संदर्भ:
हाल ही में जारी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की 2020-2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को वैश्विक स्तर पर दूसरे सबसे बड़े हथियार आयातक के रूप में स्थान दिया गया है।
SIPRI रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
● भारत के हथियार आयात में गिरावट: 2015-2019 की तुलना में भारत के वैश्विक हथियार आयात में 9.3%(2020-2024) की कमी आई है।
● रूस की आपूर्ति में गिरावट: रूस, जोकि पारंपरिक रूप से भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है, उसकी हिस्सेदारी 2010-2014 में 72% से घटकर 2020-2024 में 36% रह गई।
● फ्रांस की बढ़ी हुई भूमिका: फ्रांस भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा, जिसने भारत के हथियारों के आयात का 28% प्रदान किया, जिसमें राफेल जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जैसी खरीद शामिल है।
● चीन की गिरावट: चीन मजबूत घरेलू रक्षा उद्योग और हथियारों के आयात में 64% की कमी के कारण शीर्ष 10 हथियार आयातकों से बाहर हो गया।
● क्षेत्रीय रुझान: पाकिस्तान के हथियारों के आयात में 61% की वृद्धि हुई, जिसमें चीन ने उसके कुल हथियारों का 81% आपूर्ति किया। इसके विपरीत, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद रक्षा खर्च में वृद्धि के कारण यूरोपीय आयात में उछाल आया।
विदेशी हथियारों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत के प्रयास:
● बजटीय आवंटन: भारत सरकार ने 2024-25 के बजट में रक्षा के लिए 6.21 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें 75% पूंजी घरेलू निर्माताओं के लिए आरक्षित है।
● सृजन पोर्टल: आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, सृजन पोर्टल भारतीय विक्रेताओं से रक्षा खरीद की सुविधा प्रदान करता है।
● सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ: ये सूचियाँ कुछ रक्षा वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित करती हैं, यह सुनिश्चित करती हैं कि उनका उत्पादन भारत के अंदर किया जाए।
● रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020: डीएपी स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित उपकरणों के लिए “खरीदें (भारतीय-आईडीडीएम)” जैसी श्रेणियों के साथ घरेलू खरीद को प्राथमिकता देता है।
● निजी क्षेत्र की भागीदारी: निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए, भारत के कुल रक्षा उत्पादन का 21% अब निजी कंपनियों से आता है।
घरेलू रक्षा विनिर्माण से संबंधित भारत की पहल:
● रक्षा औद्योगिक गलियारे: विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो गलियारे स्थापित किए गए हैं।
● सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयाँ (डीपीएसयू): भारत के डीपीएसयू, जैसे एचएएल और बीईएल, आईएनएस विक्रांत (विमान वाहक) और एलसीए तेजस (लड़ाकू जेट) जैसी प्रमुख स्वदेशीकरण परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं।
● प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई): सरकार ने रक्षा विनिर्माण को स्वचालित मार्ग से 74% एफडीआई और सरकारी मार्ग से 100% एफडीआई की अनुमति दी है, जिससे इस क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला है।
भारत के भविष्य के लक्ष्य:
● उत्पादन लक्ष्य: भारत ने 2025 तक 1.75 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जबकि 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य है।
● अनुसंधान एवं विकास और नवाचार: iDEX (रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार) जैसी पहल स्टार्टअप और एमएसएमई को सैन्य प्रौद्योगिकी में नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। ये प्रयास विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने और भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष:
सिपरी रिपोर्ट मौजूदा चुनौतियों और रक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत द्वारा उठाए जा रहे प्रगतिशील कदमों दोनों को दर्शाती है। दूसरे सबसे बड़े हथियार आयातक के रूप में भारत की स्थिति इसकी महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतों को उजागर करती है। हालांकि, स्वदेशीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और रणनीतिक निवेश पर केंद्रित चल रही पहलों के साथ, भारत अपने घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ाते हुए विदेशी आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए प्रयासरत है।