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Blog / 08 Mar 2025

पेरिस जलवायु समझौते का लक्ष्य (1.5°C) खतरे में

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) के अध्यक्ष जिम स्की ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की वैश्विक आकांक्षा अब गंभीर रूप से खतरे में है।

पेरिस जलवायु समझौते के बारे में:

पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन पर एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे 12 दिसंबर 2015 को पेरिस, फ्रांस में आयोजित COP21 सम्मेलन में 196 देशों द्वारा अपनाया गया था। यह 4 नवंबर 2016 को लागू हुआ।

इस समझौते का प्राथमिक लक्ष्य है:

·        ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना  और 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना।

पेरिस समझौता हर पाँच साल में जलवायु लक्ष्यों की समीक्षा और सुधार की प्रक्रिया पर आधारित है। इसके तहत, देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) प्रस्तुत करते हैं, जिनमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन के लिए उनकी योजनाएँ शामिल होती हैं। प्रत्येक नया NDC पिछले लक्ष्य से अधिक प्रभावी और महत्वाकांक्षी बनाया जाता है, ताकि जलवायु कार्रवाई को लगातार मजबूत किया जा सके।

जलवायु कार्रवाई में IPCC की भूमिका :

संयुक्त राष्ट्र का जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) जलवायु की स्थिति पर वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार करता है, जोकि सरकारों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं को दिशा देती हैं। IPCC की अगली रिपोर्ट, जो इसके तीन कार्य समूहों के निष्कर्षों का सार होगी, जलवायु संकट की गंभीरता को समझाने में मदद करेगी। यह रिपोर्ट 2029 की दूसरी छमाही में प्रकाशित होगी और जलवायु परिवर्तन से निपटने की नीतियों और वैश्विक प्रयासों के लिए एक मार्गदर्शक होगी।

प्रभाव और समाधान :

·        यदि ग्लोबल वार्मिंग को 2°C के बजाय 1.5°C तक सीमित किया जाता है, तो स्थलीय, मीठे पानी और तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे मानवता के लिए उनकी आवश्यक सेवाएँ सुरक्षित रहेंगी। हालाँकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए ऊर्जा, परिवहन, उद्योग और कृषि जैसे सभी क्षेत्रों में तत्काल और व्यापक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी करनी होगी। अपरिवर्तनीय जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और संधारणीय (sustainable) प्रथाओं को तेजी से अपनाना आवश्यक होगा।

आगे की राह:

·        जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों को रोकने के लिए तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है। IPCC इस ओर ध्यान दिलाता है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव और 1.5°C लक्ष्य के अनुरूप प्रभावी नीतियों का क्रियान्वयन अब विलंबित नहीं किया जा सकता। इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए सरकारों, उद्योगों और व्यक्तियों को एकजुट होकर तेजी से प्रयास करने होंगे, ताकि जलवायु संकट के सबसे गंभीर प्रभावों को कम किया जा सके और एक सतत (sustainable) भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

निष्कर्ष:

ग्लोबल वार्मिंग को 1.5°C तक सीमित रखने की वैश्विक प्रतिबद्धता अभी भी एक आशा की किरण है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए तत्काल और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। पेरिस समझौता और IPCC की रिपोर्ट जलवायु संकट से निपटने के लिए नीतिगत और वैज्ञानिक दिशा-निर्देश प्रदान करती हैं। अब समय गया है कि वैश्विक स्तर पर एकजुट होकर निर्णायक कदम उठाए जाएँ, ताकि एक सतत (sustainable) और जलवायु-संवेदनशील भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।