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Blog / 03 Apr 2025

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर

संदर्भ:

भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग 18 वर्ष बाद, अमेरिकी ऊर्जा विभाग (डीओई) ने एक अमेरिकी कंपनी को भारत में परमाणु रिएक्टरों के निर्माण और डिजाइन के लिए मंजूरी दे दी है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों में एक बड़ी प्रगति है।

मुख्य तथ्य:

अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने होलटेक इंटरनेशनल को भारत को स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) तकनीक हस्तांतरित करने के लिए अनुमति दे दी है 26 मार्च, 2025 को जारी की गई यह मंजूरी होलटेक को तीन भारतीय संस्थाओं के साथ सहयोग करने की अनुमति देती है :

·        होलटेक एशिया : होलटेक की क्षेत्रीय सहायक कंपनी।

·        लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड: प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, निर्माण और विनिर्माण की एक प्रमुख भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी।

·        टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड : टाटा समूह की एक इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी सेवा देने वाली कंपनी।

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) क्या है?

·         स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर एक परमाणु रिएक्टर होता है, जो पारंपरिक बड़े परमाणु रिएक्टरों की तुलना में आकार और उत्पादन क्षमता में छोटा होता है।

·         इसको कारखाने में निर्मित करने तथा उसके बाद संयोजन के लिए साइट पर ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो पारंपरिक बड़े रिएक्टरों की तुलना में अधिक लचीला और कम लागत का  विकल्प प्रदान करता है।

·         एसएमआर का मुख्य लाभ इसकी विस्तार की क्षमता में निहित है, जिसका अर्थ है कि इसमें और अधिक यूनिट जोड़कर उनका आकार बढ़ाया जा सकता है तथा छोटे आकार के कारण यह कम और सीमित जगह वाले इलाकों के लिए उपयुक्त होता है।

What are Small Modular Reactors (SMRs)? | IAEA

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर के लाभ:

·         ज्यादा सुरक्षित : ये रिएक्टर खुद ही सेफ्टी का ध्यान रखते हैं, जो मानव हस्तक्षेप और जटिल यांत्रिक प्रणालियों की आवश्यकता को कम करते हैं।

·         कम लागत: इनका निर्माण और रखरखाव बड़े रिएक्टरों की तुलना में सस्ता हो सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर ऊर्जा अवसंरचना के लिए सीमित बजट वाले देशों या क्षेत्रों के लिए परमाणु ऊर्जा अधिक सुलभ हो जाती है।

·         विस्तार की क्षमता: इसको बदलती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बढ़ाया जा सकता है, जो बड़े रिएक्टरों की तुलना में अधिक अनुकूल होते हैं।

·         पर्यावरणीय प्रभाव: सभी परमाणु ऊर्जा की तरह, यह भी परिचालन के दौरान कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं करते हैं, जिससे यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का एक अच्छा विकल्प बन सकते हैं।

प्रमुख चुनौतियाँ:

·         नियामक स्वीकृति: यद्यपि एसएमआर में काफी संभावनाएं हैं, फिर भी उन्हें लाइसेंसिंग, सुरक्षा मानकों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के संदर्भ में कई विनियामक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

·         सार्वजनिक धारणा: एसएमआर सहित परमाणु ऊर्जा को अक्सर सुरक्षा, अपशिष्ट निपटान और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो विकास प्रक्रिया को धीमा कर सकता है।

·         आर्थिक पहलू: भले ही स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर कम लागत वाले हों, लेकिन उनकी आर्थिक सफलता इस पर निर्भर करेगी कि कितने यूनिट बनाए जाते हैं और उनके लिए जरूरी बुनियादी ढांचे पर कितना खर्च आता है।

आगे की राह:

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर परमाणु ऊर्जा में अहम् योगदान देते हैं, जो अधिक सुरक्षित, लचीले और कम लागत की परमाणु ऊर्जा की संभावना प्रदान करते हैं। अगर इन्हें सही तरीके से लागू किया जाए, तो ये दुनिया की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करके पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।