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Blog / 04 Apr 2025

सेंटीनेली जनजाति

संदर्भ:-

हाल ही में 24 वर्षीय अमेरिकी नागरिक की उत्तर सेंटीनेल द्वीप में अवैध रूप से घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तारी ने फिर से दुनिया से अलग-थलग रहने वाली जनजातियों में से एक, सेंटीनेली जनजाति को लेकर चर्चा में ला दिया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित यह जनजाति सदियों से बाहरी दुनिया से संपर्क से बचती रही है।

सेंटीनेली जनजाति के बारे में-

  • सेंटीनेली जनजाति को दुनिया की सबसे प्राचीन मानव जातियों में से एक माना जाता है। वे हजारों सालों से उत्तर सेंटीनेल द्वीप पर पूरी तरह अलग रह रहे हैं।
  • वे आजीविका के लिए शिकार और मछली पर निर्भर रहते हैं जबकि खेती या पशुपालन का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
  • इनकी जनसंख्या 50 से 200 के बीच मानी जाती है, लेकिन सटीक संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सका है।
  • इनकी भाषा अज्ञात और अवर्गीकृत है।
  • वे बाहरी दुनिया से संपर्क को खतरा मानते हैं और अजनबियों पर हमला करते हैं।
  • आधुनिक बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण, हल्की सी संक्रामक बीमारी (जैसे सर्दी-जुकाम) भी इनके लिए घातक साबित हो सकती है।
  • इसी कारण भारतीय सरकार ने सख्त 'नो-कॉन्टैक्ट' नीति बनाई है ताकि इनका जीवन सुरक्षित रहे।

उत्तर सेंटीनेल द्वीप क्यों प्रतिबंधित है?

कानूनी संरक्षण:

1956 में, भारत सरकार ने उत्तर सेंटीनेल द्वीप को संरक्षित जनजातीय क्षेत्र घोषित कर दिया और कई कड़े नियम लागू किए:

·        द्वीप के चारों ओर 3 नॉटिकल मील (लगभग 5.5 किमी) का प्रतिबंधित क्षेत्र।

·        सशस्त्र गश्ती दल, जो अवैध घुसपैठ रोकते हैं।

·        फोटोग्राफी और किसी भी तरह के संपर्क पर पूर्ण प्रतिबंध।

इन नियमों का उद्देश्य  सेंटीनेली जनजाति को बाहरी दुनिया से बचाना और बाहरी लोगों को भी किसी संभावित खतरे से सुरक्षित रखना है।

उनकी अलग-थलग जीवनशैली की सुरक्षा क्यों जरूरी है?

  • बीमारियों का खतरा: बाहरी दुनिया के संपर्क से वे घातक संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।
  • संस्कृति की रक्षा: बाहरी दखल से उनकी अनूठी पहचान और परंपराएँ खत्म हो सकती हैं।
  • आत्मनिर्णय का अधिकार: हर जनजाति को अपने अनुसार जीवन जीने का अधिकार है।

भारत सरकार की कठोर सुरक्षा नीतियाँ इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर बनाई गई हैं।