संदर्भ:
हाल ही में, बायोलम्पिवैक्सिन (BIOLUMPIVAXIN) नामक वैक्सीन को भारत की औषधि नियामक संस्था, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से मंजूरी मिली है।
बायोलम्पिवैक्सिन के बारे में-
- यह दुनिया की पहली लंपी स्किन डिजीज (LSD) वैक्सीन है, जिसे भारत बायोटेक और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने मिलकर विकसित किया है।
- इस वैक्सीन का गहन परीक्षण ICAR-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स (ICAR-NRCE) हिसार और भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में किया गया है, ताकि इसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को वैश्विक मानकों के अनुसार सुनिश्चित किया जा सके।
- यह एक स्वदेशी लाइव-एटेन्यूएटेड (जीवित-निर्बलित) मार्कर वैक्सीन है, जिसे ICAR-NRCE द्वारा विकसित LSD वायरस/Ranchi/2019 स्ट्रेन और भारत बायोटेक की बायोवेट कंपनी के सहयोग से बनाया गया है।
लंपी स्किन डिजीज (LSD) क्या है?
लंपी स्किन डिजीज एक तेजी से फैलने वाली वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गायों और भैंसों को प्रभावित करती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:
- तेज बुखार
- त्वचा पर सूजन और गांठें
- लसीका ग्रंथियों (Lymph Nodes) में सूजन
- दूध उत्पादन में कमी
यह बीमारी डेयरी उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। 2022 के प्रकोप में, इसका संक्रमण दर 80% तक पहुंच गया था और मृत्यु दर 67% तक दर्ज की गई थी। यह मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों और किलनी जैसे कीड़ों से फैलती है।
भारत में पहली बार 2019 में यह बीमारी फैली, और जल्द ही गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में फैल गई। इसके कारण दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई और ₹18,337 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ।
वैक्सीन क्या होती है?
वैक्सीन एक जैविक उत्पाद (Biological Preparation) है, जो शरीर को किसी विशेष संक्रामक बीमारी से लड़ने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है। इसमें ऐसे घटक होते हैं, जो किसी बीमारी फैलाने वाले वायरस या बैक्टीरिया से मिलते-जुलते होते हैं, जैसे:
- कमजोर या निष्क्रिय (Inactivated) वायरस/बैक्टीरिया
- उसके विषाक्त पदार्थ (Toxins)
- उसके सतही प्रोटीन (Surface Proteins)
वैक्सीन लगाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को उस बीमारी के खिलाफ सुरक्षा मिलती है।
वैक्सीन कैसे काम करती है?
वैक्सीन प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को सक्रिय करती है, ताकि वह किसी विशेष वायरस या बैक्टीरिया को पहचान सके और उससे लड़ सके।
1. प्रारंभिक संक्रमण और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया:
o जब कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है, तो यह तेजी से बढ़ता है और संक्रमण फैलाता है।
o शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (Immune System) इसे पहचानने और नष्ट करने में समय लेती है।
2. मेमोरी सेल्स का निर्माण:
o जब शरीर इस संक्रमण से लड़कर ठीक हो जाता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली "मेमोरी सेल्स" (Memory Cells) बनाती है, जो इस वायरस को पहचान कर भविष्य में उससे तेजी से लड़ सकती हैं।
3. भविष्य में तेज प्रतिक्रिया:
o अगर वही वायरस दोबारा शरीर में आता है, तो रोग प्रतिरोधक प्रणाली तुरंत सक्रिय होकर एंटीबॉडी बनाती है, जिससे संक्रमण नहीं फैलता या बहुत हल्का असर होता है।
निष्कर्ष:
बायोलम्पिवैक्सिन की मंजूरी लंपी स्किन डिजीज को रोकने में एक बड़ी उपलब्धि है। यह वैक्सीन गायों और भैंसों की सेहत की सुरक्षा के साथ-साथ डेयरी उद्योग की स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करेगी। इससे बीमारी का प्रभाव कम होगा, दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।