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Blog / 27 Mar 2025

भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि: ILO रिपोर्ट

संदर्भ: हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, भारत ने अपने सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय सुधार किया है। यह कवरेज 2021 में 24.4% था, जो 2024 में दोगुना बढ़कर 48.8% हो गया है। यह वृद्धि सरकार के कार्यबल को अधिक लाभ प्रदान करने और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों को दर्शाती है।

सरकार की पहलें और उपलब्धियाँ:

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने ILO की विश्व सामाजिक सुरक्षा रिपोर्ट 2024-26 का हवाला देते हुए, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रकाश डाला:

  • 2014 से 2024 के बीच 17.1 करोड़ नई नौकरियाँ सृजित की गईं, जिनमें से 4.6 करोड़ नौकरियाँ पिछले वर्ष जोड़ी गईं।
  • बेरोज़गारी दर 2017-18 में 6% थी, जो 2023-24 में घटकर 3.2% रह गई।
  • महिला कार्यबल भागीदारी दर 22% से बढ़कर 40.3% हो गई।

इन सकारात्मक परिवर्तनों का श्रेय सरकार की प्रगतिशील नीतियों को दिया जाता है, जो आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देती हैं।

सामाजिक सुरक्षा का महत्व:

सामाजिक सुरक्षा आर्थिक स्थिरता और समावेशिता सुनिश्चित करती है:

कमज़ोर समूहों का समर्थन करना: बच्चों, महिलाओं, बुज़ुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों को सुरक्षित करना।

जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देना: गरीबी, असमानता और सामाजिक बहिष्कार को कम करके समाज को अधिक जलवायु-लचीला बनाना।

आर्थिक संक्रमण को सुविधाजनक बनाना: हरित नौकरियों और टिकाऊ आर्थिक प्रथाओं को बढ़ावा देना।

सामाजिक सुरक्षा में चुनौतियाँ:

1. सीमित कवरेज: केवल 26% महिलाएँ और 39% पुरुष कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा उपाय के अंतर्गत आते हैं।

2. अपर्याप्त वित्तपोषण: भारत सामाजिक सुरक्षा (स्वास्थ्य सेवा को छोड़कर) पर सकल घरेलू उत्पाद का केवल 5% खर्च करता है, जो वैश्विक औसत 13% से बहुत कम है।

3. स्वचालन प्रभाव:  कृत्रिम बुद्दिमत्ता  2030 तक भारत में 12 मिलियन नौकरियों को बाधित कर सकता है (मैककिन्से)।

सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रमुख कानून:

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO): 1952 अधिनियम के तहत स्थापित, यह EPF, EPS (1995) और EDLI (1976) का प्रबंधन करता है।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: यह गिग श्रमिकों, अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों और ग्रामीण और शहरी गरीबों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है, जिसमें बीमा, मातृत्व लाभ और स्वास्थ्य सेवा शामिल है।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS): सशस्त्र बलों को छोड़कर सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना।

प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ:

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP): BPL परिवारों में बुजुर्गों, विकलांगों और विधवाओं के लिए कल्याण सहायता।

ई-श्रम प्लेटफ़ॉर्म: गिग और प्रवासी मज़दूरों सहित असंगठित श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस।

प्रधान मंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM): असंगठित श्रमिकों के लिए एक पेंशन योजना।

अटल पेंशन योजना (APY): 18-40 वर्ष की आयु के कम आय वाले व्यक्तियों के लिए एक सेवानिवृत्ति बचत योजना।

निष्कर्ष:

भारत का बढ़ता सामाजिक सुरक्षा कवरेज आर्थिक स्थिरता और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालाँकि, सीमित अनौपचारिक क्षेत्र कवरेज, कम वित्तीय निवेश और स्वचालन के कारण नौकरी विस्थापन जैसी चुनौतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। सतत आर्थिक विकास और कल्याण के लिए फंडिंग को मजबूत करना और कवरेज का विस्तार करना महत्वपूर्ण होगा।