होम > Blog

Blog / 27 Mar 2025

भारतीय मानसून पर अध्ययन

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) द्वारा किए गए एक अध्ययन में भारतीय मानसून से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खोज की गई है, जो देश की कृषि और जल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। एनपीजे क्लाइमेट एंड एटमॉस्फेरिक साइंस' में प्रकाशित इस शोध में यह उजागर किया गया है कि क्लाउड बैंड (Cloud Bands) की शक्ति मानसूनी की वर्षा की गति और घनत्व को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाती है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:

क्लाउड बैंड की शक्ति: अध्ययन के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मेघ पट्टी (क्लाउड बैंड) के उत्तर की ओर बढ़ने में उनकी शक्ति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि क्लाउड बैंड अधिक शक्तिशाली होता है, तो यह तेज हवाओं के माध्यम से वायुमंडलीय नमी को बढ़ाता है, जिससे उनका उत्तर की ओर प्रभावी रूप से प्रसार संभव हो पाता है।

वर्षा पर प्रभाव: अध्ययन से पता चलता है कि मजबूत क्लाउड बैंड मानसून के दौरान वर्षा घनत्व (intensity) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह खोज उन पूर्व सिद्धांतों को चुनौती देती है, जिनमें कहा गया था कि क्लाउड बैंड अपनी प्रारंभिक ताकत की परवाह किए बिना उत्तर की ओर स्वतः ही फैल जाएंगे।

भविष्य के अनुमान: शोध से संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ेगा, पृष्ठभूमि वायुमंडलीय नमी में वृद्धि होने की संभावना है। इस परिवर्तन के परिणामस्वरूप भारत और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में वर्षा में 42% से 63% तक की वृद्धि हो सकती है।

मानसून के बारे में:

·         मानसून मौसमी हवाएँ हैं, जो मौसम के परिवर्तन के साथ अपनी दिशा बदलती हैं। ये हवाएँ आवधिक और नियमित पैटर्न का पालन करती हैं। गर्मियों में ये समुद्र से ज़मीन की ओर और सर्दियों में ज़मीन से समुद्र की ओर प्रवाहित होती हैं।
"मानसून" शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द "मौसिन" या मलय शब्द "मोनसिन" से हुई है, जिसका अर्थ 'मौसम' होता है।

·         मानसून भारतीय उपमहाद्वीप में एक महत्वपूर्ण जलवायु विशेषता है। दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में वे इस क्षेत्र में अधिक स्पष्ट हैं। भारतीय मानसून मौसमी हवाओं की एक दोहरी प्रणाली है:

·         दक्षिण-पश्चिम मानसून: ये हवाएँ गर्मियों के दौरान समुद्र से ज़मीन की ओर बहती हैं, जिससे भारत के अधिकांश हिस्सों में तीव्र वर्षा होती है।

·         उत्तर-पूर्वी मानसून: ये हवाएँ सर्दियों के दौरान ज़मीन से समुद्र की ओर बहती हैं, जिससे मुख्य रूप से भारत के दक्षिण-पूर्वी तट, जैसे कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के दक्षिणी तट पर वर्षा होती है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत को प्रभावित करने वाले कारक:

तिब्बती पठार का गर्म होना और हिंद महासागर के ऊपर उच्च दबाव प्रणाली।

उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम (STJ) और उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट (अफ्रीकी पूर्वी जेट) जैसी वायुमंडलीय जेट धाराओं का प्रभाव।

अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का स्थान।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की तीव्रता को प्रभावित करने वाले कारक:

तिब्बत के ऊपर कम दबाव प्रणाली और दक्षिणी हिंद महासागर के ऊपर उच्च दबाव प्रणाली की ताकत।

​​सोमाली जेट (जिसे फाइंडलेटर जेट भी कहा जाता है) और सोमाली करंट (फाइंडलेटर करंट)।

वाकर सेल की हिंद महासागर शाखा और हिंद महासागर डिपोल।

निष्कर्ष:

भारतीय मानसून एक जटिल वायुमंडलीय तंत्र (complex atmospheric system) है, जो कई वैश्विक और क्षेत्रीय कारकों से प्रभावित होता है। इसका प्रभाव न केवल भारतीय कृषि, जल संसाधन और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।