संदर्भ:
हाल ही में भारत के रोजगार परिदृश्य में एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है, जहां वेतनभोगी वर्ग की आय स्थिर बनी हुई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, वास्तविक मजदूरी (Real Wages) 2019 की जून तिमाही की तुलना में 2024 की जून तिमाही में 1.7% कम थी।
वास्तविक मजदूरी :
वास्तविक मजदूरी से तात्पर्य मुद्रास्फीति (Inflation) के लिए समायोजित वेतन से है। यह किसी व्यक्ति की कमाई की वास्तविक क्रय शक्ति को इंगित करता है, अर्थात मुद्रास्फीति के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, उनकी आय से वह कितनी वस्तु औऱ सेवाएं खरीद सकते हैं।
यह समझने में मदद करता है कि क्या आय वृद्धि जीवन की बढ़ती लागत के साथ तालमेल बिठा रही है।
वेतनभोगी नौकरियों में वेतन के स्थिरता के कारण:
● श्रम की अधिक आपूर्ति: उपलब्ध उच्च वेतन वाली नौकरियों की तुलना में नौकरी चाहने वालों की संख्या अधिक है। इससे रोजगार दर में वृद्धि तो हुई है, लेकिन वेतन वृद्धि सीमित रही है।
● उच्च शिक्षा में घटता रिटर्न :कई शिक्षित कर्मचारी अपनी नौकरियों के लिए अति-योग्य हैं। इससे कौशल और वेतन के बीच असंगति बनी रहती है।
● कौशल अंतराल (Skill Gap):कई उद्योगों में आवश्यक कौशल की कमी के कारण श्रमिक उच्च वेतन की माँग नहीं कर सकते।इससे वेतन वृद्धि बाधित होती है।
● मांग में कमी:निजी क्षेत्र के निवेश में गिरावट से वेतनभोगी कर्मचारियों की मांग प्रभावित हुई है। इससे नए रोजगार के अवसरों में कमी आई है और वेतन वृद्धि ठप हो गई है।
अस्थायी श्रम और स्व-नियोजित श्रमिकों पर प्रभाव:
1. अस्थायी श्रम (Casual Labour)
● वेतनभोगी कर्मचारियों के विपरीत, अस्थायी श्रमिकों के वेतन में वास्तविक वृद्धि देखी गई है। जून 2024 में, अस्थायी श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी 2019 की तुलना में 12.3% अधिक थी।
● ग्रामीण क्षेत्रों में वेतन वृद्धि अधिक रही, लेकिन अस्थायी श्रम अत्यधिक असुरक्षित और अनियमित होता है।
2. स्व-नियोजित श्रमिक (Self-Employed Workers)
● महामारी के बाद स्व-नियोजित व्यक्तियों के वेतन में सुधार हुआ, लेकिन जून 2024 में वास्तविक मजदूरी अभी भी 2019 की तुलना में 1.5% कम थी।
● स्व-नियोजित व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही है, विशेषकर अवैतनिक (Unpaid) श्रमिकों के रूप में, जो श्रम बाजार में संकट को दर्शाता है।
संभावित समाधान:
वेतन वृद्धि को पुनर्जीवित करने और आय स्थिरता में सुधार के लिए विशेषज्ञों द्वारा निम्नलिखित उपाय सुझाए गए हैं:
1. कौशल विकास (Skill Development):
● सभी स्तरों पर बेहतर कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रमिक आधुनिक नौकरी बाजार की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
2. अर्थव्यवस्था में निवेश (Investment in Economy):
● निजी क्षेत्र के निवेश में वृद्धि से वेतनभोगी कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी।इससे रोजगार सृजन (Job Creation) को बढ़ावा मिलेगा।
3. नीतिगत समर्थन (Policy Support):
● कर नीति (Tax Policy) में सुधार और सरकारी हस्तक्षेप से खपत और मांग को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे आर्थिक वृद्धि और वेतन में सुधार संभव होगा।