संदर्भ:
हाल ही में त्वचा रोगों का कारक एक कवक, ट्रिकोफाइटन इंडोटिनिया, त्वचा रोग विशेषज्ञों के बीच विवाद का केंद्र बन गया है। तीस से अधिक त्वचा रोग विशेषज्ञों ने इस कवक का नाम बदलने का आह्वान किया है क्योंकि इसका नाम मूलतः भारत के नाम पर रखा गया था। उनका तर्क है कि यद्यपि इस रोगजनक की पहली पहचान भारत में हुई थी, किंतु अब इसे विश्व के 40 से अधिक देशों में रिपोर्ट किया गया है। इस तथ्य के बावजूद कि भारत इसके मूल देश होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
त्रिकोफाइटन इंडोटिनिया के बारे में:
· त्रिकोफाइटन इंडोटिनिया एक कवक (fungus) है जो डर्मेटोफाइट समूह से संबंधित है। यह समूह उन कवकों का है जो त्वचा, बालों और नाखूनों के ऊपरी हिस्से में संक्रमण पैदा करते हैं। डर्मेटोफाइट्स के कारण होने वाले संक्रमण को डर्मेटोफाइटोसिस (dermatophytosis) कहते हैं। टी. इंडोटिनिया के कारण होने वाले डर्मेटोफाइटोसिस में सूजन, खुजली और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये चकत्ते आमतौर पर कमर, गुदा, धड़ और चेहरे पर होते हैं। यह संक्रमण किसी भी उम्र या लिंग के व्यक्ति को हो सकता है।
· सन 2020 में, एक जापानी शोध दल ने भारत और नेपाल से इस कवक के नमूने एकत्र किए थे। वैज्ञानिकों की एक सामान्य प्रथा के अनुसार, किसी नए रोगजनक (pathogen) का नाम उस देश के नाम पर रखा जाता है जहां उसकी पहली खोज होती है। इसलिए, इस कवक का नाम इंडोटिनिया रखा गया था। लेकिन अब यह कवक 40 से अधिक देशों में पाया गया है, इसलिए त्वचा रोग विशेषज्ञ इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस कवक का नाम भारत के नाम पर रखना उचित है, क्योंकि भारत इसके मूल देश होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
संक्रमण और उपचार:
त्रिकोफाइटन इंडोटिनिया एक कवक है जो त्वचा, बालों और नाखूनों में संक्रमण पैदा करता है और यह मुख्य रूप से सीधे त्वचा के संपर्क में आने या दूषित वस्तुओं (जैसे तौलिए, कपड़े) के माध्यम से फैलता है। इस कवक की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह अधिकांश एंटिफंगल दवाओं, विशेष रूप से टेरबिनाफिन, के प्रति प्रतिरोधी हो गया है। टेरबिनाफिन आमतौर पर इस तरह के संक्रमणों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पहली पंक्ति की दवा होती है। इस प्रतिरोध के कारण, टी. इंडोटिनिया के कारण होने वाले संक्रमणों का इलाज करना बहुत मुश्किल हो गया है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य पर एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
उपचार के विकल्प :
ऐतिहासिक रूप से, डर्मेटोफाइट संक्रमण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पहला उपचार ग्रिसोफुल्विन था, जिसे 1958 में पेश किया गया था। ग्रिसोफुल्विन माइक्रोट्यूब्यूल को बाधित करके फंगल कोशिका विभाजन में हस्तक्षेप कर काम करता है। डर्मेटोफाइट संक्रमण के लिए आधुनिक उपचार विकल्पों में एंटिफंगल एजेंट जैसे टेरबिनाफिन (एक एलीलामाइन) और इट्राकोनाज़ोल (एक ट्राइज़ोल) शामिल हैं। ये दवाएं आमतौर पर मौखिक चिकित्सा के लिए उपयोग की जाती हैं, हालांकि टी. इंडोटिनिया जैसे रोगज़नकों का प्रतिरोध प्रभावी उपचार के लिए एक चुनौती पेश करता है।