचालन को भी सुनिश्चित करता है।
इसके माध्यम से एक ऐसा न्यायसंगत और प्रगतिशील ढांचा तैयार किया जा सकेगा जो धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से संतुलन बनाए रखते हुए समावेशी विकास की दिशा में योगदान देगा।