संदर्भ:
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एनवीएस-02 (NVS-02) उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के साथ अंतरिक्ष यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (शार) से जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट द्वारा किया गया।
NVS-02 उपग्रह और NavIC प्रणाली में इसकी भूमिका :
NavIC प्रणाली:
NVS-02 उपग्रह भारत की दूसरी पीढ़ी की NavIC प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन क्षमताओं को बढ़ाना है।
उद्देश्य: दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों का उद्देश्य पहले पीढ़ी की NavIC प्रणाली की सटीकता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है। यह प्रणाली शुरू में भारत की विदेशी नेविगेशन प्रणालियों जैसे GPS पर निर्भरता को कम करने के लिए लॉन्च की गई थी।
NavIC की विशेषताएँ:
भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली, जो भारत के भीतर और इसके सीमा से 1500 किलोमीटर तक उच्च सटीकता के साथ स्थिति, गति और समय (PVT) डेटा प्रदान करती है।
NVS-02 उपग्रह की प्रमुख विशेषताएँ:
- वजन और पावर: NVS-02 उपग्रह का वजन 2,250 किलोग्राम है और इसकी पावर क्षमता लगभग 3 kW है, जो इसे अपने निर्धारित जीवनकाल के दौरान अत्यधिक प्रभावी तरीके से कार्य करने के लिए सक्षम बनाती है।
- पेलोड संरचना: NVS-02 उपग्रह, अपने पूर्ववर्ती NVS-01 की तरह, तीन प्रमुख आवृत्ति बैंड्स: L1, L5, और S बैंड्स में नेविगेशन पेलोड से लैस है। इसके अतिरिक्त, इसमें C-बैंड में एक रेंजिंग पेलोड भी है, जो उपग्रह की स्थिति, गति और समय (PVT) सेवाओं की सटीकता को और भी बढ़ाता है।
- एटॉमिक घड़ी: NVS-02 उपग्रह की एक प्रमुख विशेषता इसकी रूबिडियम एटॉमिक फ्रिक्वेंसी स्टैंडर्ड (RAFS) है, जो सटीक समय की माप सुनिश्चित करता है। यह एटॉमिक घड़ी नेविगेशन और स्थिति डेटा की सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है
- विस्तारित जीवनकाल: NVS-02 उपग्रह का कार्यकाल 12 वर्षों तक बढ़ाया गया है, जिससे भारत की NavIC प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित होती है।
- स्वदेशी तकनीक: उपग्रह में स्वदेशी रूप से विकसित एटॉमिक घड़ियाँ हैं, जोकि पुराने सिस्टमों की तुलना में अधिक सटीकता प्रदान करती हैं। यह ISRO की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।
- पुराने उपग्रह का प्रतिस्थापन: NVS-02 उपग्रह, पुराने NavIC उपग्रह IRNSS-1E का प्रतिस्थापन करेगा, जो अब तक प्रणाली में कार्यरत था। यह उपग्रह 111.75°E की कक्षा में स्थापित होगा, जिससे NavIC प्रणाली की निरंतरता और विश्वसनीयता बनी रहेगी।
- विकास और एकीकरण: NVS-02 उपग्रह का डिज़ाइन, विकास और एकीकरण ISRO के U R राव उपग्रह केंद्र (URSC) में किया गया, जो संगठन की उपग्रह प्रौद्योगिकी में मजबूत क्षमताओं को दर्शाता है।
NavIC की भारत के लिए महत्ता :
- प्रौद्योगिकी में उन्नति: विभिन्न क्षेत्रों (रक्षा, कृषि, परिवहन, आपदा प्रबंधन) में उपग्रह नेविगेशन की बढ़ती मांग के साथ, NavIC एक विश्वसनीय क्षेत्रीय विकल्प प्रदान करता है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: NVS-02 उपग्रह भारत की आत्मनिर्भर उपग्रह नेविगेशन प्रणाली की क्षमता को मजबूत करता है, जो GPS (अमेरिका), GLONASS (रूस), BeiDou (चीन), और Galileo (यूरोपीय संघ) जैसे वैश्विक प्रणालियों से प्रतिस्पर्धा करता है।
- सैन्य और नागरिक उपयोग: NavIC की उन्नत विशेषताएँ रणनीतिक रक्षा और नागरिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करती हैं, जिससे भारत को एक मजबूत नेविगेशन विकल्प प्राप्त होता है।
NavIC का भविष्य और ISRO की दृष्टि :
· पूर्ण कक्षीय प्रणाली: NavIC अंततः सात कार्यात्मक उपग्रहों का गठन करेगा, जो भारतीय उपमहाद्वीप के लिए निरंतर, सटीक और विश्वसनीय सेवाएँ प्रदान करेंगे।
· राष्ट्रीय विकास: ये सेवाएँ शहरी योजना, कृषि, और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को लाभान्वित करेंगी।
· ISRO के लक्ष्य: NVS-02 उपग्रह का प्रक्षेपण इसरो के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष अन्वेषण और प्रौद्योगिकी नवाचार में प्रमुख देश बनना है।