संदर्भ-
भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र ने उल्लेखनीय वृद्धि देखी है, पिछले वित्तीय वर्ष में इसने 25 गीगावाट (GW) की अपनी अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि हासिल की है। यह 2023-24 में जोड़े गए 18.57 GW से 35% की वृद्धि दर्शाता है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, इस बढ़ोतरी में सौर ऊर्जा (Solar Energy) का सबसे अहम योगदान रहा। सौर ऊर्जा की क्षमता 15 GW से बढ़कर लगभग 21 GW हो गई, यानी 38% का इज़ाफा हुआ। इसके अलावा, भारत की सौर पीवी (PV) सेल निर्माण क्षमता तीन गुना बढ़कर 9 GW हो गई है, जिससे देश की स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) का ढांचा और मजबूत हुआ है।
नवीकरणीय ऊर्जा-
नवीकरणीय ऊर्जा वह ऊर्जा होती है जो प्राकृतिक स्रोतों से मिलती है और लगातार पुनः उत्पन्न होती रहती है।
इसके विपरीत, जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) जैसे कोयला, पेट्रोल और डीजल सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं और जलने पर पर्यावरण प्रदूषण करते हैं।
सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत, बायोमास और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत लगातार प्रकृति द्वारा पुनः उपलब्ध हैं और पर्यावरण के लिए सुरक्षित होते हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियाँ
हालांकि भारत नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में कुछ बड़ी चुनौतियाँ भी हैं:
1. ज्यादा लागत:
o नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए मशीनरी, इंफ्रास्ट्रक्चर और ज़मीन की लागत ज्यादा होती है, जिससे यह जीवाश्म ईंधन से महंगा पड़ता है।
2. जमीन का संकट:
o सही जगह ढूंढना, उसे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए बदलना और सरकारी मंज़ूरी लेना एक लंबी और मुश्किल प्रक्रिया हो सकती है।
3. विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की दिक्कतें:
o कई बिजली वितरण कंपनियाँ (DISCOMs) पहले से ही थर्मल पावर (कोयला आधारित बिजली) के खरीद समझौतों (PPAs) में बंधी होती हैं, जिससे वे नवीकरणीय ऊर्जा को खरीद नहीं पातीं।
4. विद्युत भंडारण और ग्रिड प्रबंधन:
o नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन मौसम पर निर्भर करता है, जैसे बादल या हवा की कमी से उत्पादन घट सकता है।
o यह बिजली के भंडारण और ग्रिड संतुलन के लिए चुनौती बन जाता है।
5. पर्यावरणीय प्रभाव:
o पवन चक्कियाँ (Wind Turbines) पक्षियों और चमगादड़ों के लिए खतरा हो सकती हैं।
o ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जिससे जल संकट बढ़ सकता है।
सरकार की अहम योजनाएँ-
भारत सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं:
1. 100% विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति
o इस क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई है ताकि इसमें ज़्यादा से ज़्यादा निवेश आ सके।
2. पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
o सरकार ने ₹75,021 करोड़ की लागत से 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने की योजना बनाई है।
o यह योजना 2027 तक लागू रहेगी।
3. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) परियोजना
o यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और ग्रिड को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
4. सोलर पार्क योजना
o इसमें सौर ऊर्जा कंपनियों को ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी मंज़ूरी के साथ "प्लग-एंड-प्ले" सुविधा दी जाती है, जिससे वे आसानी से प्रोजेक्ट शुरू कर सकें।
5. राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (2023)
o इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
निष्कर्ष:
भारत का अक्षय ऊर्जा क्षेत्र मज़बूत नीति समर्थन और तकनीकी प्रगति से प्रेरित होकर तेज़ी से विस्तार कर रहा है। हालाँकि, ऊँची लागत, ज़मीन की कमी और बिजली भंडारण जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। अगर निवेश और नवाचार होते रहे, तो भारत स्वच्छ ऊर्जा के मामले में दुनिया का अगला बड़ा नेता बन सकता है और एक टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ सकता है।