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Blog / 01 Apr 2025

बाघों की निगरानी के लिए नया प्रोजेक्ट

सन्दर्भ-

भारत सरकार बाघों की निगरानी के लिए एक नया प्रोजेक्ट शुरू कर रही है, जिसका उद्देश्य अभयारण्यों (टाइगर रिजर्व) के बाहर रहने वाले बाघों की निगरानी करना है। इस पहल का उद्देश्य मानव-पशु संघर्ष, शिकार (पॉचिंग) और बाघों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण से जुड़े मुद्दों का समाधान करना है। यह प्रोजेक्ट 10 राज्यों में लागू किया जाएगा और इसे पहले से चल रहे "प्रोजेक्ट टाइगर" के पूरक के रूप में विकसित किया गया है।

प्रोजेक्ट के मुख्य उद्देश्य-

1. बाघों की निगरानी: टाइगर रिजर्व के बाहर रहने वाले बाघों की संख्या, उनके आवास और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना।

2. मानव-पशु संघर्ष कम करना: स्थानीय समुदायों से संपर्क कर संघर्ष को कम करने और बाघों के हमलों से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की व्यवस्था करना।

3. शिकार पर रोक: निगरानी बढ़ाकर बाघों के अवैध शिकार को रोकना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।

4. आवास सुधार: बाघों के प्राकृतिक आवास को बचाने और सुधारने पर ध्यान देना। 

प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन और बजट-

·        राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) इस प्रोजेक्ट का संचालन करेगा।

·        2026-27तक के लिए इस प्रोजेक्ट का प्रस्तावित बजट 176.45 करोड़ रुपये रखा गया है।

·        इस परियोजना के लिए धनराशि "नेशनल कंपेनसेटरी एफॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी" (CAMPA) से ली जाएगी।

 

बाघों से जुड़े आंकड़े और चुनौतियाँ-

 

भारत में कुल बाघों की संख्या: अनुमानित 3,628 बाघ, जिनमें से 30% अभयारण्यों के बाहर रहते हैं।

मानव-बाघ संघर्ष: 2020 से 2024 के बीच 378 लोगों की मौत बाघों के हमलों से हुई। सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश हैं।

शिकार (पॉचिंग): मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हाल ही में हुई शिकार की घटनाओं से यह पता चलता है कि निगरानी में अभी भी कुछ कमियां हैं।

 

किन राज्यों में लागू होगा यह प्रोजेक्ट?

प्रारंभ में, यह प्रोजेक्ट 10 राज्यों के 80 वन प्रभागों (Forest Divisions) में लागू किया जाएगा। इनमें कुछ प्रमुख स्थान हैं:

केरलवायनाड

महाराष्ट्रचंद्रपुर

उत्तर प्रदेशपीलीभीत

अन्य वे राज्य जहाँ बाघों की संख्या अधिक है। 

पृष्ठभूमि-

प्रोजेक्ट टाइगर: भारत में बाघों के संरक्षण के लिए यह कार्यक्रम 1973 में शुरू किया गया था।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA): 2005 में स्थापित इस संगठन का उद्देश्य बाघ संरक्षण योजनाओं की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन करना है। 

निष्कर्ष-

यह नया प्रोजेक्ट अभयारण्यों के बाहर रहने वाले बाघों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। बाघों की निगरानी, समुदायों की भागीदारी और उनके आवासों की सुरक्षा पर ध्यान देकर, यह पहल बाघों और मनुष्यों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व (coexistence) को बढ़ावा देने का प्रयास करेगी। इस परियोजना की सफलता NTCA, राज्य वन विभागों और स्थानीय समुदायों के सहयोग पर निर्भर करेगी। अगर इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह भारत में बाघ संरक्षण के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।