सन्दर्भ : हाल ही में भारत सरकार ने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM) को मंजूरी दी है। इस मिशन के तहत 16,300 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है, जबकि इसका कुल बजट 34,300 करोड़ निर्धारित किया गया है, जिसे सात वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा।
· इस मिशन का उद्देश्य भारत को क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) में आत्मनिर्भर बनाना और ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) संक्रमण को गति देना है।
राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के मुख्य उद्देश्य:
1. भारत और विदेशों में क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और खनन को बढ़ावा देना।
2. आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू संसाधनों को सुरक्षित करना।
3. खनिजों के प्रसंस्करण (processing) के लिए नई तकनीकों का विकास करना।
4. पुराने उत्पादों से खनिजों को रिसाइकल (recycle) करने को प्रोत्साहित करना।
5. सरकारी और निजी कंपनियों को विदेशों में खनिज संपत्तियाँ खरीदने में सहायता करना।
क्रिटिकल मिनरल्स क्या होते हैं?
क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज या तत्व होते हैं, जो आधुनिक तकनीकों के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा (clean energy) के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण हैं, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), पवन ऊर्जा (wind turbines) और सौर ऊर्जा (solar panels) में इनका उपयोग होता है।
क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व:
कुछ प्रमुख क्रिटिकल मिनरल्स: कॉपर (Copper), लिथियम (Lithium), निकल (Nickel), कोबाल्ट (Cobalt) और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements)
इनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है:
1. नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) - पवन टरबाइन, सौर पैनल और बिजली ग्रिड में।
2. इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) - बैटरियों और EV चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उद्योग - स्मार्टफोन, रक्षा प्रणाली, और मेडिकल उपकरणों में।
वर्तमान विश्व में हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Energy Transition) की दिशा में अग्रसर है, जिसके परिणामस्वरूप क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मांग में तीव्र वृद्धि हो रही है। भारत के तकनीकी सशक्तिकरण एवं आर्थिक प्रगति के लिए इन खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Domestic Supply Chain) को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
सरकार की रणनीति और क्रियान्वयन:
1. खनन मंजूरी की प्रक्रिया को तेज़ करना - खनन परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज़ और प्रभावी बनाने हेतु सरलीकृत एवं समयबद्ध मंजूरी प्रणाली लागू करने की योजना बनाई गई है।
2. खनिजों का भंडार तैयार करना - महत्वपूर्ण खनिजों का एक रणनीतिक भंडार (Strategic Reserve) बनाया जाएगा।
3. नीति सुधार - 1957 के "खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम" में 2023 में संशोधन किया गया, जिससे 24 रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी संभव हो सकी।
4. भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India - GSI) की खोज परियोजनाएँ
o पिछले 3 वर्षों में 368 खनिज खोज परियोजनाएँ शुरू की गईं।
o 2025-26 में 227 और परियोजनाएँ शुरू करने की योजना है।
5. आयात शुल्क में छूट – 2024-25 के बजट में क्रिटिकल मिनरल्स पर कस्टम ड्यूटी हटाई गई, जिससे घरेलू प्रसंस्करण और निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
NCMM का भारत की ऊर्जा नीति पर प्रभाव:
- स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करेगा।
- EV बैटरियों और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देगा।
- भारत को वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स बाजार में मजबूत स्थिति दिलाएगा।
- खनन और प्रसंस्करण क्षेत्र में विदेशी और निजी निवेश आकर्षित करेगा।
चुनौतियाँ और आगे की राह:
1. भू-राजनीतिक (Geopolitical) चुनौतियाँ - विदेशों में खनिज संपत्तियाँ खरीदने में अंतरराष्ट्रीय राजनीति बाधा बन सकती है।
2. पर्यावरणीय चिंताएँ - बढ़ता खनन पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
3. निवेश जोखिम - निजी क्षेत्र की भागीदारी तभी सफल होगी, जब सरकार उचित नीतिगत समर्थन देगी।