संदर्भ:
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के सबसे मूल्यवान समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक, निंगालू रीफ जो देश के पश्चिमी तट से दूर स्थित है, एक गंभीर सामूहिक ब्लीचिंग घटना की चपेट में आ गया है।
· वैज्ञानिकों ने इस घटना को "अभूतपूर्व" करार दिया है, क्योंकि महीनों तक जारी समुद्री ऊष्मा के कारण निंगालू रीफ के व्यापक हिस्से प्रभावित हो गए हैं और प्रवाल बड़े पैमाने पर फीके सफेद रंग में बदल गए हैं। यह स्थिति न केवल इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में मौजूद प्रवाल पारिस्थितिकीय प्रणालियों के लिए गंभीर संकट का संकेत देती है।
निंगालू रीफ के बारे में:
· पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट के साथ 300 किलोमीटर तक फैली निंगालू रीफ दुनिया की सबसे बड़ी फ्रिंजिंग रीफ (Fringing Reef) में से एक है, जो अपने जीवंत प्रवाल पारिस्थितिकी तंत्र, विविध समुद्री जीवन और प्रवासी व्हेल शार्क के लिए प्रसिद्ध है। दशकों से, यह शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक आश्रय स्थल रहा है, जो इसकी प्राचीन जैव विविधता के कारण आकर्षित होते हैं।
· हालांकि, हाल के अवलोकनों से पता चलता है कि यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र अब बढ़ते समुद्री तापमान के कारण अस्तित्व के लिए गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। वर्तमान ब्लीचिंग (Bleaching) घटना न केवल हाल के वर्षों में सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है, बल्कि 2011 के बाद से सबसे महत्वपूर्ण भी मानी जा रही है, जब इसी तरह की घटना ने रीफ पर व्यापक रूप से नकारात्मक प्रभाव डाला था।
कोरल ब्लीचिंग के बारे में:
· कोरल ब्लीचिंग तब होती है जब समुद्र का तापमान इतना बढ़ जाता है कि यह कोरल के लिए तनावपूर्ण हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, कोरल अपने ऊतकों में रहने वाले सहजीवी शैवाल (Symbiotic Algae) को बाहर निकाल देते हैं, जिन्हें ज़ूक्सांथेला (Zooxanthellae) कहा जाता है।
· ये शैवाल कोरल के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के माध्यम से कोरल को पोषक तत्व (Nutrients) प्रदान करते हैं। ये शैवाल कोरल को उनका विशिष्ट जीवंत रंग (Vibrant Color) भी प्रदान करते हैं। जब ये शैवाल बाहर निकल जाते हैं, तो कोरल अपना रंग खो देते हैं और विरंजित हो जाते हैं।
हालांकि, कोरल इस स्थिति से कुछ समय के लिए जीवित रह सकते हैं, लेकिन अगर परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं हुईं, तो लंबे समय तक ब्लीचिंग कोरल की मृत्यु का कारण बन सकती है।
समुद्री तापमान में वृद्धि:
· बड़े पैमाने पर कोरल ब्लीचिंग की घटना में योगदान देने वाला मुख्य कारक लंबे समय तक चलने वाली समुद्री हीटवेव है, जिसने समुद्र के तापमान को औसत से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा दिया है।
· ऑस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञान ब्यूरो के अनुसार, यह उच्च तापमान पिछले कुछ महीनों से बना हुआ है, जिसने कोरल के लिए एक ऐसा प्रतिकूल वातावरण उत्पन्न कर दिया है ,जोकि प्रावालो के लिए क्षति का कारण बन रहा हैं।
· जनवरी के मध्य तक, महासागर का तापमान महत्वपूर्ण "ब्लीचिंग थ्रेशहोल्ड" को पार कर गया था, जिससे कोरल प्रजातियाँ अत्यधिक गर्म पानी में जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही थीं।
· यह घटना न केवल निंगालू रीफ बल्कि दुनिया भर में समुद्री पारिस्थितिकी प्रणालियों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों की याद दिलाती है।
वैश्विक संदर्भ में कोरल रीफ्स पर बढ़ते तापमान का प्रभाव:
· वर्तमान समुद्री हीटवेव एक व्यापक वैश्विक पैटर्न का हिस्सा है, जो विशेष रूप से मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन (Anthropogenic Climate Change) के कारण उत्पन्न हो रहा है। बढ़ते तापमान की यह प्रवृत्ति (Trend) न केवल लगातार जारी है बल्कि समय के साथ और भी तीव्र होती जा रही है।
· बढ़ते समुद्री तापमान के कारण उत्पन्न हीट स्ट्रेस, अन्य पर्यावरणीय दबावों जैसे प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ना , और तटीय विकास के साथ मिलकर कोरल रीफ्स के पुनरुद्धार की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
निष्कर्ष :
निंगालू रीफ की मौजूदा ब्लीचिंग घटना एक बड़ा संकट है, जो न सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के महत्वपूर्ण प्राकृतिक चमत्कारों में से एक को बल्कि हमारे महासागरों के पर्यावरण को भी खतरे में डाल रही है। वैज्ञानिक इस स्थिति पर नज़र रख रहे हैं। यह दिखाता है कि इन नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्रों को बचाने के लिए तुरंत जलवायु परिवर्तन पर कदम उठाने की आवश्यकता है। निंगालू रीफ और दुनिया भर की रीफ्स का भविष्य इसी पर निर्भर करता है।