संदर्भ:
केंद्र सरकार प्रवास और विदेशी नागरिकों से जुड़े नियमों को आधुनिक बनाने के लिए "प्रवास और विदेशी विधेयक, 2025" लाने की तैयारी में है। यह नया कानून भारत में विदेशियों के प्रवेश, यात्रा और नियमों को नियंत्रित करेगा और पुराने हो चुके कानूनों की जगह लेगा।
कौन-कौन से पुराने कानून बदले जाएंगे?
यह विधेयक स्वतंत्रता-पूर्व और पुराने कानूनों को हटाकर उनकी जगह लेगा, जिनमें शामिल हैं:
1. पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920
2. विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939
3. विदेशियों का अधिनियम, 1946
4. प्रवासन (वाहकों की जिम्मेदारी) अधिनियम, 2000
ये कानून द्वितीय विश्व युद्ध के समय के हैं, जो आज की प्रवासन चुनौतियों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
मुख्य प्रावधान:
1. कड़े दंड और जुर्माने:
o बिना अनुमति प्रवेश: भारत में बिना वैध अनुमति प्रवेश करने पर ₹5 लाख तक का जुर्माना लगेगा।
o नकली पासपोर्ट का उपयोग: फर्जी पासपोर्ट का उपयोग करने पर ₹10 लाख तक का जुर्माना होगा।
2. संस्थानों की ज़िम्मेदारी:
o यूनिवर्सिटी, अस्पताल और अन्य संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे विदेशी नागरिकों के प्रवेश नियमों का पालन कर रहे हैं।
3. विदेशियों के नियमन के स्पष्ट नियम:
o भारत में मौजूद विदेशी नागरिकों का पंजीकरण, यात्रा और अन्य गतिविधियों को नियंत्रित किया जाएगा।
o प्रशासन को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह विदेशियों के अक्सर जाने वाले स्थानों की निगरानी कर सके।
4. एयरलाइंस और जहाजों की ज़िम्मेदारी:
o एयरलाइंस और शिपिंग कंपनियां उन विदेशी नागरिकों को लाने के लिए जिम्मेदार होंगी, जिनके दस्तावेज भारतीय कानूनों के अनुसार सही नहीं हैं।
5. विदेशियों को देश से निकालने का अधिकार:
o केंद्र सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह उन विदेशी नागरिकों को देश से हटा सके, जो प्रवास नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
6. आधुनिक और सरल प्रक्रियाएं:
o पासपोर्ट और वीज़ा से जुड़े नियमों को अधिक व्यवस्थित और आसान बनाया जाएगा, जिससे प्रवास प्रणाली सुरक्षित और कुशल बन सके।
इस विधेयक के प्रभाव:
- भारत में आने वाले विदेशी नागरिकों पर अधिक नियंत्रण होगा।
- यूनिवर्सिटी और अस्पतालों की ज़िम्मेदारी साफ़ तौर पर तय होगी।
- बिना अनुमति प्रवेश और नकली दस्तावेज़ों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- भारत की प्रवास नीतियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी।
निष्कर्ष:
यह नया विधेयक कई पुराने कानूनों को हटाकर एक मजबूत और आधुनिक प्रवासन कानून तैयार करेगा। इससे सीमा सुरक्षा मजबूत होगी, प्रशासनिक ज़िम्मेदारी तय होगी और भारत की प्रवास नीति वैश्विक मानकों के अनुरूप बनेगी।