सन्दर्भ : हाल ही में वक्फ़ (संशोधन) विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने अपनी विचार-विमर्श प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। यह विधेयक देश के वक्फ़ कानूनों में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
· 500 से अधिक प्रस्तावित संशोधनों में से केवल 32 को स्वीकार किया गया, जोकि सभी सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों द्वारा प्रस्तुत किए गए थे।
मुख्य संशोधन:
- "उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ़ " अवधारणा में संशोधन :
o मूल विधेयक का उद्देश्य "उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ़" की अवधारणा को समाप्त करना था, जिसके तहत धार्मिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली संपत्तियों को वक्फ़ माना जाता था।
संशोधन : विवादित या सरकारी संपत्तियों को छोड़कर, "उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ़" की संपत्तियाँ वक्फ़ के रूप में बनी रहेंगी। साथ ही, इस कानून के लागू होने से पहले इन संपत्तियों का पंजीकरण आवश्यक होगा।
- विवादों की जांच:
o विधेयक में प्रारंभ में यह प्रस्तावित किया गया था कि सरकारी संपत्तियों से संबंधित विवादों को जिला कलेक्टर द्वारा निपटाया जाएगा।
संशोधन : राज्य सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए कलेक्टर के पद से उच्चतर अधिकारी को नामित करने की अनुमति दी गई।
· वाक़फ़ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों का समावेश:
- मूल विधेयक में वाक़फ़ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव था।
- संशोधन : बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्य होने चाहिए और यह संख्या चार तक बढ़ाई जा सकती है।
- संपत्ति पंजीकरण के लिए समय सीमा का विस्तार:
o मूल विधेयक में नए अधिनियम के लागू होने के छह महीने के भीतर वक़्फ़ संपत्तियों को एक वेबसाइट पर पंजीकृत करने की आवश्यकता थी।
संशोधन : वक़्फ़ संपत्तियों के रखवाले (मुतवल्ली) को राज्य में वक़्फ़ ट्रिब्यूनल की मंजूरी से समय सीमा बढ़ाने की अनुमति मिलती है।
ट्रिब्यूनलों में मुस्लिम कानून के विशेषज्ञ का समावेश:
संशोधन : वक़्फ़ ट्रिब्यूनलों में मुस्लिम कानून और न्यायशास्त्र के विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य ट्रिब्यूनलों को धार्मिक विवादों को अधिक प्रभावी ढंग से निपटाने में सक्षम बनाना है।
जेपीसी के बारे में:
जेपीसी संसद द्वारा गठित एक अस्थायी समिति होती है जो किसी विशेष विषय पर गहन अध्ययन करती है। जेपीसी में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य होते हैं, जिसमें लोकसभा के सदस्यों की संख्या राज्यसभा के सदस्यों की संख्या से दोगुनी होती है। जेपीसी की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन सरकार इन सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।