संदर्भ:
हाल ही में लोकसभा ने बॉयलर विधेयक, 2024 को पारित किया, जिसका उद्देश्य बॉयलर के संचालन को सुरक्षित बनाना, स्टीम-बॉयलर विस्फोटों को रोकना और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाना है। यह विधेयक बॉयलर अधिनियम, 1923 की जगह लेता है। इससे पहले, दिसंबर 2024 में राज्यसभा ने इसे मंजूरी दे दी थी।
बॉयलर अधिनियम 1923 की स्थापना स्टीम बॉयलर के निर्माण, स्थापना, संचालन, परिवर्तन और मरम्मत को विनियमित करने के लिए की गई थी, ताकि पूरे भारत में उनका सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हो सके।
बॉयलर विधेयक, 2024 की मुख्य विशेषताएं:
1. बॉयलर का विनियमन: विधेयक के अनुसार, बॉयलर के संचालन से पहले उसका पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसे हर साल नवीनीकृत करना आवश्यक होगा।
2. छूट: विधेयक के अनुसार, 25 लीटर से कम क्षमता वाले, 1 किलोग्राम/सेमी² से कम दबाव पर काम करने वाले और 100 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर पानी गर्म करने वाले बॉयलर इसके प्रावधानों से मुक्त होंगे। इसके अलावा, सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले बॉयलर भी इस विधेयक के दायरे में नहीं आएंगे।
3. अपराध और दंड: विधेयक में बॉयलर में अनधिकृत परिवर्तन या सुरक्षा वाल्वों से छेड़छाड़ जैसे अपराधों के लिए दंड की रूपरेखा दी गई है, जिसका उद्देश्य असुरक्षित प्रथाओं को रोकना है।
4. सुरक्षा और एकरूपता: विधेयक बॉयलर विस्फोटों को रोकने और देश भर में एक समान मानकों को बढ़ावा देकर जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
5. गैर-अपराधीकरण प्रावधान: विधेयक में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों को शामिल किया गया है, जिससे कुछ अपराधों को गैर-अपराधीकरण किया गया है। अब इन मामलों में कानूनी सजा की बजाय नागरिक दंड लगाया जाएगा, जिससे अनुपालन की प्रक्रिया आसान होगी।
विधेयक का महत्व:
बॉयलर विधेयक, 2024 का उद्देश्य देश भर में नियमों को मानकीकृत करके बॉयलर का उपयोग करने वाले उद्योगों में सुरक्षा बढ़ाना है। बॉयलर विस्फोटों को रोकने पर ध्यान केंद्रित करके, यह जीवन और संपत्ति दोनों की रक्षा करना चाहता है, जिससे एक सुरक्षित औद्योगिक वातावरण को बढ़ावा मिलता है।
मुख्य मुद्दे :
1. प्रावधानों से छूट: विधेयक राज्य सरकारों को अपने प्रावधानों से कुछ क्षेत्रों को छूट देने का अधिकार देता है, जिससे असंगतताएं और संभावित सुरक्षा समझौते हो सकते हैं।
2. अपील तंत्र का अभाव: केंद्र सरकार या निरीक्षकों द्वारा लिए गए निर्णयों के लिए औपचारिक अपील प्रक्रिया का अभाव है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर चिंताएँ पैदा होती हैं।
3. निरीक्षकों के लिए प्रवेश शक्तियाँ: निरीक्षकों को निरीक्षण के लिए परिसर में प्रवेश करने का अधिकार दिया जाता है। किन्तु, विधेयक इन शक्तियों के लिए सुरक्षा उपायों या दिशा-निर्देशों को निर्दिष्ट नहीं करता है, जिससे संभावित रूप से गोपनीयता और परिचालन स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष :
बॉयलर विधेयक, 2024 भारत में बॉयलर नियमों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है कि प्रमुख मुद्दों को संबोधित किया जाए, ताकि सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए पर्यावरणीय पहलुओं, न्यायिक निष्पक्षता और विभिन्न क्षेत्रों में समान अनुपालन से कोई समझौता न हो।